गुफ्तगू-2025 — रियल एस्टेट की नई राहें तलाशती लखनऊ की अहम बैठक

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(रईस खान)

लखनऊ के हरदोई रोड स्थित अज़्म इंटरप्राइजेज कार्यालय में आज शाम “गुफ्तगू-2025” के नाम से एक महत्वपूर्ण व्यावसायिक परिचर्चा आयोजित की गई। कार्यक्रम में क़ौमी फरमान डिजिटल मीडिया नेटवर्क के संपादक रईस खान, चार्टर्ड अकाउंटेंट सलमान अख्तर, प्रॉपर्टी कारोबारी फैसल खान, मोअज्जम अली, मुशीर आलम, इंजीनियर सगीर अहमद खान सहित रियल एस्टेट से जुड़े कई अनुभवी चेहरे शामिल हुए। बैठक में 2025 के बदलते आर्थिक हालातों के बीच छोटे-छोटे प्लॉट्स की बिक्री में आई चुनौतियों, आबादी और बाज़ार की मांग, सरकारी नियम, भू-उपयोग परिवर्तन, म्युटेशन, रजिस्ट्रेशन और प्लॉटिंग को सुचारू रूप से संचालित करने के तरीकों पर गहन विमर्श हुआ।

गुफ्तगू की शुरुआत स्थानीय परिवेश और लखनऊ-कानपुर-उन्नाव-हरदोई बेल्ट में बढ़ते आवासीय दबाव से हुई। विशेषज्ञों ने माना कि छोटे प्लॉट्स की बिक्री अब पहले जैसी सरल नहीं रही, क्योंकि ग्राहकों की प्राथमिकता सड़क, सीवर, इलेक्ट्रिसिटी, पानी और सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं पर केंद्रित हो गई है। दूसरे पक्ष में अवैध कॉलोनियों पर प्रशासन की सख़्ती और नियमों की जटिलता ने भी कारोबारियों के सामने अतिरिक्त चुनौतियाँ खड़ी कर दी हैं।

इंजीनियर सगीर अहमद खान ने बेहद तकनीकी और व्यवहारिक सुझाव रखते हुए कहा कि किसी भी कॉलोनी को “सिर्फ प्लॉट काटकर बेच देने” की मानसिकता से बाहर निकालना होगा। प्लानिंग में वे वैज्ञानिक तौर पर प्लॉट साइज़, सड़क की चौड़ाई, सीवेज, वर्षा जल निकासी, ग्रीन ज़ोन और ट्रैफिक फ्लो पर आधारित लेआउट को आवश्यक मानते हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि “आज ग्राहक को इंजीनियरिंग-आधारित कॉलोनाइज़ेशन चाहिए, सिर्फ जमीन घेरकर बिक्री नहीं।” उनके अनुसार आकर्षक नक्शा, ड्रेनेज डिज़ाइन और भविष्य की सड़क चौड़ीकरण को ध्यान में रखकर प्लान बनाया जाए तो प्लॉट की वैल्यू खुद बढ़ती है, ग्राहक का भरोसा भी मजबूत होता है और कानूनी अड़चनें भी दूर रहती हैं। उन्होंने छोटे फार्म-हाउस आधारित प्रोजेक्ट्स की व्यवहार्यता, डिजाइन और भविष्य की संभावनाओं पर सुझाव दिए।

संपादक रईस खान ने इस क्षेत्र में पारदर्शिता और डिजिटल डॉक्यूमेंटेशन की अनिवार्यता पर जोर देते हुए कहा कि छोटे निवेशकों के भरोसे को पुनर्जीवित करने के लिए वैधता, स्पष्ट नक्शा और रजिस्ट्री की सुरक्षा सुनिश्चित करना समय की मांग है। फैसल खान ने व्यावहारिक दृष्टिकोण रखते हुए बताया कि कॉलोनियों की प्लानिंग में चौड़ी सड़कें, पार्क, सामुदायिक सुविधाएँ और व्यवस्थित प्लॉटिंग कारोबार को नई दिशा दे सकती है। मोअज्जम अली और मुशीर आलम ने ग्रामीण-शहरी सीमा पर जमीन खरीदने-बेचने की समस्याओं और समाधान साझा किए। कर और वित्तीय बिंदुओं पर चर्चा करते हुए सीए सलमान अख्तर ने बताया कि व्यवस्थित लेखांकन, खर्च नियंत्रण, जीएसटी अनुपालन और निवेश प्रबंधन रियल एस्टेट को दीर्घकालिक स्थिरता प्रदान कर सकते हैं।

बैठक का माहौल सौहार्दपूर्ण रहा और उपस्थित सदस्यों ने लखनऊ एवं आसपास के ज़िलों में एक नई योजनाबद्ध और कानूनी ढांचे वाली कॉलोनाईज़ेशन पॉलिसी की आवश्यकता पर सहमति जताई। यह भी प्रस्ताव रखा गया कि समय-समय पर ऐसी बैठकों का आयोजन कर समस्याओं और संभावनाओं को सार्वजनिक विमर्श में लाया जाए।

“गुफ्तगू-2025” ने स्पष्ट किया कि रियल एस्टेट कारोबार में चुनौती के साथ अवसर भी मौजूद हैं, बशर्ते कि कार्य प्रणाली आधुनिक, पारदर्शी और ग्राहक-हित पर आधारित हो।

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