याद-ए-कर्बला, भाईचारा और समाज सेवा का अनोखा संगम
(क़ौफ़ ब्यूरो)
मुहर्रम का महीना इस्लामी इतिहास में विशेष महत्व रखता है। यह हमें हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) और कर्बला के शहीदों की कुर्बानी, सब्र, इंसाफ और मानवता के लिए दिए गए संदेश की याद दिलाता है। बांगरमऊ क्षेत्र के गंज मुरादाबाद के पास गांव आज़म खेड़ा में मुहर्रम की आठवीं का कार्यक्रम वर्षों से श्रद्धा, सादगी और आपसी भाईचारे के साथ आयोजित किया जाता है।
इस साल भी यह कार्यक्रम संपन्न हुआ। यहां इस मौके पर एक ही स्थान पर ताज़िया रखा जाता है। यहाँ किसी प्रकार का जुलूस या गश्त नहीं निकाला जाता, बल्कि लोग एकत्र होकर ताज़ियत पेश करते हैं और कर्बला के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।
कार्यक्रम की शुरुआत शाम को लंगर के साथ होती है। लंगर में सभी लोगों के लिए दालचा और दो नान रोटियों का प्रबंध किया जाता है। बाहर से आने वाले मेहमानों और श्रद्धालुओं के लिए कुर्सी-मेज़ पर बैठकर लंगर ग्रहण करने की व्यवस्था रहती है। आयोजन समिति का प्रयास रहता है कि हर आने वाले व्यक्ति का सम्मानपूर्वक स्वागत और सत्कार किया जाए।
रात के समय विभिन्न गांवों से आने वाली नोहा-ख्वानी की अंजुमनें अपनी बारी से कलाम पेश करती हैं। यह सिलसिला देर रात तक चलता है और पूरा वातावरण कर्बला की याद और इमाम हुसैन (अ.स.) की कुर्बानियों के जिक्र से गूंजता रहता है। आसपास के कपूरपुर, टेढ़वा, ताजपुर मुर्तजापुर, हसनापुर, मदारपुर, बरौकी, मुरादाबाद तथा अन्य गांवों के लोग बड़ी संख्या में इसमें शिरकत करते हैं।
भोर में फातिहाख्वानी के साथ कार्यक्रम का समापन होता है। इस दौरान देश, समाज और इंसानियत की भलाई के लिए दुआएं की जाती हैं तथा कर्बला के शहीदों को खिराज-ए-अकीदत पेश किया जाता है।
आयोजन समिति का उद्देश्य केवल धार्मिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाले वर्षों में इस अवसर को ज्ञान, जागरूकता और समाज सेवा से भी जोड़ने की योजना है। इसके तहत मुहर्रम और कर्बला से जुड़ी ऐतिहासिक एवं शैक्षणिक जानकारी डिस्प्ले बोर्ड, डिजिटल सिस्टम और साहित्य के माध्यम से लोगों तक पहुंचाई जाएगी। साथ ही मेडिकल कैंप और शैक्षणिक सहायता शिविरों का आयोजन कर जरूरतमंद लोगों की मदद करने का भी प्रयास किया जाएगा।
इस प्रकार मुहर्रम की आठवीं का यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भाईचारे, सामाजिक सहयोग, शिक्षा, जागरूकता और मानव सेवा का एक प्रेरणादायक उदाहरण बनता जा रहा है। यह आयोजन नई पीढ़ी को कर्बला के संदेश से जोड़ने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

