अकीदत व एहतराम के साथ मनाएं मोहर्रम, कर्बला के शहीदों की कुर्बानी इंसानियत का पैगाम:- मौलाना इब्राहिम अब्र

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(फजलुर्रहमान)

​गंजमुरादाबाद, उन्नाव। कस्बे की मशहूर और ऐतिहासिक खानकाह दरगाह फजले रहमाँ की बड़ी मस्जिद के पेश इमाम मौलाना इब्राहिम अब्र ने मोहर्रम के मुकद्दस मौके पर अकीदतमंदों को संबोधित किया। अपने विशेष खिताब में उन्होंने कर्बला के मैदान में हक और इंसानियत के लिए अपनी जान कुर्बान करने वाले हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की शहादत की रोंगटे खड़े कर देने वाली दास्तान बयां की। उन्होंने लोगों से अपील की कि मोहर्रम के इस महीने को पूरी शिद्दत, अकीदत (श्रद्धा) और एहतराम (सम्मान) के साथ शांतिपूर्ण तरीके से मनाएं।

​ बड़ी मस्जिद में नमाज के बाद हाजिर हुए अकीदतमंदों के मजमे को संबोधित करते हुए मौलाना इब्राहिम अब्र ने कहा कि कर्बला की जंग महज एक सियासी जंग नहीं थी, बल्कि वह हक (सत्य) और बातिल (असत्य) के बीच का एक ऐसा ऐतिहासिक मुकाबला था, जिसने दुनिया को इंसानियत और सब्र (धैर्य) का सबसे बड़ा सबक सिखाया। ​मौलाना ने भावुक कर देने वाले अंदाज में बताया कि किस तरह यजीद के जुल्म और तानाशाही के खिलाफ हजरत मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने झुकने से साफ इनकार कर दिया था। उन्होंने सत्य की रक्षा के लिए अपने छह महीने के मासूम बेटे अली असगर समेत पूरे परिवार और 72 जांबाज साथियों को कुर्बान कर दिया, लेकिन जुल्म के आगे सिर नहीं झुकाया।

​”इमाम हुसैन ने तख्त-ओ-ताज के लिए नहीं, बल्कि पूरी इंसानियत की भलाई और दीन की हिफाजत के लिए अपनी और अपने अपनों की कुर्बानी दी। कर्बला की तपती रेत पर दिया गया उनका यह बलिदान हमें सिखाता है कि चाहे परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, हमें हमेशा सच्चाई और न्याय की राह पर डटे रहना चाहिए।” ​मौलाना इब्राहिम ने कस्बे और आसपास के क्षेत्र के लोगों से गुजारिश की कि वे मोहर्रम के दौरान किसी भी प्रकार के दिखावे या हुल्लड़बाजी से दूर रहें। उन्होंने कहा कि यह गम और इबादत का महीना है। इसे ज्यादा से ज्यादा इबादत करने, गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करने, प्यासों को पानी पिलाने और इमाम हुसैन के बताए रास्ते पर चलने का संकल्प लेकर मनाया जाना चाहिए। ​खिताब के अंत में खानकाह दरगाह फजले रहमाँ की बड़ी मस्जिद में मुल्क की तरक्की, आपसी भाईचारे, अमन-चैन और खुशहाली के लिए विशेष दुआ की गई। इस मौके पर गंजमुरादाबाद और आसपास के क्षेत्रों से आए बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे, जिनकी आंखें कर्बला के शहीदों की दास्तान सुनकर नम हो गईं।

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