देश में अघोषित आपातकाल जैसे हालात, लोकतंत्र पर खतरा: मौलाना अरशद मदनी

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जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कहा है कि देश के मौजूदा हालात बेहद चिंताजनक हैं। उनका आरोप है कि संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर किया जा रहा है तथा अल्पसंख्यकों, खासकर मुसलमानों के साथ भेदभाव का माहौल बनाया जा रहा है।

उत्तराखंड में आयोजित जमीयत उलेमा-ए-हिंद की प्रांतीय कार्यकारिणी के सम्मेलन के बाद मीडिया से बातचीत में मौलाना मदनी ने दावा किया कि देश में अघोषित आपातकाल जैसे हालात हैं। उन्होंने कहा कि कानून का राज कमजोर हो रहा है और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव बढ़ रहा है।

उन्होंने बुलडोजर कार्रवाई पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि कानून और अदालत की प्रक्रिया का पालन किए बिना किसी के घर, दुकान या धार्मिक स्थल को गिराना संविधान की भावना के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि न्याय का फैसला अदालतों को करना चाहिए, न कि सरकारों को।

मौलाना मदनी ने कहा कि आजादी की लड़ाई में मदरसों और उलेमा का अहम योगदान रहा है, लेकिन आज उन्हीं संस्थानों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि मुसलमानों से देशभक्ति का प्रमाण मांगा जा रहा है, जबकि उनके अनुसार आजादी की लड़ाई में मुस्लिम समाज ने बड़ी कुर्बानियां दी थीं।

उन्होंने बताया कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने देशभर में “हिंदू-मुस्लिम एकता अभियान” चलाने का फैसला किया है। इस अभियान के तहत विभिन्न राज्यों में सामाजिक सद्भाव, धार्मिक सहिष्णुता और भाईचारे को बढ़ावा देने के लिए छोटे-बड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में सभी धर्मों के प्रमुख लोगों को आमंत्रित किया जाएगा और इन्हें पूरी तरह गैर-राजनीतिक रखा जाएगा।

मौलाना मदनी ने कहा कि देश की बहुसंख्यक आबादी आज भी प्रेम, भाईचारे और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व में विश्वास रखती है। उन्होंने लोगों से नफरत का जवाब नफरत से नहीं, बल्कि अच्छे व्यवहार, धैर्य और शांति से देने की अपील की।

उन्होंने हिंदू समाज से भी समाज को बांटने वाली ताकतों का विरोध करने का आग्रह करते हुए कहा कि देश आपसी सम्मान, प्रेम और भाईचारे से मजबूत बनता है।

क़ौमी फ़रमान डिजिटल मीडिया नेटवर्क

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