मटियामऊ कांड – एक मासूम की मौत और हमारी सोच

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 (रईस खान)

हरदोई के मल्लावां इलाके के मटियामऊ गांव से आई यह खबर बहुत दर्दनाक है। सात साल का छोटा बच्चा अबू सालेह, जो सिर्फ मेला देखने गया था, चार दिन बाद खेत में मिट्टी के नीचे दबा हुआ मिला। यह सिर्फ एक बच्चे की मौत नहीं है, बल्कि हमारे समाज के लिए एक बड़ा सवाल है।

एक मासूम जो घर से हंसते हुए निकला था, वह इस तरह वापस मिलेगा, किसी ने सोचा भी नहीं था। उसके मां-बाप का दर्द समझना भी मुश्किल है। पूरे गांव में दुख और डर का माहौल है।

लेकिन हमें सिर्फ दुख मनाने तक नहीं रुकना चाहिए। हमें यह भी सोचना होगा कि आखिर हमारे गांव और समाज में क्या बदल रहा है। आज गांव के बहुत से नौजवान पढ़ाई से दूर होते जा रहे हैं और जल्दी पैसे कमाने के लिए शहरों की तरफ भाग रहे हैं। कमाना जरूरी है, लेकिन बिना तालीम और सही रास्ते के इंसान भटक सकता है।

धीरे-धीरे गांव में नशा और गलत संगत का असर भी बढ़ रहा है। जब इंसान गलत रास्ते पर चल पड़ता है, तो उसे सही और गलत का फर्क समझ में नहीं आता। यही छोटी-छोटी गलतियां आगे चलकर बड़े अपराध बन जाती हैं।

हमारे यहां मस्जिदें तो हैं, लेकिन लोगों का रिश्ता दीन से कमजोर होता जा रहा है। इस्लाम हमें सिर्फ इबादत नहीं, बल्कि अच्छा इंसान बनना सिखाता है। आज हम देख रहे हैं कि त्योहारों और शादियों में बहुत खर्च किया जाता है, लेकिन बच्चों की तालीम और उनकी परवरिश पर उतना ध्यान नहीं दिया जाता।

समाज की हालत तभी सुधरेगी जब हम अपनी सोच बदलेंगे। हमें अपने बच्चों को पढ़ाना होगा, उन्हें सही रास्ता दिखाना होगा और नशे व बुरी आदतों से दूर रखना होगा। सादगी अपनानी होगी और दिखावे से बचना होगा।

अबू सालेह की मौत हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि अगर हम आज नहीं संभले, तो कल ऐसे हादसे फिर हो सकते हैं। हमें अपने गांव को बेहतर बनाने के लिए मिलकर कोशिश करनी होगी।

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