‘गुफ़्तगू’ की ओर से हिंदी दिवस पर संगोष्ठी और पत्रिका के नए अंक का विमोचन
(सलाम शेख़)
हिंदी अब सिर्फ़ एक भाषा नहीं, बल्कि देश के अलग-अलग हिस्सों को आपस में जोड़ने वाली एक मज़बूत ज़बान बन चुकी है। भारत के अलावा दुनिया के कई देशों में भी हिंदी बोली और समझी जाती है। हिंदी दिवस के अवसर पर अलोपीबाग में साहित्यिक संस्था ‘गुफ़्तगू’ की ओर से आयोजित संगोष्ठी में वक्ताओं ने हिंदी के विकास, उसके बदलते स्वरूप और भारतीय समाज में उसकी भूमिका पर विचार रखे।
‘गुफ़्तगू’ के अध्यक्ष डॉ. इम्तियाज़ अहमद गाज़ी ने कहा कि हिंदी आज हर भारतीय की शान बन चुकी है। उन्होंने कहा कि हिंदी भाषा के विकास में दूसरी भाषाओं का भी बड़ा योगदान रहा है। उनके अनुसार ‘हिंदी’ शब्द मूल रूप से फ़ारसी से आया है और अरबी-फ़ारसी से आए अनेक शब्द समय के साथ हिंदी के शब्द-भंडार का हिस्सा बन गए हैं। हिंदू, हिंदुस्तान, हिंदुस्तानी, हिंदवी और हिंदीदां जैसे शब्दों का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भाषाएं एक-दूसरे से जुड़कर ही समृद्ध होती हैं।
डॉ. गाज़ी ने कहा कि हिंदी भारतीय संस्कृति और रोज़मर्रा की ज़िंदगी में इस तरह घुल-मिल गई है कि आज पढ़ने-लिखने और आपसी संवाद के काम में इसका महत्व साफ़ दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि हिंदी की यही व्यापकता उसे देश के आम लोगों से जोड़ती है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. वीरेंद्र कुमार तिवारी ने कहा कि हिंदी का दायरा भारत तक सीमित नहीं है। दुनिया के कई देशों में हिंदी को समझने और बोलने वालों की संख्या बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि हिंदी की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसका प्रभाव दिखाई देता है।
सुनील दानिश ने हिंदी को संपर्क की एक प्रभावी भाषा बताते हुए कहा कि देश के अधिकतर हिस्सों में हिंदी के माध्यम से आसानी से संवाद किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग भाषाई क्षेत्रों के लोगों के बीच आपसी बातचीत में हिंदी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
इस अवसर पर ‘गुफ़्तगू’ पत्रिका के नए अंक का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम का संचालन राकेश मालवीय ‘मुस्कान’ ने किया।
कार्यक्रम के दूसरे दौर में काव्य पाठ का आयोजन हुआ, जिसमें संजय सक्सेना, रचना सक्सेना, शिवाजी यादव, मुकुल मतवाला, कमला प्रसाद गिरी और डॉ. वीरेंद्र कुमार तिवारी सहित अन्य कवियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। काव्य पाठ के दौरान श्रोताओं ने कविताओं को सराहा और हिंदी साहित्य की विविधता पर चर्चा भी हुई।
‘गुफ़्तगू’ लंबे समय से प्रयागराज में साहित्यिक गतिविधियों से जुड़ी संस्था के रूप में सक्रिय है और हिंदी साहित्य के साथ विभिन्न भाषाई और साहित्यिक सरोकारों को मंच देने का काम करती रही है।

