(रईस खान)
इंडियन मुस्लिम पब्लिक अफेयर्स कमिटी मुस्लिम समुदाय और अल्पसंख्यकों के मुद्दों पर आवाज उठाने वाला एक संगठन है। इसका मुख्य मकसद अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करना, सामाजिक न्याय सुनिश्चित करना, लोकतांत्रिक भागीदारी बढ़ाना और समुदाय को मजबूत बनाना है। यह संगठन बौद्धिक चर्चाओं, सम्मेलनों और सामुदायिक नेताओं के जरिए मुसलमानों की समस्याओं जैसे नागरिकता, विस्थापन, शिक्षा, युवा-महिला सशक्तिकरण और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा पर काम करता है।
IMPAC अल्पसंख्यकों की व्यवस्थागत उपेक्षा के खिलाफ आवाज उठाता है, खासकर असम जैसे इलाकों में। यह समुदाय को एकजुट होकर संवैधानिक लड़ाई लड़ने के लिए प्रेरित करता है। संगठन का जोर मजबूत संस्थाओं के निर्माण, युवाओं और महिलाओं को आगे लाने तथा राष्ट्रीय स्तर पर मुसलमानों की सामूहिक आवाज को मजबूत करने पर है।
IMPAC कई मुस्लिम बुद्धिजीवियों, उलेमा, वकीलों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और राजनीतिक नेताओं से जुड़ा हुआ है। ताज़ा जानकारी के अनुसार प्रमुख नाम हैं, हजरत मौलाना ओबैदुल्लाह खान आजमी (ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के उपाध्यक्ष) – सम्मेलन के संरक्षक (पेट्रन)। मुख्तार हुसैन – सम्मेलन के अध्यक्ष। मोहम्मद शफी (SDPI के नेशनल वाइस प्रेसिडेंट) – सक्रिय भागीदारी।
अन्य प्रमुख वक्ता और सहयोगी: शाहनवाज कादरी, शफी साहब, मौलाना कमरुज्जमां, मुश्ताक मलिक, डॉ. आसमा जहरा, एडवोकेट जुनैद खालिद, परवेज आलम, सालिम खान, नजीमुद्दीन फारूकी हैं।
यह संगठन सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) से काफी जुड़ा नजर आता है। मुंबई में अगस्त 2025 में इसका 5वां इंटेलेक्चुअल कॉन्फ्रेंस हुआ, जिसमें अल्पसंख्यक मुद्दों पर गहन चर्चा हुई।
IMPAC मुख्य रूप से बौद्धिक सम्मेलनों और विचार-विमर्श के जरिए काम करता है। यह समुदाय को सिर्फ शिकायत करने के बजाय रणनीतिक कार्रवाई और एकता की तरफ ले जाने की कोशिश करता है। लेकिन यह AIMPLB जैसे बड़े संगठनों और SDPI जैसे राजनीतिक प्लेटफॉर्म से जुड़कर अल्पसंख्यक अधिकारों की वकालत करता है।
IMPAC भारतीय मुसलमानों के लिए एक पब्लिक अफेयर्स प्लेटफॉर्म के रूप में उभर रहा है। इसका फोकस अधिकारों, न्याय और लोकतंत्र की रक्षा पर है। समुदाय के कई विचारक और नेता इससे जुड़े हैं, जो इसे एक सक्रिय advocacy group बनाते हैं। भविष्य में इसके और ज्यादा कार्यक्रम और स्पष्ट संरचना देखने को मिल सकती है।

