विशेष रिपोर्ट –मुंबई में बार-बार होने वाली दुर्घटनाएँ, आखिर कब रुकेगा मौतों का सिलसिला?

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(रईस खान)

मुंबई देश की आर्थिक राजधानी और दुनिया के बड़े महानगरों में गिनी जाती है। लेकिन हर साल बारिश के मौसम में यहां इमारत गिरने, पानी भरने, पेड़ गिरने और आग लगने जैसी घटनाओं में लोगों की जान चली जाती है। हाल ही में मानखुर्द इलाके में तीन मंजिला इमारत गिरने से कई लोगों की मौत हो गई। यह कोई पहली घटना नहीं है। पिछले कई वर्षों से ऐसी दुर्घटनाएँ लगातार होती रही हैं।

इन घटनाओं के पीछे कई कारण हैं। सबसे बड़ा कारण अवैध निर्माण और नियमों की अनदेखी है। कई जगह बिना पूरी अनुमति, बिना मजबूत निर्माण और सुरक्षा मानकों का पालन किए इमारतें खड़ी कर दी जाती हैं। समय रहते इन पर कार्रवाई नहीं होती। आरोप यह भी लगते रहे हैं कि कुछ स्थानों पर भ्रष्टाचार के कारण ऐसे निर्माणों को नजरअंदाज किया जाता है। यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही या भ्रष्टाचार होता है, तो उसका सबसे बड़ा नुकसान आम लोगों को उठाना पड़ता है।

मुंबई और आसपास के इलाकों में अवैध निर्माणों के अलावा आग लगने की घटनाएँ भी चिंता का विषय हैं। कई इमारतों में अग्नि सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं होते। आग लगने पर बचाव कार्य में कठिनाई होती है और कई निर्दोष लोगों की जान चली जाती है। इसलिए भवन निर्माण से लेकर अग्नि सुरक्षा तक हर नियम का सख्ती से पालन होना जरूरी है।

बारिश के दौरान पेड़ों के गिरने की घटनाएँ भी हर साल सामने आती हैं। समय पर पेड़ों की जांच, कमजोर शाखाओं की छंटाई और वैज्ञानिक सर्वे न होने से लोगों की जान खतरे में पड़ जाती है। सड़कें घंटों बंद रहती हैं और यातायात प्रभावित होता है।

मुंबई में थोड़ी सी तेज बारिश के बाद भी कई इलाकों में जलभराव हो जाता है। नालों की समय पर सफाई, जल निकासी व्यवस्था का आधुनिकीकरण और शहर की बढ़ती आबादी के अनुसार नई ड्रेनेज प्रणाली विकसित करने की आवश्यकता है। यदि यह काम वैज्ञानिक योजना के साथ किया जाए तो बाढ़ जैसी स्थिति को काफी हद तक रोका जा सकता है।

मशविरा

– सभी पुराने और जर्जर भवनों का नियमित तकनीकी सर्वे कराया जाए।
– अवैध निर्माणों पर बिना किसी भेदभाव के तुरंत कार्रवाई हो।
– भवन निर्माण में शामिल अधिकारियों और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जाए।
– अग्नि सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए और नियमित निरीक्षण हो।
– बारिश से पहले नालों, सड़कों और जल निकासी व्यवस्था की पूरी तैयारी की जाए।
– कमजोर और खतरनाक पेड़ों का वैज्ञानिक परीक्षण कर समय पर उनकी छंटाई या हटाने का कार्य किया जाए।
– आधुनिक तकनीक, इंजीनियरों और आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों की टीमों को मजबूत किया जाए।
– नागरिकों की शिकायतों पर त्वरित और पारदर्शी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

मुंबई जैसे अंतरराष्ट्रीय महानगर को केवल विकास की नहीं, बल्कि सुरक्षित और जिम्मेदार प्रशासन की भी जरूरत है। यदि पारदर्शिता, जवाबदेही, तकनीकी योजना और कानून का समान रूप से पालन किया जाए, तो इमारत गिरने, जलभराव, आग और पेड़ गिरने जैसी कई दुर्घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है। लोगों की सुरक्षा किसी भी शहर की सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। जब सरकार, प्रशासन, विशेषज्ञ और नागरिक मिलकर ईमानदारी से काम करेंगे, तभी मुंबई वास्तव में एक सुरक्षित और विश्वस्तरीय महानगर बन सकेगी।

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