मुसलमानों की समस्याओं को लेकर राजनीतिक एवं धार्मिक संगठनों से जुड़े लोग दिल्ली में होंगे एकजुट

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(शिब्ली रामपुरी)

दिल्ली में एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित होने जा रहा है जिसमें मुस्लिम समाज के राजनीतिक नेताओं से लेकर धार्मिक संगठनों से जुड़े लोग एक मंच पर आएंगे और इस कार्यक्रम में मुसलमानों की बदहाली कैसे दूर हो और उनके सामने जो समस्याएं हैं कैसे उनका समाधान निकले इस पर एकजुटता के साथ विचार विमर्श किया जाएगा और आगामी रणनीति भी तय की जाएगी.
राज्यसभा के पूर्व सदस्य मोहम्मद अदीब की अध्यक्षता में दिल्ली में यह कार्यक्रम 24 जुलाई को होने जा रहा है. वैसे तो मुस्लिम समाज की समस्याओं को लेकर इससे पहले भी कई बड़े कार्यक्रम आयोजित हुए हैं लेकिन यह एक ऐसा कार्यक्रम बताया जा रहा है कि जिसमें पहली बार कुछ ऐसे लोग भी मंच पर एक दूसरे के साथ रहेंगे कि जिनकी राजनीतिक विचारधारा भी अलग-अलग समझी जाती है लेकिन वह लोग भी अब मुस्लिम समाज की समस्याओं को लेकर यहां पर मंथन करेंगे.
कार्यक्रम से पूर्व राज्यसभा के पूर्व सदस्य मोहम्मद अदीब ने हाल ही एक इंटरव्यू में कहा कि मुसलमानों के सामने मौजूदा समय में कई बड़ी समस्याएं हैं कि जिन पर समय रहते ध्यान देने की जरूरत है. पत्रकार द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि देश के विभिन्न राज्यों में मुसलमान के सामने अलग-अलग तरह की समस्याएं हैं और अफसोस की बात यह है कि सरकारों द्वारा उन समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है. कई जगह पर तो मुसलमानों के खिलाफ लगातार नफरत फैलाई जा रही है और उनको हर तरह से नुकसान पहुंचाने का प्रयास हो रहा है.
दिल्ली में जो बैठक आयोजित होने जा रही है उस बैठक में उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में मस्जिदों-मदरसों के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई, उत्तराखंड समेत अलग-अलग राज्योंं में लाई जा रही समान नागरिक संहिता (यूसीसी), मॉब लिंचिंग, चुनाव आयोग की मतदाता सूची विशेष पुनरीक्षण अभियान (एसआईआर) जैसे मुद्दे पर चर्चा होगी। बैठक में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद, एआईएमआईएम के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी, सांसद मोहिबुल्ला नदवी, जमीयत उलेमा ए हिंद के मुखिया अरशद मदनी, महमूद मदनी, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, जमाअत ए अहले हदीस, जमाअत ए इस्लामी जैसे मुस्लिम संगठनों से जुड़े प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। बताया जाता है कि उत्तर प्रदेश में आगामी 2027 में जो विधानसभा चुनाव होने जा रहा है और उसमें मुस्लिम वोटो को अपने पक्ष में करने की कुछ राजनीतिक पार्टियां कोशिश कर रही हैं और एक बार फिर से मुस्लिम समाज को सुनहरे ख्वाब दिखाए जा रहे हैं ताकि उनका वोट हासिल किया जा सके तो इस बात को लेकर भी दिल्ली में आयोजित होने वाले इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में विचार विमर्श होगा और एक मजबूत रणनीति तैयार किए जाने की भी चर्चा है. इस बात पर भी गंभीरता से विचार होगा कि खुद को सेकुलर कहने वाली राजनीतिक पार्टियों को वोट देने से आखिर मुसलमानों को हासिल क्या हो रहा है?

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