(फजलुर्रहमान)
बांगरमऊ, उन्नाव।चिश्तिया सिलसिले की प्रसिद्ध दरगाह ‘खानकाहे सफविया’ सफीपुर शरीफ के साहबजादा और वारिसे मसनदे शाहे सफी, हजरत अफज़ाल मोहम्मद फारुकी सफवी ने इस्लाम की शिक्षाओं पर प्रकाश डालते हुए लोगों को एकता और भाईचारे का संदेश दिया है।
अपने संदेश में हजरत अफज़ाल मोहम्मद फारुकी सफवी ने जोर देकर कहा कि “इस्लाम बिना किसी भेदभाव के सबको बराबरी का हक देता है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि इस्लाम केवल इबादत का नाम नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी जीवन पद्धति है जो मानवीय मूल्यों, सामाजिक न्याय और आपसी सम्मान की बात करती है। हजरत ने खानकाह पर आए अकीदतमंदों को संबोधित करते हुए कहा कि इस्लाम की खासियत यही है कि यह मानवता के कल्याण को सर्वोपरि रखता है। उन्होंने कहा कि इस्लाम में ऊंच-नीच का कोई स्थान नहीं है। अल्लाह की नज़र में सभी इंसान बराबर हैं और यह धर्म समाज के हर वर्ग को समान अवसर और अधिकार प्रदान करता है। इस्लाम न केवल मुसलमानों, बल्कि हर इंसान के मान-सम्मान की रक्षा करने का उपदेश देता है। पड़ोसी के हक और इंसानियत की सेवा करना इस धर्म का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने बताया कि खानकाहे सफविया से हमेशा अमन और मोहब्बत का पैगाम दिया गया है। हजरत ने कहा कि जब हम एक-दूसरे के सम्मान को समझेंगे, तभी समाज में सच्ची शांति स्थापित होगी। हजरत अफज़ाल मोहम्मद फारुकी सफवी का यह संदेश ऐसे समय में अत्यंत महत्वपूर्ण है जब समाज को आपसी प्रेम और सद्भाव की सख्त आवश्यकता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे इस्लाम की सच्ची और शांतिप्रिय शिक्षाओं को अपने जीवन में उतारें और देश व समाज की उन्नति के लिए मिल-जुलकर काम करें। दखानकाह पर आने वाले हजारों जायरीन ने हजरत के इस संदेश का स्वागत किया और इसे समाज के लिए दिशा-निर्देश बताया। इस मौके पर उनके साथ खानकाहे सफविया के सज्जादा नशीन हजरत नवाजिश मोहम्मद फारूकी उर्फ समदी मियां सफ़वी भी मौजूद रहे।

