वाइस-प्रिंसिपल को 23 घंटे घेराव, इस्तीफा और ‘शुद्धिकरण’ का दावा
कोलकाता के सुरेंद्रनाथ लॉ कॉलेज में सेमेस्टर परीक्षा के लिए अनिवार्य हाज़िरी के नियम को लेकर विवाद चरम पर पहुंच गया। बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमों के अनुसार परीक्षा में बैठने के लिए न्यूनतम 65 से 75 प्रतिशत हाज़िरी अनिवार्य है। जब कॉलेज प्रशासन ने इस नियम का पालन किया तो सैकड़ों छात्र परीक्षा फॉर्म भरने से वंचित हो गए।
इसके बाद छात्रों के एक गुट ने वाइस-प्रिंसिपल मोहम्मदी तरन्नुम को उनके दफ्तर में करीब 23 घंटे तक घेराव में रखा। तरन्नुम ने आरोप लगाया कि रात भर बिजली और पंखे बंद कर दिए गए, भोजन-पानी नहीं दिया गया और मानसिक दबाव डालकर उन्हें इस्तीफे पर दस्तखत करने के लिए मजबूर किया गया। पुलिस सुरक्षा में परिसर छोड़ने के बाद उन्होंने स्पष्ट किया कि दबाव में दिया गया इस्तीफा अमान्य है और वे अपने पद पर बनी रहेंगी।
घटना के बाद एबीवीपी से जुड़े कुछ छात्रों ने उनके चैंबर में गंगाजल छिड़ककर ‘शुद्धिकरण’ का दावा किया। तरन्नुम ने इसे अपने पद और गरिमा का अपमान बताया। उन्होंने कहा कि वे नियमों का पालन कर रही थीं और कोई राजनीतिक पक्षपात नहीं कर रही थीं।
बाद में कलकत्ता विश्वविद्यालय ने परीक्षा फॉर्म जमा करने की समयसीमा बढ़ा दी और कॉलेज ने अतिरिक्त कक्षाओं का प्रबंध किया। तरन्नुम परिसर लौट आईं और उन्होंने छात्रों से मुलाकात भी की।
यह घटना शिक्षण संस्थानों में अनुशासन, नियमों के पालन और छात्र राजनीति के बीच के तनाव को रेखांकित करती है। प्रशासन से निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जा रही है।
-क़ौमी फ़रमान डिजिटल मीडिया नेटवर्क

