(रईस खान)
कुरआन की सूरह शूरा की आयत नंबर 48 में अल्लाह तआला अपने पैगंबर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से फरमाते हैं कि अगर लोग मुँह फेर लें तो ऐ नबी हमने तुम्हें उनके ऊपर निगरान बनाकर नहीं भेजा है। तुम्हारा काम तो सिर्फ संदेश पहुँचा देना है।
इस आयत का सरल मतलब यह है कि अच्छे काम करने वाले, नसीहत करने वाले या दावत देने वाले का फर्ज सिर्फ कोशिश करना और बात लोगों तक पहुँचा देना है। लोगों के दिल बदलने या उन्हें जबरदस्ती सही रास्ते पर लाने की ज़िम्मेदारी उसकी नहीं है। अगर उसकी नीयत साफ हो और अमल ठीक हो तो अल्लाह ही उसके काम को सफल बनाता है और उसे कामयाबी देता है। इंसान को बदले की उम्मीद में नहीं बल्कि अल्लाह की खुशी के लिए काम करना चाहिए।
पैगंबरों की ज़िंदगी इस बात की सबसे बड़ी मिसाल है। हज़रत नूह अलैहिस्सलाम ने सैकड़ों साल तक अपनी कौम को अल्लाह की तरफ बुलाया। दिन रात मेहनत की लेकिन ज़्यादातर लोग नहीं माने। फिर भी उन्होंने अपना फर्ज निभाया। अल्लाह ने उनके ईमान वाले लोगों को बचाया। इसी तरह हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने मक्का में तेरह साल तक इस्लाम की दावत दी। लोगों ने उन्हें बहुत तंग किया लेकिन उन्होंने सिर्फ संदेश पहुँचाने का काम किया। नतीजा यह हुआ कि बाद में इस्लाम पूरे दुनिया में फैल गया। हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम ने भी लोगों को भलाई का पैगाम दिया। कुछ माने कुछ नहीं माने। वे भी सिर्फ अल्लाह का संदेश ले जाने वाले थे। इन सब मिसालों से पता चलता है कि नाकामी इंसान की ज़िम्मेदारी नहीं बल्कि अल्लाह की मर्जी है।
दुनियावी ज़िंदगी में भी यही बात लागू होती है। एक अच्छा टीचर पूरी मेहनत से पढ़ाता है। कुछ बच्चे पास हो जाते हैं कुछ फेल। टीचर का काम पढ़ाना था। असली सफलता बच्चों की मेहनत और अल्लाह की मदद पर निर्भर है। कई सामाजिक कार्यकर्ता सालों तक गरीबों की मदद करते हैं या शिक्षा फैलाते हैं। शुरू में लोग नहीं सुनते लेकिन सच्ची नीयत और लगातार कोशिश से धीरे धीरे काम आगे बढ़ता है। महात्मा गांधी या मदर टेरेसा जैसी शख्सियतों ने भी बिना बदले की उम्मीद के काम किया और अल्लाह ने उनके काम को सफल बनाया।
इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि नसीहत जारी रखनी चाहिए लेकिन लोगों के दिलों को बदलने का बोझ अपने ऊपर नहीं लेना चाहिए। बदले की उम्मीद न रखें। नीयत और अमल ठीक रखें। अल्लाह वही काम सफल बनाता है जो उसके लिए किया जाए। धैर्य रखें क्योंकि इंसान कृतघ्न होता है लेकिन अल्लाह सब देख रहा है।
यह आयत अच्छे काम करने वालों के लिए बड़ी तसल्ली देती है। चाहे आप माता पिता हों टीचर हों या कोई भी सलाह देने वाले हों बस सच्चाई से बोलते रहें। कामयाबी अल्लाह के हाथ में है। वह बेहतर जानता है।

