दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि सरकार का शिक्षा विभाग अल्पसंख्यक सहायता प्राप्त स्कूलों में शिक्षकों और कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं कर सकता।
अदालत ने स्पष्ट किया कि शिक्षा विभाग केवल यह तय कर सकता है कि नौकरी के लिए उम्मीदवार के पास जरूरी शैक्षणिक योग्यता और पात्रता है या नहीं। लेकिन किस उम्मीदवार को नियुक्त करना है, यह फैसला संबंधित स्कूल का प्रबंधन करेगा।
हाईकोर्ट ने कहा कि भारत के संविधान में अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को अपने संस्थान का प्रबंधन करने का विशेष अधिकार दिया गया है। इसलिए सरकार उनकी नियुक्तियों में सीधे दखल नहीं दे सकती, जब तक कि कानून का उल्लंघन न हो।
इस फैसले का आम लोगों पर क्या असर होगा?
– अल्पसंख्यक सहायता प्राप्त स्कूल अपने शिक्षकों और कर्मचारियों का चयन अधिक स्वतंत्रता से कर सकेंगे।
– शिक्षा विभाग उम्मीदवारों की योग्यता और नियमों के पालन की जांच कर सकता है, लेकिन नियुक्ति का अंतिम फैसला स्कूल प्रबंधन का होगा।
– इससे संविधान द्वारा अल्पसंख्यक संस्थानों को दिए गए अधिकारों को और मजबूती मिली है।
कुल मिलाकर, हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि सरकार की भूमिका केवल योग्य उम्मीदवारों के लिए मानक तय करने और नियमों का पालन सुनिश्चित करने तक सीमित है। नियुक्ति किसे मिलेगी, इसका अधिकार अल्पसंख्यक सहायता प्राप्त स्कूलों के प्रबंधन के पास ही रहेगा।
-क़ौमी फ़रमान डिजिटल मीडिया नेटवर्क

