शरद पवार ने किया उद्घाटन, अंजुमन-ए-इस्लाम और मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन की पहल
–जावेद जमालुद्दीन
मुंबई में भारतीय क्रिकेट के मशहूर ऑलराउंडर सलीम दुर्रानी की याद को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए मुंबई में एक नई पहल शुरू की गई है। अंजुमन-ए-इस्लाम और मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन ने मिलकर ‘सलीम दुर्रानी इंटर कॉलेजिएट रोटेटिंग क्रिकेट ट्रॉफी’ की शुरुआत की है। इसके तहत मुंबई के जूनियर कॉलेजों के बीच टी-20 क्रिकेट मुकाबले आयोजित किए जाएंगे।
30 अक्टूबर को अंजुमन-ए-इस्लाम के ऐतिहासिक सीएसएमटी परिसर में आयोजित कार्यक्रम में वरिष्ठ नेता शरद पवार ने ट्रॉफी का उद्घाटन किया। इस मौके पर अंजुमन-ए-इस्लाम के अध्यक्ष डॉ. जहीर काजी, पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान दिलीप वेंगसरकर, पूर्व तेज गेंदबाज कृष्णा घावरी और मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष अजिंक्य नाइक सहित कई प्रमुख लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम का नाम ‘एक शाम सलीम दुर्रानी के नाम’ रखा गया था।

इस पहल का मकसद कॉलेज के छात्रों को क्रिकेट खेलने के बेहतर अवसर देना, नई प्रतिभाओं को सामने लाना और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना है।
शरद पवार ने याद किया
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि शरद पवार ने सलीम दुर्रानी को याद करते हुए कहा कि वह सिर्फ एक बेहतरीन क्रिकेटर नहीं, बल्कि अपनी अलग पहचान रखने वाले इंसान भी थे। उनकी बल्लेबाजी, खुशमिजाज स्वभाव और दर्शकों से जुड़ने का अंदाज उन्हें दूसरे खिलाड़ियों से अलग बनाता था।
शरद पवार ने उनसे जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा भी सुनाया। उन्होंने बताया कि जब दुर्रानी बल्लेबाजी कर रहे होते थे, तो दर्शक उनसे छक्का लगाने की मांग करते थे। दुर्रानी कई बार अगली ही गेंद पर छक्का लगाकर दर्शकों की खुशी बढ़ा देते थे।
शरद पवार ने कहा कि देश में खेलों को आगे बढ़ाने के लिए स्कूल और कॉलेज के स्तर से ही प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान करना जरूरी है। कई नौजवानों में अच्छी खेल प्रतिभा होती है, लेकिन आर्थिक परेशानी, ट्रेनिंग और सही मार्गदर्शन की कमी के कारण वे आगे नहीं बढ़ पाते।
उन्होंने जोर दिया कि खेल के अवसर हर वर्ग के युवाओं को मिलने चाहिए। सलीम दुर्रानी के नाम से शुरू की गई यह ट्रॉफी नए खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अच्छा मंच बन सकती है।
150 साल की शैक्षणिक विरासत
अंजुमन-ए-इस्लाम के अध्यक्ष डॉ. जहीर काजी ने संस्था के लंबे सफर और उसकी शैक्षणिक व सामाजिक सेवाओं पर रोशनी डाली। उन्होंने बताया कि 1876 में स्थापित इस संस्था ने शिक्षा को समाज की तरक्की का अहम माध्यम बनाया है।
संस्था ने स्कूलों, कॉलेजों और दूसरे शैक्षणिक केंद्रों के जरिए कई पीढ़ियों को शिक्षा के अवसर दिए हैं। खास तौर पर मुस्लिम समाज में शिक्षा को बढ़ावा देने के साथ महिलाओं की पढ़ाई और उनके आत्मनिर्भर बनने पर भी ध्यान दिया गया है। संस्था ने दूसरे समुदायों के विद्यार्थियों के लिए भी अपने दरवाजे खुले रखे हैं।
डॉ. काजी ने कहा कि शिक्षा का मकसद केवल डिग्री हासिल करना नहीं, बल्कि इंसान को बेहतर बनाना और समाज में आपसी सम्मान बढ़ाना भी है।
उन्होंने संस्था की करीमी लाइब्रेरी का जिक्र करते हुए बताया कि यहां अलग-अलग भाषाओं, धर्मों और विषयों से जुड़ी महत्वपूर्ण किताबें मौजूद हैं। रामायण और महाभारत जैसे ग्रंथों के पुराने उर्दू अनुवाद भी इस संग्रह का हिस्सा हैं। यह विरासत अलग-अलग संस्कृतियों और विचारों को समझने का अवसर देती है।
हैरिस शील्ड में कामयाबी
