(रईस खान )
इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजेऊन……!
मुस्लिम कौम के बुजुर्ग और मशहूर समाजी शख्सियत जनाब अहमद रशीद शेरवानी आज 94 साल की उम्र में हैदराबाद में इंतकाल फरमा गए। सोमवार को उन्होंने इस दुनिया-ए-फानी को अलविदा कहा। अल्लाह तआला उनको जन्नतुल फिरदौस में आला मुकाम अता फरमाए।
जनाब शेरवानी साहब कई दहाइयों से मुस्लिम कौम की तालीमी तरक्की के लिए काम कर रहे थे। उन्होंने अपनी जिंदगी का बड़ा हिस्सा मुसलमानों को इल्म हासिल करने की तरगीब देने में गुजारा। वो कहते थे कि “हर मुसलमान मर्द और औरत पर इल्म हासिल करना फर्ज है”, जो हदीस मुबारक से लिया गया है।
1976 से उन्होंने भारत सेवा ट्रस्ट के जरिए उत्तर भारत के स्कूलों में मुस्लिम बच्चों, खासकर लड़कियों की तालीम पर जोर दिया। उनके कोशिशों से पास रेट 25% से बढ़कर 75% हो गया, और फर्स्ट डिवीजन वाले स्टूडेंट्स की तादाद दर्जनों से हजारों में पहुंच गई। वो स्कूलों को इनाम देकर मुकाबला करवाते थे, ताकि लोग खुद अपनी तालीम की जिम्मेदारी लें।
शेरवानी साहब का खानदान आजादी की जंग में शामिल था। उनके वालिद साहब गांधी जी के पक्के मानने वाले थे और शुगर फैक्ट्री के मालिक थे।जनाब शेरवानी ने इलाहाबाद के सेंट जोसेफ स्कूल से तालीम हासिल की और बाद में गुरुग्राम में रहते हुए भी हैदराबाद से जुड़े रहे। वो शेरवानी एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर भी थे, लेकिन उनकी असल शोहरत समाजी कामों से थी।
वो ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस-ए-मुशावरत से पांच दहाइयों से ज्यादा वक्त से जुड़े थे और हाल में उसके सुप्रीम गाइडेंस काउंसिल के चेयरमैन थे। दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर और इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर से भी उनका ताल्लुक था। उन्होंने नेशनल कमीशन फॉर माइनॉरिटीज में 2003 से 2006 तक मेंबर के तौर पर काम किया।
उनकी कलम भी बहुत तेज थी। उर्दू, हिंदी और इंग्लिश अखबारों और जरनल्स में हजारों आर्टिकल्स लिखे। वो गंगा-जमुनी तहजीब के पक्के पैरोकार थे। 2024 में हैदराबाद के साहित्योत्सव जश्न-ए-अदब में उन्होंने श्रीमद भगवद गीता का उर्दू में पाठ किया, जो हमारी मिली-जुली संस्कृति का बेहतरीन नमूना था। वो कहते थे कि “अपनी कौम को तालीम दो, वरना गरीबी और पिछड़ापन तुम्हारा मुकद्दर बनेगा।”
उनके इंतकाल की खबर से मुस्लिम समाज में गम का माहौल है। कई समाजी और तालीमी इदारे उनके काम को याद कर रहे हैं। उनके घर वाले और चाहने वाले अल्लाह से दुआ कर रहे हैं कि उन्हें जन्नत में ऊंचा मुकाम मिले। उनकी रूह को सुकून मिले।

