(रईस खान)
मौलाना उबैदुल्ला खान आज़मी ने आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के अध्यक्ष खालिद सैफुल्लाह रहमानी को एक अहम खत लिखकर देशभर में मुसलमानों के मौजूदा हालात पर गहरी चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि मुल्क में मुसलमानों के खिलाफ बढ़ते दबाव, डर और मजहबी मामलों में दखलअंदाजी की वजह से समुदाय में बेचैनी बढ़ रही है।
मौलाना ने अपने खत में कहा कि मॉब लिंचिंग, यूनिफॉर्म सिविल कोड , मस्जिदों और वक्फ संपत्तियों पर उठ रहे विवाद, और स्कूलों में मुस्लिम बच्चों पर “वंदे मातरम्” पढ़ने के दबाव जैसे मुद्दों ने मुसलमानों को परेशान कर दिया है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ अलग-अलग घटनाएं नहीं, बल्कि एक ऐसा माहौल बन रहा है जिससे मुसलमान खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड कानूनी लड़ाई लड़ रहा है, जो अच्छी बात है, लेकिन सिर्फ अदालतों पर भरोसा करना काफी नहीं होगा। उनके मुताबिक अब जरूरत है कि बोर्ड जनता के बीच जाकर जागरूकता पैदा करे और मुसलमानों का हौसला बढ़ाए।
मौलाना ने बोर्ड से मांग की कि जल्द एक इमरजेंसी मीटिंग बुलाई जाए और मौजूदा हालात पर गंभीर रणनीति बनाई जाए। साथ ही देशभर में बड़ी जनसभाएं, अवेयरनेस प्रोग्राम और शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक अभियान चलाने की भी अपील की गई है।
उन्होंने कहा कि मुसलमान देश की तरक्की और अमन के लिए हर कुर्बानी देने को तैयार हैं, लेकिन अपने दीन, पहचान और शरीअत के मामले में समझौता नहीं कर सकते।
अपने खत के आखिर में मौलाना ने उम्मीद जताई कि बोर्ड की नेतृत्व टीम हालात की गंभीरता को समझेगी और जल्द मजबूत और असरदार कदम उठाएगी।

