धार्मिक नेताओं ने किया स्वागत–यूपी के मदरसों में आधार आधारित बायोमेट्रिक हाजिरी अनिवार्य

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नई व्यवस्था लागू होने के बाद मदरसों में शिक्षकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों की दैनिक उपस्थिति बायोमेट्रिक मशीन के माध्यम से दर्ज की जाएगी। इस फैसले को लेकर विभिन्न धार्मिक और सामाजिक संगठनों की सकारात्मक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। लखनऊ में इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के चेयरमैन मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे आवश्यक और सकारात्मक कदम बताया।
उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद ने राज्य के सभी मान्यता प्राप्त मदरसों में शिक्षकों, शिक्षणेतर कर्मचारियों तथा छात्र-छात्राओं की उपस्थिति दर्ज करने के लिए आधार-आधारित बायोमेट्रिक प्रणाली अनिवार्य कर दी है। इस संबंध में परिषद ने सभी जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए हैं।जमीयत हिमायतुल इस्लाम के अध्यक्ष मौलाना कारी अबरार जमाल ने भी इस निर्णय का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यदि सरकार चाहती है कि मदरसे केवल धार्मिक शिक्षा तक सीमित न रहें, बल्कि राष्ट्र निर्माण में भी सक्रिय भूमिका निभाएं, तो यह स्वागतयोग्य पहल है। उन्होंने कहा कि देश में राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करने के प्रयास किए जा रहे हैं और शैक्षणिक संस्थानों की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका है। मौलाना अबरार जमाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विचार का भी उल्लेख किया, जिसमें मुस्लिम बच्चों के एक हाथ में लैपटॉप और दूसरे हाथ में कुरान होने की बात कही गई थी। उन्होंने कहा कि इस सोच को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। उनके अनुसार, मदरसों में देशभक्ति की भावना को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए और विद्यार्थियों को राष्ट्रीय जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक बनाया जाना चाहिए।

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