हस्तक्षेप — सिलिगुड़ी कोर्ट में ‘जय श्री राम’ के नारे से हंगामा

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(नवीन कुमार)

सिलिगुड़ी की एक अदालत में बुधवार, 30 सितंबर 2026 को उस समय हंगामा हो गया, जब एक आरोपी ने अदालत में मौजूद महिला मजिस्ट्रेट की ओर देखकर अचानक ‘जय श्री राम’ का नारा लगा दिया। घटना सिलीगुड़ी के सब-डिविजनल कोर्ट की ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट नंबर-4 की अदालत में हुई।

अदालत में 2018 के एक पुराने मामले की सुनवाई चल रही थी। इस मामले में 24 आरोपियों को हाजिरी के लिए बुलाया गया था। इसी दौरान आरोपियों के नाम पुकारे जा रहे थे। बताया गया कि महिला मजिस्ट्रेट मिशा मृणया हिजाब पहने अदालत में बैठी थीं। एक आरोपी ने उनकी तरफ देखकर अचानक ‘जय श्री राम’ कह दिया। इसके बाद कोर्ट रूम में कुछ देर के लिए माहौल तनावपूर्ण हो गया।

क्या था 2018 का मामला?

यह मामला एक अंतरधार्मिक शादी से जुड़े विवाद का है। वर्ष 2018 में कुछ लोगों ने शादी को लेकर ‘लव जिहाद’ का आरोप लगाते हुए बाघाजातिन पार्क से हिल कार्ट रोड स्थित सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट कार्यालय तक मार्च निकाला था। पुलिस ने इस मामले में 24 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया था।

मामले में कुछ आरोपियों को जमानत मिल चुकी थी, जबकि कुछ के खिलाफ वारंट जारी थे। इसी मामले में अदालत में आरोपियों की हाजिरी हो रही थी।

वकील ने मांगी माफी

घटना के बाद आरोपियों के वकील त्रिदीप साहा ने अदालत से बिना शर्त माफी मांगी। उनका कहना था कि ‘जय श्री राम’ या ‘राधे-राधे’ जैसे शब्द कई लोग अभिवादन के तौर पर भी बोलते हैं। उनके मुताबिक, नाम पुकारे जाने के दौरान आरोपी ने बिना सोचे यह शब्द कह दिया था और उसका मकसद मजिस्ट्रेट को संबोधित करना नहीं था।

वकील की माफी के बाद अदालत का माहौल कुछ शांत हुआ।

बार एसोसिएशन ने जताई नाराजगी

शिलिगुड़ी बार एसोसिएशन ने इस घटना की कड़ी निंदा की। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष उदय शंकर मालाकर ने कहा कि अदालत के अंदर इस तरह की हरकत स्वीकार नहीं की जा सकती। कोर्ट रूम में हर व्यक्ति को अदालत की गरिमा और अनुशासन का सम्मान करना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी स्थिति में अदालत चाहे तो खुद संज्ञान लेकर यानी सुओ मोटू कार्रवाई शुरू कर सकती थी।

अदालत की गरिमा सबसे ऊपर

इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि अदालत के अंदर धार्मिक या राजनीतिक नारेबाजी की कितनी गुंजाइश होनी चाहिए। अदालत किसी भी पक्ष, धर्म या विचारधारा से ऊपर होती है। इसलिए कोर्ट रूम में अनुशासन और मर्यादा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।

-क़ौमी फ़रमान डिजिटल मीडिया नेटवर्क

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