उर्दू सहाफ़ती हल्के में रंज-ओ-ग़म
(जावेद जमालुद्दीन)
मुंबई: उर्दू सहाफ़ती हल्के में उस वक़्त रंज और ग़म की लहर दौड़ गई, जब रोज़नामा उर्दू टाइम्स के मालिक व मुदीर जनाब सईद अहमद की अहलिया और रोज़नामा उर्दू टाइम्स के मैनेजिंग एडिटर जनाब सुहैल अहमद की वालिदा, क़मरुन्निसा सईद अहमद, का लंबी बीमारी के बाद इंतक़ाल हो गया।
इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।
मरहूमा क़मरुन्निसा सईद अहमद एक नेक, मुख़लिस, खुशमिज़ाज, हमदर्द और नमाज़-रोज़े की पाबंद ख़ातून थीं। उर्दू सहाफ़त और ख़ास तौर पर उर्दू टाइम्स से उनका गहरा जुड़ाव था। उन्होंने कई वर्षों तक अख़बार की बेहतरी और उसके मेयार को बेहतर बनाने में अपनी हैसियत के मुताबिक़ अहम किरदार अदा किया।
उनकी तहरीरें, ख़ास तौर पर उनके एडिटोरियल और मज़ामीन, क़ारईन में काफी पसंद किए जाते थे। उनकी शख्सियत में सादगी, ख़ुलूस और अपनाइयत साफ़ नज़र आती थी।
वह सिर्फ़ एक सहाफ़ती इदारे से जुड़ी हुई शख्सियत नहीं थीं, बल्कि उर्दू टाइम्स के पूरे परिवार के लिए शफ़क़त, हौसले और मोहब्बत का एक भरोसेमंद सहारा थीं। उनके इंतक़ाल से सईद अहमद के खानदान के साथ-साथ उर्दू टाइम्स के सहाफ़ती साथियों, दोस्तों और तमाम मुतअल्लिक़ीन में गहरा सदमा है।
मरहूमा की वफ़ात ऐसे वक़्त में हुई है, जब उनके अहलेखाना के लिए उनकी जुदाई का ग़म बेहद गहरा है। उनके शौहर सईद अहमद, बेटे सुहैल अहमद और दूसरे अहलेखाना के लिए यह एक बड़ा सदमा है, जिसे अल्फ़ाज़ में बयान करना आसान नहीं।
–क़ौमी फ़रमान डिजिटल मीडिया नेटवर्क

