इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक युग का अंत हो गया। आजमगढ़ के निज़ामबाद से पाँच बार समाजवादी पार्टी के विधायक रहे आलम बादी आज़मी साहब का 22 जुलाई बुधवार 2026 को 90 साल की उम्र में इंतकाल हो गया। वे देश के सबसे बुज़ुर्ग विधायकों में शुमार थे।
आलम बादी आज़मी साहब 16 मार्च 1936 को आजमगढ़ के बिंदावल में पैदा हुए। उन्होंने गोरखपुर से इंटर किया और इलेक्ट्रिकल-मैकेनिकल इंजीनियरिंग का डिप्लोमा हासिल किया। इंजीनियर की नौकरी छोड़कर नेहरू, गांधी और सुभाष चंद्र बोस की प्रेरणा से सामाजिक सेवा में लग गए।
राजनीतिक सफर
डॉ. अब्दुल जलील फरीदी के साथ मुस्लिम मजलिस से अपनी राजनीतिक शुरुआत की। बाद में समाजवादी पार्टी से जुड़े। 1996 से लेकर 2022 तक निज़ामबाद सीट से पाँच बार विधायक चुने गए। उनकी पहचान ईमानदारी, संघर्ष और बेबाकी की थी।
वे सादगी के मिसाल थे। कोई बंगला नहीं, कोई कार काफिला नहीं, कोई एक्स्ट्रा सुरक्षा नहीं। साधारण घर में रहते, लोगों से सीधे मिलते, विकास कार्य खुद निगरानी करते। कमीशन नहीं लेते, सत्ता के नशे से दूर रहे। गरीबों, किसानों और आम लोगों के हक के लिए हमेशा आवाज़ उठाई।
एक मिसाल
90 साल की उम्र में भी अपने क्षेत्र में पैदल घूमकर लोगों की समस्याएँ सुनते। राजनीति में रहकर भी ईमानदारी की मिसाल पेश की, जो आजकल बहुत कम देखने को मिलती है।
आलम बादी आज़मी साहब ने साबित किया कि राजनीति सेवा का ज़रिया हो सकती है, न कि कमाई का। उनकी मौत से न सिर्फ़ आजमगढ़, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश और देश को एक ईमानदार नेता की कमी महसूस होगी।
क़ौमी फ़रमान डिजिटल मीडिया नेटवर्क

