मुंबई(शिबली रामपुरी) अंग्रेजों के जमाने के जेलर के नाम से बॉलीवुड में मशहूर असरानी सभी को एक लंबे वक्त तक हंसाने के बाद गमज़दा करके चले गए. 84 साल की उम्र में असरानी ने इस संसार को अलविदा कहा.
असरानी को फिल्म जगत में जितनी शोहरत और बुलंदी मिली उसके पीछे उनकी सच्ची मेहनत और लगन का भी बहुत बड़ा शुमार था. एक ऐसा दौर भी था कि पुणे फिल्म इंस्टीट्यूट से ट्रेनिंग और सर्टिफिकेट मिलने के बावजूद भी असरानी को दर-दर भटकना पड़ रहा था और कोई भी निर्माता निर्देशक उनको काम देने को तैयार नहीं था. कुछ वक्त पहले दिए एक इंटरव्यू में असरानी ने इसका जिक्र करते हुए बताया था कि उस समय अपने सर्टिफिकेट के साथ काम के लिए मैं इधर-उधर घूमता रहता था और जिस फिल्मकार से मिलता था वह कहते थे एक्टिंग के लिए सर्टिफिकेट की क्या जरूरत है बड़े सितारे बिना ट्रेनिंग के काम कर रहे हैं तुम कौन हो चलो जाओ यहां से निकलो यहां से इस तरह की बातें असरानी को सुननी पड़ रही थी.
उस समय इंदिरा गांधी सूचना एवं प्रसारण मंत्री थीं और असरानी की उनसे पुणे में मुलाकात हो गई तब असरानी ने उनसे शिकायत करते हुए कहा कि सर्टिफिकेट होने के बावजूद भी कोई भी मुझे फिल्म में काम नहीं दे रहा है क्या सर्टिफिकेट और फिल्म इंस्टीट्यूट से ट्रेनिंग की कोई अहमियत नहीं है?
असरानी की बात सुनकर इंदिरा गांधी ने कुछ फिल्म निर्माता और निर्देशको को कहा कि असरानी को काम दिया जाना चाहिए इसके बाद असरानी को काम मिलना शुरू हो गया. असरानी ने कई फिल्मों में यादगार भूमिकाएं की जिसके माध्यम से वह फिल्म जगत में हमेशा याद किए जाएंगे.
फिल्म इंस्टीट्यूट से सर्टिफिकेट के बावजूद भी काम ना मिलने पर असरानी को इंदिरा गांधी ने दिया था सहारा
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