बकरीद को लेकर शहर काजी सैय्यद ज़ियाउल आरफीन ने की अपील

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(फजलुर्रहमान)

बांगरमऊ, उन्नाव।काजी-ए शहर व इमाम ईदगाह सैयद जियाउल आरफ़ीन ने बकरीद पर लोगों से अपील करते हुए कहा कि नमाज़-ए-ईद-उल-अज़हा ईदगाह में इंशाअल्लाह ठीक 7:30 बजे होगी। आप सभी खुर्द-ओ-कलाँ हज़रात से गुज़ारिश है कि नमाज़ ईदगाह में ही अदा करें।

कुर्बानी के सिलसिले में उन्होंने बताया कि कुर्बानी के जानवर की खरीदारी में बहुत एहतियात से काम लें। तंदुरुस्त व फ़रबा जानवर का ही इंतिखाब करें। दुबले-पतले, बीमार या लागर जानवर की कुर्बानी न करें। और देख लें कि उसका कोई उज़्व कटा-फटा न हो। छोटा जानवर एक साल और बड़ा जानवर दो साल से कम न हो। कुर्बानी के वक़्त जानवर भूखा या प्यासा न हो। पहले से ही उसे खिला-पिला लें। कुर्बानी किसी खुली जगह या आम रास्ते पर हरगिज़ न करें। किसी चहारदीवारी, बाउंड्री वगैरह के पर्दे में ही करें।

ख़ून या ग़लाज़त गली, सड़क या नालियों में न बहाएँ। कुर्बानी की जगह पर भीड़ जमा न होने दें।

आलाइश व फ़ज़लात (अवशेष ) वगैरह आवामी जगहों पर या इधर-उधर न फेंकें। नगर पालिका की इंतज़ाम करदा गाड़ी में डालें या ज़मीन में गड्ढा खोद कर दफ़्न कर दें।कुर्बानी की जगहों पर साफ़-सफ़ाई का खास एहतिमाम किया जाए। कुर्बानी के वक़्त उसका फोटो या मूवी वगैरह क़तअन न बनाएँ और न ही उसको सोशल मीडिया पर अपलोड करें। घर के ज़िम्मेदार अफ़राद इसके लिए अपने बच्चों को तनबीह करें और ऐसा करने से उन्हें सख्ती से मना कर दें।

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि कुर्बानी का गोश्त तक़सीम करने के सिलसिले में एक बात का खास ख्याल रखें कि ज़्यादा से ज़्यादा ग़ुरबा, मसाकीन या जिनके घर कुर्बानी न हो सकी हो, ऐसे लोगों को कुर्बानी का गोश्त तक़सीम करने में तरजीह दें। यूँ तो कुर्बानी का गोश्त किसी भी शख्स को दिया जा सकता है, लेकिन जो लोग ज़्यादा मुस्तहिक हों, उनको ही कुर्बानी का गोश्त दिया जाए तो ज़्यादा बेहतर है। तमाम हज़रात से मुदब्बराना दरख्वास्त है कि ईद-उल-अज़हा का यह त्योहार सादगी और अल्लाह व उसके प्यारे रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के फ़रमान के मुताबिक ही मनाएँ। आपके किसी भी क़ौल व फ़ेल से अपने पड़ोसियों या बिरादरान-ए-वतन को कोई तकलीफ न पहुँचे।

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