(मुनव्वर पठान, नांदेड़)
फैज़ उलूम प्राइमरी स्कूल, परभणी को एसक्यूएएएफ में ए प्लस ग्रेड मिलने से महाराष्ट्र के तालीमी नक्शे पर हाल ही में एक ऐसी खुशखबरी सामने आई है जिसने खास तौर पर उर्दू तालीम से जुड़े हलकों में खुशी और गर्व का माहौल पैदा कर दिया है।
परभणी शहर का फैज़ उलूम प्राइमरी स्कूल महाराष्ट्र सरकार के स्कूल क्वालिटी असेसमेंट एंड एश्योरेंस फ्रेमवर्क (एसक्यूएएएफ) के बाहरी मूल्यांकन में प्रतिष्ठित ए प्लस ग्रेड हासिल करने में कामयाब हुआ है। यह उपलब्धि इसलिए भी खास मानी जा रही है कि पूरे मराठवाड़ा क्षेत्र में यह एकमात्र उर्दू माध्यम का प्राइमरी स्कूल है जिसे यह ऊंचा दर्जा हासिल हुआ है।
महाराष्ट्र सरकार ने तालीमी साल 2024–25 के दौरान राज्य के सभी प्राइमरी स्कूल, हाई स्कूल और जूनियर कॉलेजों का एक व्यापक तालीमी जायज़ा लिया। इस प्रक्रिया के तहत पहले संस्थानों ने अपना सेल्फ इवैल्यूएशन किया, जिसके बाद चुनिंदा स्कूलों का बाहरी निरीक्षण किया गया।
राज्य भर के लगभग 1,02,675 तालीमी इदारों ने इस प्रक्रिया में हिस्सा लिया। इनमें से 10,712 स्कूलों को बाहरी निरीक्षण के लिए चुना गया और अंततः 10,644 स्कूलों का विस्तृत मूल्यांकन किया गया।
इस बड़े और कड़े तालीमी मूल्यांकन में केवल 429 संस्थान ही ए प्लस ग्रेड हासिल कर सके। इनमें परभणी जिले के महज़ 6 संस्थान शामिल हैं। इन चुनिंदा इदारों में फैज़ उलूम प्राइमरी स्कूल, परभणी का नाम शामिल होना न सिर्फ संस्था के लिए बल्कि पूरे इलाके की उर्दू तालीम के लिए गर्व की बात है।
तालीमी एक्सपर्ट के मुताबिक एसक्यूएएएफ का ए प्लस ग्रेड किसी भी स्कूल की बेहतरीन कारगुज़ारी का पैमाना माना जाता है। इसमें स्कूल के तालीमी नतीजे, इंतज़ामी निज़ाम, तालीमी माहौल, रिकॉर्ड की पारदर्शिता, तालीम की लगातार बेहतरी के लिए कोशिशें और लीडरशिप जैसे कई पहलुओं का बारीकी से जायज़ा लिया जाता है। फैज़ उलूम प्राइमरी स्कूल ने इन सभी मानकों पर बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए यह मुकाम हासिल किया है।
सोसायटी के मुतमिद डॉ. मोहम्मद समीउल्लाह खान ने इस सफलता को संस्था की पूर्व सदर-मुअल्लिमा और वर्तमान चेयरपर्सन मोहतरमा अनीस सिद्दीकी की लंबे समय से जारी तालीमी मेहनत और रहनुमाई का नतीजा बताया। उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि में स्कूल के मौजूदा सदर मुदर्रिस मोहम्मद सैफुल्लाह खान की योजना और मेहनत का भी अहम योगदान रहा है, जिन्होंने एसक्यूएएएफ की प्रक्रिया को मुकम्मल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
डॉ. समीउल्लाह खान ने स्कूल के तमाम असातिज़ा, गैर-तदरीसी अमला, तलबा और सरपरस्तों का भी शुक्रिया अदा किया और उम्मीद जताई कि यह इदारा आने वाले वक्त में भी तालीम के मैदान में इसी तरह कामयाबी की नई मिसालें कायम करता रहेगा।
इस शानदार कामयाबी पर संस्था के तहत चल रहे फातिमा जूनियर कॉलेज के प्रिंसिपल मोहम्मद सना उल्लाह खान, साइंस जूनियर कॉलेज की प्रिंसिपल पटेल तालिहा सुल्ताना, अलकरीम हाई स्कूल के सदर मुदर्रिस अब्दुल रज्जाक सिद्दीकी, फातिमा प्राइमरी स्कूल के सदर मुदर्रिस सैफुल्लाह खान, इकरा प्राइमरी स्कूल के सदर मुदर्रिस सैयद अल्ताफुल्लाह हुसैनी और फैज़ कैंपस के तमाम तदरीसी व गैर-तदरीसी अमले ने स्कूल को मुबारकबाद पेश की।
बहरहाल, फैज़ उलूम प्राइमरी स्कूल की यह कामयाबी इस बात की दलील है कि अगर तालीम के मैदान में लगन, बेहतरीन इंतज़ाम और मजबूत लीडरशिप मौजूद हो तो उर्दू माध्यम के तालीमी इदारे भी किसी से पीछे नहीं रहते। मराठवाड़ा में उर्दू तालीम की तरक्की के लिए यह कामयाबी एक नई उम्मीद और नई हौसला-अफजाई का पैगाम लेकर आई है।

