साइंस की नई राहें, डॉ. सैयदा गुलरैज़ बेगम को पीएचडी की डिग्री

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(नांदेड़ से मुनव्वर खान पठान की रिपोर्ट)

नांदेड की सरज़मीं पर एक यादगार और परवक़ार दिन उस वक़्त सामने आया जब स्वामी रामानंद तीर्थ मराठवाड़ा यूनिवर्सिटी (SRTMUN) के 28वें कॉन्वोकेशन में सैकड़ों तलबा-ओ-तालिबात को डिग्रियाँ नवाज़ी गईं। उसी माहौल में एक ख़ास और क़ाबिल-ए-फ़ख़्र पल वह था जब सैयदा गुलरैज़ बेग़म सैयद अनवर सादात को जूलॉजी (Zoology) में अपनी नुमायां तहरीकी मेहनत पर पीएचडी की डिग्री दी गई।

उनकी रिसर्च की रहनुमाई प्रोफ़ेसर एस. पी. चौहान (सदारत-ए-शोबा, जूलॉजी, SRTMUN) ने की। यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर और असातिज़ा ने इस मौक़े पर कहा कि “सैयदा गुलरैज़ बेग़म की रिसर्च न सिर्फ़ इल्मी दुनिया में नई राहें खोलेगी बल्कि आने वाले मुहक़्क़िक़ीन (शोधकर्ताओं) के लिए एक रौशन मिसाल भी बनेगी। उनकी मेहनत और लगन साइंटिफ़िक दुनिया में नई मंज़िलें तय करेगी।”

कॉन्वोकेशन हॉल में उस वक़्त जोश और ख़ुशी का माहौल था जब डिग्री उनकी झोली में आई। डॉ. गुलरैज़ बेग़म ने इस इज़्ज़त को पूरे एहतराम के साथ कबूल किया। उनके साथ उनके शोहर मोहसिन ख़ान भी मौजूद थे जिन्होंने अपनी बीवी की इस बुलंद कामयाबी पर फ़ख़्र और ख़ुशी का इज़हार किया।

इस प्रोग्राम में सैकड़ों दूसरे तलबा-ओ-तालिबात को भी एम.फिल., डॉक्टरेट और मुख़्तलिफ़ शोबों की डिग्रियाँ दी गईं। हर तरफ़ जश्न, उत्साह और एक अकादमिक वक़ार का माहौल छाया रहा।

डॉ. सैयदा गुलरैज़ बेग़म की यह कामयाबी सिर्फ़ उनके लिए ही नहीं, बल्कि नांदेड और मराठवाड़ा की तमाम बेटियों के लिए एक पैग़ाम है कि अगर जज़्बा और लगन हो तो इल्म और तहक़ीक़ की दुनिया में कोई भी मंज़िल हासिल की जा सकती है।

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