डॉ. जहीर काजी ने अंजुमन-ए-इस्लाम की क्रिकेट परंपरा का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि संस्था के स्कूलों ने मुंबई के प्रसिद्ध स्कूल क्रिकेट टूर्नामेंट हैरिस शील्ड में लंबे समय तक शानदार प्रदर्शन किया है।
उनके मुताबिक, संस्था की खेल नीति का अहम हिस्सा अपने विद्यार्थियों की प्रतिभा पहचानना, उन्हें प्रशिक्षण देना और आगे बढ़ने के मौके उपलब्ध कराना रहा है।
पूर्व भारतीय कप्तान दिलीप वेंगसरकर ने भी अंजुमन-ए-इस्लाम की क्रिकेट टीम की तारीफ की। उन्होंने अपने कॉलेज के दिनों को याद करते हुए बताया कि सेंट जेवियर्स कॉलेज की ओर से खेलते समय अंजुमन की टीम के खिलाफ मुकाबला हमेशा चुनौतीपूर्ण होता था। टीम में अच्छे बल्लेबाज और तेज गेंदबाज होते थे, जिनका सामना करना आसान नहीं था।
वेंगसरकर ने कहा कि किसी शिक्षण संस्था के लिए यह गर्व की बात है कि वह अपने विद्यार्थियों को प्रशिक्षण देकर अच्छे खिलाड़ी तैयार करे। कॉलेज स्तर पर होने वाले मुकाबले इसी दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
एमसीए का सहयोग
मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष अजिंक्य नाइक ने इस पहल को मुंबई क्रिकेट के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि अंजुमन-ए-इस्लाम का मुंबई के क्रिकेट इतिहास में अहम स्थान रहा है।
एमसीए और अंजुमन-ए-इस्लाम की साझेदारी से शुरू होने वाली यह ट्रॉफी कॉलेज के खिलाड़ियों को प्रतिस्पर्धी क्रिकेट खेलने और अपनी प्रतिभा साबित करने का मौका देगी। इससे नई प्रतिभाओं की पहचान करने में भी मदद मिल सकती है।
कार्यक्रम में पूर्व भारतीय महिला क्रिकेट कप्तान डायना एडुलजी, विधायक अबू आसिम आजमी और रईस शेख, सामाजिक कार्यकर्ता हारून खान तथा खेल आयोजक अरमानी मलिक सहित कई अन्य लोग भी मौजूद रहे।
सलीम दुर्रानी की खास पहचान
सलीम दुर्रानी भारतीय क्रिकेट के उन खिलाड़ियों में शामिल थे, जिन्हें उनके खेल के साथ-साथ उनके अलग अंदाज के लिए भी याद किया जाता है। उनका जन्म 11 दिसंबर 1934 को अफगानिस्तान के काबुल में हुआ था। उन्होंने भारत के लिए 29 टेस्ट मैच खेले, जिनमें 1,202 रन बनाए और 75 विकेट हासिल किए।
वह बाएं हाथ से बल्लेबाजी करते थे और बाएं हाथ से स्पिन गेंदबाजी भी करते थे। उनकी बल्लेबाजी में आक्रामकता और दर्शकों को रोमांचित करने की क्षमता थी। वर्ष 1961 में उन्हें अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
1971 में वेस्टइंडीज के खिलाफ भारत की ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज जीत में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पोर्ट ऑफ स्पेन टेस्ट में क्लाइव लॉयड और गैरी सोबर्स जैसे प्रमुख बल्लेबाजों को आउट करके उन्होंने भारतीय टीम की जीत में योगदान दिया।
क्रिकेट के अलावा सलीम दुर्रानी ने फिल्मों में भी काम किया। वर्ष 1973 की फिल्म ‘चरित्र’ में वह अभिनेत्री परवीन बाबी के साथ नजर आए। उनका निधन 2 अप्रैल 2023 को हुआ था।
नई पीढ़ी को मिलेगा मौका
सलीम दुर्रानी के नाम से शुरू की गई यह ट्रॉफी खेल, शिक्षा और नई प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देने की साझा कोशिश है। इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कितने कॉलेज इसमें हिस्सा लेते हैं और खिलाड़ियों को आगे बढ़ने के लिए किस तरह के अवसर मिलते हैं।
अगर इस प्रतियोगिता को नियमित रूप से आयोजित किया जाता है और अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को प्रशिक्षण व उचित मार्गदर्शन मिलता है, तो यह मुंबई में कॉलेज क्रिकेट को मजबूत करने में मददगार साबित हो सकती है।
सलीम दुर्रानी ने अपने खेल से दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई थी। अब उनके नाम से शुरू हुई यह ट्रॉफी नए खिलाड़ियों को अपने सपनों की ओर बढ़ने का मौका दे सकती है। यही इस महान क्रिकेटर को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
क़ौमी फरमान डिजिटल मीडिया नेटवर्क

