(रईस खान)
मास्टर हरमोहन दयाल कटियार जी का इस दुनिया से विदा हो जाना हम सभी के लिए अत्यंत दुखद और पीड़ादायक है। वह रविवार 14 जून को इंतकाल कर गए, सोमवार को उनकी अंतिम विदाई हुई। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन शिक्षा के प्रसार और समाज की सेवा के लिए समर्पित कर दिया। बांगरमऊ के सुभाष इंटर कॉलेज में अपने लंबे शिक्षण कार्यकाल के दौरान उन्होंने हजारों विद्यार्थियों के जीवन को दिशा दी और उन्हें सफल नागरिक बनने की प्रेरणा प्रदान की। उनकी छवि बहुत कठोर अनुशासन वाले मास्टर की थी।
इसके साथ ही उन्होंने अपने गांव ताजपुर , मुर्तजापुर में फूलमती देवी विद्यालय मंदिर नाम से जूनियर विद्यालय की स्थापना की। जब तक विद्यालय का संचालन उनके हाथों में रहा, शिक्षा का स्तर उत्कृष्ट बना रहा। उनके मार्गदर्शन में पढ़े अनेक छात्र आज चिकित्सा, शिक्षा, प्रशासन, कानून तथा अन्य विभिन्न क्षेत्रों में सफलता प्राप्त कर समाज की सेवा कर रहे हैं।
सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्होंने समाज सेवा का कार्य नहीं छोड़ा। वे होमगार्ड टीम इंचार्ज के रूप में सक्रिय रहे और उनके नेतृत्व में अनेक लोगों ने होमगार्ड सेवा में कार्य किया। वे अपने अनुशासन, परिश्रम और शारीरिक फिटनेस के लिए भी प्रसिद्ध थे। प्रतिदिन सुबह चार बजे उठकर लंबी दौड़ लगाना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था। वे युवाओं को स्वस्थ जीवन, अनुशासन और मेहनत के लिए निरंतर प्रेरित करते रहते थे।
वे दो पुत्रों अक्षय और अमित के गौरवान्वित पिता थे। अक्षय लखनऊ में अधिवक्ता हैं जबकि अमित सरकारी सेवा में कार्यरत हैं। अपने जीवन के अंतिम समय तक वे गांव और समाज के लोगों से जुड़े रहे। उनसे मिलने-जुलने और उनके अनुभव सुनने का सौभाग्य मुझे भी प्राप्त हुआ। वे हमेशा स्नेह, आत्मीयता और अपनत्व से सभी का मार्गदर्शन करते थे।
वह न सिर्फ हमारे गुरु रहे बल्कि संरक्षक भी थे। ताजपुर में प्राइमरी और जूनियर स्कूल की शिक्षा हासिल करना उसके बाद 84 से ताजपुर में चक्की के बिजनेस से लेकर मुंबई आने के पहले उनसे लगातार मिलना जुलना रहता था।
आज उनका हमारे बीच न होना एक ऐसी क्षति है जिसकी भरपाई संभव नहीं है। उनके व्यक्तित्व, कर्तव्यनिष्ठा, समाज सेवा और शिक्षा के प्रति समर्पण को सदैव याद किया जाएगा। हमारे मन में उनके प्रति जो सम्मान था, वह हमेशा बना रहेगा।

