शालीमार कॉर्प लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर को यौम-ए-पैदाइश पर दिली मुबारकबाद
(रईस खान)
किसी भी कामयाब कारोबारी की पहचान सिर्फ उसकी कंपनी के कारोबार या उसके बनाए हुए प्रोजेक्ट्स से नहीं होती। असली पहचान उसकी सोच, काम करने के अंदाज़, लोगों के भरोसे और आने वाले कल को देखने की उसकी नजर से होती है।
खालिद मसूद ऐसे ही रियल एस्टेट लीडर्स में शामिल हैं, जिन्होंने तामीर और कारोबार को सिर्फ मुनाफे का जरिया नहीं, बल्कि बेहतर शहर और बेहतर जिंदगी बनाने के एक बड़े मिशन के रूप में देखा है।
आज उनके यौम-ए-पैदाइश के मौके पर उन्हें दिल की गहराइयों से मुबारकबाद और नेक ख्वाहिशात।
इंजीनियरिंग से रियल एस्टेट लीडरशिप तक
खालिद मसूद ने सिविल इंजीनियरिंग की तालीम हासिल की और इसके बाद एमबीए किया। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान ही उन्हें इमारतों, निर्माण और रियल एस्टेट के काम में दिलचस्पी पैदा हुई।
तालीम पूरी करने के बाद उन्होंने परिवार के कारोबार में कदम रखा और धीरे-धीरे कंपनी की जिम्मेदारियों को संभालते हुए अपनी एक अलग पहचान बनाई।
शालीमार ग्रुप की अगली पीढ़ी के नेतृत्वकर्ता के तौर पर उन्होंने कारोबार को नई सोच, आधुनिक प्रोजेक्ट्स और बदलती हुई ग्राहक जरूरतों के साथ आगे बढ़ाने पर जोर दिया।
उनके पिता मसूद अहमद कंपनी के चेयरमैन हैं। परिवार की कारोबारी विरासत को आगे बढ़ाते हुए खालिद मसूद ने शालीमार को बदलते हुए रियल एस्टेट बाजार के मुताबिक विस्तार देने में अहम भूमिका निभाई है।
शालीमार कॉर्प में अहम जिम्मेदारी
आज खालिद मसूद शालीमार कॉर्प लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर हैं।
उनकी जिम्मेदारियों में प्रोजेक्ट्स का एग्जीक्यूशन, सेल्स और मार्केटिंग, प्रशासनिक फैसले, कारोबारी रणनीति और कंपनी का विस्तार शामिल है।
कंपनी की पहचान सिर्फ मकान बनाने वाली कंपनी के तौर पर नहीं, बल्कि प्लान्ड टाउनशिप, प्रीमियम रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स, कमर्शियल स्पेस और हॉस्पिटैलिटी जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने वाले रियल एस्टेट समूह के रूप में बनी है।
कंपनी के मुताबिक, शालीमार कॉर्प ने अब तक 60 से ज्यादा प्रोजेक्ट्स पूरे किए हैं और 2.1 करोड़ वर्ग फुट से अधिक रियल एस्टेट विकसित किया है।
बदलते उत्तर प्रदेश को देखने वाली नजर
खालिद मसूद की कारोबारी सोच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा उत्तर प्रदेश के तेजी से बदलते शहर हैं।
लखनऊ के साथ-साथ वाराणसी, प्रयागराज और कानपुर जैसे शहरों में रियल एस्टेट की संभावनाओं को वे महत्वपूर्ण मानते हैं।
एक्सप्रेसवे, बेहतर सड़कें, एयरपोर्ट और दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स ने उत्तर प्रदेश के कई शहरों को नई आर्थिक गतिविधियों से जोड़ा है। ऐसे माहौल में लोगों की जरूरत भी बदल रही है।
अब ग्राहक सिर्फ एक फ्लैट या मकान नहीं चाहता। वह बेहतर लोकेशन, सुरक्षा, हरियाली, सुविधाएं, कम्युनिटी लाइफ और अच्छी जीवनशैली भी चाहता है।
इसी बदलाव को समझते हुए शालीमार कॉर्प ने टाउनशिप और इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट की दिशा में अपना फोकस बढ़ाया है।
