हर समय ऑनलाइन रहना बना रहा दिमाग को बेचैन, जानिए डिजिटल थकान के बड़े खतरे

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(डॉ बेनज़ीर खान)

डिजिटल दौर में मोबाइल और इंटरनेट हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं. सुबह आंख खुलते ही नोटिफिकेशन चेक करना और रात तक सोशल मीडिया स्क्रॉल करना अब आम आदत बन गई है. लेकिन लगातार स्क्रीन से जुड़े रहने की यह आदत मानसिक स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकती है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि जरूरत से ज्यादा डिजिटल एक्सपोजर दिमाग को थका देता है, जिससे तनाव, चिड़चिड़ापन और अकेलेपन जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं.

लगातार स्क्रीन देखने से दिमाग पर असर

मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, घंटों तक फोन चलाने से दिमाग को आराम नहीं मिल पाता. लगातार नोटिफिकेशन, वीडियो और सोशल मीडिया अपडेट्स ब्रेन को ओवरलोड कर देते हैं. इसका असर ध्यान लगाने की क्षमता, याददाश्त और नींद पर पड़ सकता है. कई लोगों में बिना वजह बेचैनी और मूड स्विंग्स भी देखने को मिलते हैं.

सोशल मीडिया तुलना बढ़ा रही तनाव

सोशल मीडिया पर दूसरों की लाइफ देखकर खुद को कम आंकने की आदत तेजी से बढ़ रही है. परफेक्ट लाइफ, महंगे ट्रिप्स और सफलता की पोस्ट्स कई लोगों में हीन भावना और एंग्जायटी बढ़ा सकती हैं. खासकर युवाओं में इसका असर ज्यादा देखा जा रहा है.

नींद खराब होने से बढ़ रही मानसिक परेशानी

रात में देर तक मोबाइल इस्तेमाल करने से नींद की क्वालिटी खराब होती है. स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट मेलाटोनिन हार्मोन को प्रभावित करती है, जिससे देर रात तक नींद नहीं आती. लगातार नींद पूरी न होने से स्ट्रेस, थकान और मानसिक कमजोरी महसूस हो सकती है.

डिजिटल ओवरलोड के संकेत

1.बिना वजह बार-बार फोन चेक करना

2.फोन दूर होते ही बेचैनी महसूस होना

3.ध्यान लगाने में परेशानी

4.छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आना

5.लोगों से बातचीत कम करना

6.नींद और मूड खराब रहना

मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर रखने के आसान तरीके

1.दिन में कुछ समय “नो स्क्रीन टाइम” जरूर रखें.

2.सुबह उठते ही फोन देखने की आदत कम करें.

3.सोने से कम से कम 1 घंटा पहले मोबाइल दूर रखें.

4.सोशल मीडिया ऐप्स के नोटिफिकेशन सीमित करें.

5.रोजाना वॉक, योग या मेडिटेशन करें.

6.परिवार और दोस्तों के साथ ऑफलाइन समय बिताएं.

7.किताब पढ़ने, संगीत या किसी नई हॉबी को समय दें.

8.हफ्ते में एक दिन “डिजिटल डिटॉक्स डे” जरूर रखें.

मेंटल हेल्थ डे का मकसद यही याद दिलाना है कि मानसिक स्वास्थ्य भी उतना ही जरूरी है जितना शारीरिक स्वास्थ्य. तकनीक का इस्तेमाल करें, लेकिन उसकी लत को अपने दिमाग और रिश्तों पर हावी न होने दें.

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