(रईस खान)
आज के दौर में जहां नफरत की दीवारें खड़ी हो रही हैं, वहां लखनऊ यूनिवर्सिटी के छात्रों ने एकता की ऐसी तस्वीर पेश की कि हर कोई तारीफ कर रहा है। कैंपस की 200 साल पुरानी लाल बारादरी में बनी मस्जिद को अचानक बंद कर दिया गया, लेकिन मुस्लिम छात्रों ने बाहर नमाज अदा की और हिंदू छात्र उनके पीछे ढाल बनकर खड़े रहे। ये वो मोमेंट था जब हिंदू-मुस्लिम भाईचारे की मिसाल कायम हुई, और छात्रों ने मिलकर इफ्तार भी किया।
बैकग्राउंड- लाल बारादरी का तारीखी महत्व
लाल बारादरी लखनऊ यूनिवर्सिटी के कैंपस में एक पुरानी इमारत है, जो 18वीं सदी में नवाबों के दौर में बनी थी। ये लाल रंग की बारादरी है, जिसमें एक छोटी मस्जिद भी है। छात्र और स्टाफ सालों से यहां नमाज पढ़ते आ रहे थे। लेकिन यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इसे जीर्ण-शीर्ण बताकर लॉक कर दिया और बैरिकेड लगा दिए।पिछले सालों में, 2021 में इसकी एक दीवार गिर चुकी थी, और यूनिवर्सिटी ने खुद ही इसके आसपास कंस्ट्रक्शन पर बैन लगाया था। लेकिन अचानक बंद होने से छात्रों में गुस्सा भड़क गया। कुछ रिपोर्ट्स कहती हैं कि ये फैसला रेस्टोरेशन के नाम पर लिया गया, लेकिन छात्र इसे धार्मिक आजादी पर हमला मान रहे हैं।
क्या हुआ कैंपस में?
22 फरवरी को, जब मुस्लिम छात्र नमाज के लिए पहुंचे, तो मस्जिद का गेट बंद मिला। उन्होंने बाहर ही नमाज अदा करने का फैसला किया। लेकिन डर था कि कोई दिक्कत न हो। बस यहीं हिंदू छात्र आगे आए। उन्होंने हाथ में हाथ डालकर ह्यूमन चेन बनाई और मुस्लिम भाइयों की हिफाजत में खड़े हो गए।एक वीडियो में साफ दिखता है कि मुस्लिम छात्र सजदे में हैं, और हिंदू छात्र पीछे वॉच कर रहे हैं। इसके बाद, रमजान के मौके पर सबने मिलकर इफ्तार किया – रोटी साथ खाई, पानी साथ पिया। छात्रों के नारे गूंजे: “आधी रोटी खाएंगे, हिंदू-मुस्लिम एकता बचाएंगे!” ये दृश्य सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, और लोग कह रहे हैं कि ये असली गंगा-जमुनी तहजीब है।
छात्रों की आवाज- क्यों हुआ विरोध?
मुस्लिम छात्रों का कहना है कि मस्जिद बंद करना उनकी इबादत पर रोक है। एक छात्र ने कहा, “हम सालों से यहां नमाज पढ़ते हैं, अचानक क्यों बंद?” हिंदू छात्रों ने सपोर्ट में कहा, “हम सब एक हैं, कोई फर्क नहीं। अगर उनके साथ गलत होगा, तो हम चुप नहीं रहेंगे।” यूनिवर्सिटी के कुछ प्रोफेसर्स ने भी आलोचना की, कहा कि ऐसी पुरानी इमारत को ब्लॉक करके हेरिटेज को नुकसान पहुंच रहा है। लेकिन प्रशासन की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया। कुछ रिपोर्ट्स में ये भी जिक्र है कि कैंपस में पहले से ही हिंदू-मुस्लिम यूनिटी मजबूत है, जैसे UGC के नए रूल्स पर भी छात्र साथ प्रोटेस्ट कर चुके हैं।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स और मीडिया?
सोशल मीडिया पर ये घटना ट्रेंड कर रही है। मुस्लिम मिरर और वॉयसअप मीडिया जैसे प्लेटफॉर्म्स ने वीडियो शेयर किए, जहां छात्रों की एकता की तारीफ हो रही है।जी न्यूज ने इसे “एकता अनसील” बताया, मतलब बंद मस्जिद लेकिन भाईचारा खुला। हिस्टोरिकल रिसर्च बताती है कि लाल बारादरी नवाबों की विरासत है, और लखनऊ की गंगा-जमुनी संस्कृति का हिस्सा। लेकिन हाल के सालों में, यूपी में मस्जिदों पर विवाद बढ़े हैं, जैसे अकबर नगर में मस्जिद गिराई गई। फिर भी, ये घटना उम्मीद की किरण है।
ये घटना बताती है कि युवा पीढ़ी नफरत से ऊपर उठकर एकता चुन रही है। लखनऊ, जो हमेशा से हिंदू-मुस्लिम भाईचारे का शहर रहा है, यहां फिर वही तहजीब जिंदा हुई। छात्रों का ये कदम पूरे देश को मैसेज देता है, मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना। उम्मीद है प्रशासन इस पर गौर करे और मस्जिद को दोबारा खोले। फिलहाल, कैंपस में अमन-चैन है, और छात्रों की दोस्ती मजबूत।