घर से आगे, बेहतर जिंदगी की सोच
खालिद मसूद की सोच में एक अहम बात यह है कि रियल एस्टेट का मतलब सिर्फ ईंट, सीमेंट और दीवारें नहीं होना चाहिए।
एक अच्छी टाउनशिप में हरियाली हो, बेहतर सड़कें हों, पानी का सही प्रबंधन हो, सुरक्षा हो और परिवारों के लिए जरूरी सुविधाएं हों, यह सोच आधुनिक रियल एस्टेट की बदलती तस्वीर को दिखाती है।
वे सस्टेनेबिलिटी, रेनवॉटर हार्वेस्टिंग और वेस्ट मैनेजमेंट जैसे विषयों को भी महत्व देते हैं।
उनकी सोच का एक पहलू कर्मचारियों और उनके परिवारों की भलाई से भी जुड़ा है। यानी कारोबार के साथ इंसानी रिश्तों और सामाजिक जिम्मेदारी को भी महत्व देना।
होटल और नए सेक्टरों की ओर कदम
रियल एस्टेट के साथ शालीमार कॉर्प ने हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में भी कदम बढ़ाया है।
लखनऊ में सरवर पोर्टिको के साथ 4-स्टार होटल और अयोध्या में ट्राइडेंट के साथ 5-स्टार होटल की योजनाएं कंपनी के कारोबार को रियल एस्टेट से आगे ले जाने की दिशा दिखाती हैं।
आने वाले वर्षों में कंपनी की योजनाओं में इंटीग्रेटेड टाउनशिप के साथ रेजिडेंशियल, ऑफिस, रिटेल, एंटरटेनमेंट, हॉस्पिटैलिटी और सीनियर लिविंग जैसे क्षेत्रों में विस्तार शामिल है।
कामयाबी के साथ जिम्मेदारी
खालिद मसूद की कारोबारी यात्रा की खास बात यह है कि वे रियल एस्टेट को सिर्फ प्रॉपर्टी बेचने का कारोबार नहीं मानते।
उनकी सोच में क्वालिटी, समय पर प्रोजेक्ट पूरा करना, ग्राहक का भरोसा और पारदर्शिता अहम हैं।
आरईआरए जैसे कानूनों ने रियल एस्टेट सेक्टर में ग्राहकों के अधिकारों और प्रोजेक्ट की पारदर्शिता को लेकर एक नया ढांचा तैयार किया है। ऐसे दौर में डेवलपर और ग्राहक के बीच भरोसा किसी भी कंपनी की सबसे बड़ी पूंजी बन जाता है।
एक कारोबारी से बढ़कर एक विजनरी सोच
खालिद मसूद की पहचान एक सफल कारोबारी के रूप में जरूर है, लेकिन उनकी सोच का दायरा उससे आगे दिखाई देता है।
वे ऐसे शहरों की कल्पना करते हैं जहां आधुनिक सुविधाओं के साथ बेहतर पर्यावरण, अच्छी कनेक्टिविटी और परिवारों के लिए बेहतर जीवन का माहौल हो।
लखनऊ और उत्तर प्रदेश के रियल एस्टेट भविष्य पर वे बिजनेस मीडिया में भी अपनी राय रखते रहे हैं। उनकी बातचीत में अक्सर एक बात दिखाई देती है, उत्तर प्रदेश अब सिर्फ संभावनाओं वाला बाजार नहीं, बल्कि तेजी से विकसित होता हुआ आर्थिक क्षेत्र है।
यौम-ए-पैदाइश पर खास मुबारकबाद
आज जब खालिद मसूद अपनी जिंदगी का एक और साल पूरा कर रहे हैं, तो यह सिर्फ जन्मदिन मनाने का दिन नहीं, बल्कि उनकी अब तक की कारोबारी यात्रा को याद करने का भी मौका है।
खालिद भाई,
आपको यौम-ए-पैदाइश की दिली मुबारकबाद।
अल्लाह तआला आपको सेहत, खुशहाली, इज्जत और कामयाबी अता फरमाए। आपके कारोबार में बरकत दे, आपके हर नेक इरादे को कामयाबी दे और आपको हमेशा अपने परिवार, दोस्तों, सहयोगियों और समाज के लिए इसी तरह काम करने की ताकत देता रहे।
आपकी जिंदगी का आने वाला हर साल पिछले साल से ज्यादा खुशियों, कामयाबियों और नई उपलब्धियों से भरा हो।
दुआ है कि आपकी सोच की रोशनी से कारोबार भी तरक्की करे और समाज को भी फायदा पहुंचे।
जन्मदिन मुबारक हो खालिद मसूद साहब।
बहुत-बहुत मुबारकबाद और ढेरों नेक ख्वाहिशात।
–क़ौमी फ़रमान डिजिटल मीडिया नेटवर्क

