बारिश से नहीं, पुरानी समस्याओं से जाम हुई मायानगरी
मुंबई को देश की आर्थिक राजधानी कहा जाता है। यहां की लोकल ट्रेनें, बसें, मेट्रो और सड़क नेटवर्क हर दिन करोड़ों लोगों को उनकी मंजिल तक पहुंचाते हैं। लेकिन जैसे ही मानसून की पहली बड़ी बारिश हुई, शहर की रफ्तार थम गई। सड़कें पानी में डूब गईं, ट्रैफिक रेंगने लगा, लोकल ट्रेन सेवाएं प्रभावित हुईं और हजारों लोग घंटों तक फंसे रहे। कई इलाकों में 24 घंटे के भीतर 200 मिमी से अधिक बारिश दर्ज की गई, जिससे जलभराव और यातायात संकट पैदा हो गया।
प्रश्न यह है कि आखिर हर साल यही स्थिति क्यों बनती है? करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद मुंबई का ट्रांसपोर्ट सिस्टम पहली ही तेज बारिश में क्यों लड़खड़ा जाता है?
1. शहर की क्षमता से ज्यादा बारिश
मुंबई समुद्र के किनारे बसा शहर है। यहां कई बार कुछ घंटों में ही पूरे महीने जितनी बारिश हो जाती है। इस बार भी रातभर हुई मूसलाधार बारिश से अंधेरी, दादर, बांद्रा, माटुंगा और कई निचले इलाकों में पानी भर गया।
जब बारिश की मात्रा ड्रेनेज सिस्टम की क्षमता से ज्यादा हो जाती है, तो पानी सड़कों और रेलवे ट्रैक पर जमा होने लगता है। नतीजा यह होता है कि वाहन धीमे पड़ जाते हैं और यातायात प्रभावित होता है।
2. जलनिकासी व्यवस्था की पुरानी बीमारी
मुंबई में हर साल मानसून से पहले नालों की सफाई के दावे किए जाते हैं। लेकिन कई इलाकों में नालों की क्षमता बढ़ती आबादी और बढ़ते कंक्रीट निर्माण के मुकाबले काफी कम है।
विशेषज्ञों का कहना है कि शहर का बड़ा हिस्सा अब कंक्रीट से ढक चुका है। पहले बारिश का पानी जमीन में समा जाता था, अब सीधे सड़कों पर बहता है। नालियां कुछ ही घंटों में भर जाती हैं और जलभराव शुरू हो जाता है।
3. रेलवे ट्रैक पर पानी और मिट्टी कटाव
मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेनें भी बारिश के सामने बेबस दिखीं। नवी मुंबई क्षेत्र में तेज जलप्रवाह के कारण रेलवे ट्रैक के नीचे की मिट्टी बह गई, जिससे ट्रांस-हार्बर लाइन पर सेवाएं प्रभावित हुईं।
रेलवे ट्रैक पर पानी भरने से सुरक्षा कारणों से ट्रेनों की गति कम करनी पड़ती है। कुछ मामलों में सेवाएं अस्थायी रूप से रोकनी भी पड़ती हैं। यही कारण है कि थोड़ी सी बाधा पूरे नेटवर्क को प्रभावित कर देती है।
4. निचले इलाकों की पुरानी समस्या
हिंदमाता, कुर्ला, सायन, दादर, माटुंगा और अंधेरी जैसे कई इलाके वर्षों से जलभराव के लिए बदनाम हैं। समस्या यह है कि ये क्षेत्र समुद्र तल के करीब या उससे नीचे स्थित हैं। हाई टाइड (समुद्र में ज्वार) के समय बारिश का पानी समुद्र में तेजी से नहीं निकल पाता, जिससे सड़कों पर पानी जमा हो जाता है।
यानी केवल बारिश ही नहीं, बल्कि समुद्री ज्वार भी मुंबई के ट्रांसपोर्ट संकट को बढ़ाता है।
5. बढ़ता शहरीकरण और सिकुड़ती प्राकृतिक जलधाराएं
मुंबई के कई प्राकृतिक नाले, मैंग्रोव क्षेत्र और जल निकासी मार्ग पिछले दशकों में निर्माण कार्यों की भेंट चढ़ गए। जिन रास्तों से पानी समुद्र तक पहुंचता था, वहां अब इमारतें, सड़कें और अन्य ढांचे खड़े हैं।
नतीजा यह है कि बारिश का पानी शहर में ही फंस जाता है और सड़कों को नदी बना देता है।
6. ट्रांसपोर्ट नेटवर्क पर अत्यधिक दबाव
मुंबई में रोजाना लाखों लोग लोकल ट्रेन और सड़क परिवहन पर निर्भर रहते हैं। सामान्य दिनों में भी नेटवर्क अपनी क्षमता के करीब काम करता है। ऐसे में बारिश के कारण यदि कुछ ट्रेनें देर से चलें या कोई सड़क बंद हो जाए, तो पूरा सिस्टम प्रभावित हो जाता है।
एक छोटी रुकावट कुछ ही घंटों में बड़े ट्रैफिक जाम और भीड़ का रूप ले लेती है।
7. जलवायु परिवर्तन भी बढ़ा रहा खतरा
मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण अब बारिश का पैटर्न बदल रहा है। पहले कई दिनों में होने वाली बारिश अब कुछ घंटों में हो जाती है। अत्यधिक तीव्र वर्षा की घटनाएं बढ़ रही हैं, जिससे पुराने ड्रेनेज और ट्रांसपोर्ट सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।
क्या समाधान है?
मुंबई को हर साल मानसून से जूझने के बजाय दीर्घकालिक समाधान की जरूरत है..
ड्रेनेज सिस्टम की क्षमता बढ़ाना।
निचले इलाकों में बड़े पंपिंग स्टेशन स्थापित करना।
रेलवे और नगर निगम के बीच बेहतर समन्वय।
मैंग्रोव और प्राकृतिक जलमार्गों का संरक्षण।
जलभराव वाले इलाकों की विशेष मॉनिटरिंग।
स्मार्ट ट्रैफिक और रियल-टाइम अलर्ट सिस्टम का विस्तार।
रेलवे ने कई संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पंप, माइक्रो-टनलिंग और ड्रेनेज सुधार जैसे कदम उठाने शुरू किए हैं, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि समस्या का स्थायी समाधान अभी दूर है।
मुंबई का ट्रांसपोर्ट सिस्टम बारिश से नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही बुनियादी ढांचा संबंधी कमजोरियों से जूझ रहा है। पहली तेज बारिश ने एक बार फिर दिखा दिया कि देश की आर्थिक राजधानी को केवल मानसून अलर्ट नहीं, बल्कि मजबूत शहरी योजना और आधुनिक जलनिकासी व्यवस्था की जरूरत है। जब तक शहर की सड़कों, नालों और परिवहन नेटवर्क को भविष्य की बारिश के अनुरूप नहीं बनाया जाएगा, तब तक हर मानसून मुंबई की रफ्तार को इसी तरह रोकता रहेगा।
क़ौमी फ़रमान डिजिटल मीडिया नेटवर्क

