खिराज ए अक़ीदत– एक समर्पित समाज सेवक और शिक्षाविद अरशद सिद्दीकी का मुंबई में इंतकाल

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  (रईस खान)

अरशद आज़मी, जिन्हें अरशद सिद्दीकी या अरशद इलियास सिद्दीकी के नाम से भी जाना जाता था, पूर्व सांसद इलियास आज़मी साहब के बेटे थे। आज 12 जून दिन जुमा, 2026 को उनका इंतकाल हो गया।शाहाबाद ,हरदोई, यूपी में उनका बीएन डिग्री कॉलेज और अन्य संस्थान चलते थे। मुंबई में भी वे सियासी और समाजी कामों में एक्टिव रहे।

इलियास आज़मी साहब शाहाबाद से लोकसभा सांसद रह चुके थे। बीएसपी और अन्य पार्टियों से जुड़े रहे। उन्होंने गरीबों, पिछड़ों और मुस्लिम समुदाय के लिए काम किया। उनके बेटे अरशद सिद्दीकी ने उसी राह पर चलते हुए शिक्षा और समाज सेवा को अपना मिशन बनाया।

अरशद साहब का जन्म आजमगढ़ के इलाके में हुआ। परिवार गरीब किसान पृष्ठभूमि से था, लेकिन पिता की सियासी और समाजी गतिविधियों ने उन्हें प्रेरणा दी। मां बदरुन निसा की याद में उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में कदम रखा।

शाहाबाद में अरशद सिद्दीकी ने बीएन , बदरुन निसा डिग्री कॉलेज स्थापित किया। यह कॉलेज उनकी मां की याद में है, जो 1980 में गुजर गई थीं। बाद में बीएन पीजी कॉलेज, इब्ने सीना फार्मेसी कॉलेज और मान्यवर कांशीराम लॉ कॉलेज भी शुरू किए।

ये संस्थान ग्रामीण इलाके के गरीब, पिछड़े और कमजोर तबके के बच्चों के लिए वरदान बने। यहां फ्री हॉस्टल, शिक्षा और कई कोर्स जैसे बीए, बीएससी, बीएड, फार्मेसी, लॉ आदि चलते हैं। अरशद साहब कॉलेज के प्रेसिडेंट रहे और पिता के साथ मिलकर इसे चलाया। आज भी शाहाबाद में अजीम विद्या नागरी के नाम से ये संस्थान मशहूर हैं।

अरशद साहब मुंबई में भी रहकर काम करते थे। वे रेड क्रिसेंट सोसाइटी ऑफ इंडिया के चेयरमैन थे। इस एनजीओ के जरिए उन्होंने राहत कार्य, गरीबों की मदद, स्वास्थ्य सेवाएं और इंटरनेशनल मदद , जैसे रोहिंग्या संकट में हिस्सा लिया।

मुंबई नॉर्थ सेंट्रल कांग्रेस से जुड़े रहे। स्थानीय मुद्दों जैसे ट्रैफिक, पार्किंग, गरीबी और मुस्लिम युवाओं के मुद्दों पर आवाज उठाई। परिवार के कई सदस्य मुंबई की बीएमसी पॉलिटिक्स में भी सक्रिय हैं। वे सादगी और सेवा के लिए जाने जाते थे।

अरशद साहब सियासत, शिक्षा और समाज सेवा के बीच संतुलन रखते थे। पिता की तरह वे भी कमजोर वर्गों के लिए काम करते थे। बीएसपी, सपा और कांग्रेस जैसे प्लेटफॉर्म पर सक्रिय रहे। चुनाव भी लड़े, जैसे धौरहरा से। लेकिन उनका मुख्य फोकस शिक्षा और मानवीय मदद पर था।

उनके जाने से शाहाबाद का शिक्षा क्षेत्र और समाज सेवा का क्षेत्र खाली हो गया। परिवार, छात्र और समर्थकों में शोक की लहर है।

अरशद आज़मी साहब की जिंदगी एक मिसाल है, पढ़ाई, सेवा और सियासत को मिलाकर समाज को बेहतर बनाने की। इलियास आज़मी साहब की विरासत को उन्होंने आगे बढ़ाया। उनके काम याद रहेंगे, शाहाबाद के कॉलेज, मुंबई की समाज सेवा और गरीबों के लिए किए गए प्रयास।

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