(गोंडा से क़ौफ़ ब्यूरो)
अगर कभी बाढ़, भूकंप या किसी बड़ी आपदा में मोबाइल और इंटरनेट पूरी तरह ठप हो जाएं, तब लोगों तक संदेश कैसे पहुंचे? इसका जवाब है हैम रेडियो। इसी महत्वपूर्ण तकनीक से लोगों को परिचित कराने के लिए शनिवार को एलबीएस डिग्री कॉलेज स्थित रेडियो अवध एवं अवध हैम रेडियो क्लब की ओर से जिला आपदा प्रबंधन अनुभाग, गोंडा के सहयोग से एक दिवसीय हैम रेडियो ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में लखनऊ से आए हैम रेडियो विशेषज्ञ मनोज बाजपेयी ने प्रतिभागियों को बताया कि हैम रेडियो आपदा और आपातकाल के समय सबसे भरोसेमंद संचार माध्यम साबित होता है। जब मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट काम करना बंद कर देते हैं, तब भी हैम रेडियो के जरिए दूर-दूर तक संपर्क बनाया जा सकता है। उन्होंने हैम रेडियो की तकनीक, संचालन और उपयोग से जुड़ी कई रोचक जानकारियां साझा कीं और प्रतिभागियों के सवालों के जवाब भी दिए।
जिला आपदा विशेषज्ञ राजेश कुमार ने कहा कि आपदा प्रबंधन में हैम रेडियो की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कार्यक्रम में शामिल सभी लोगों का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम के संयोजक मो. ज़ुबैर ने बताया कि गोंडा में पहली बार इस तरह का ओरिएंटेशन आयोजित किया गया, जिसे लोगों ने काफी पसंद किया। कई प्रतिभागियों ने हैम रेडियो का लाइसेंस लेने में भी रुचि दिखाई। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में स्कूलों और कॉलेजों में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि छात्र-छात्राएं इस उपयोगी तकनीक से परिचित हो सकें।
कार्यक्रम में सीआईए, ब्राह्मी फाउंडेशन और आपदा मित्रों के प्रतिनिधियों सहित बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया।
क्या है हैम रेडियो?
हैम रेडियो एक लाइसेंस प्राप्त वायरलेस संचार प्रणाली है, जिसके जरिए बिना मोबाइल और इंटरनेट के भी देश-विदेश के लोगों से संपर्क किया जा सकता है। आपदा के समय यह जीवनरक्षक संचार माध्यम साबित होता है। भारत में इसका संचालन करने के लिए दूरसंचार विभाग की परीक्षा पास करने के बाद लाइसेंस लेना आवश्यक होता है।

