विसाल– मशहूर इस्लामी आलिम मौलाना सैयद सलमान हुसैनी नदवी का इंतिकाल, इल्मी दुनिया में शोक की लहर

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   (रईस खान)

लखनऊ में मुल्क के मशहूर इस्लामी आलिम, दाई-ए-इस्लाम, मुफक्किर, मुसन्निफ और दारुल उलूम नदवतुल उलमा के पूर्व डीन हज़रत मौलाना सैयद सलमान हुसैनी नदवी रहमतुल्लाह अलैह का सोमवार सुबह इंतिकाल हो गया। वह 72 वर्ष के थे और पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उनका विसाल लखनऊ के दुबग्गा इलाके स्थित उनके निवास पर फज्र की नमाज़ से पहले हुआ। इस खबर के सामने आते ही पूरे देश और विदेश के उलेमा, तलबा, अकीदतमंदों और सामाजिक हस्तियों में गहरा गम फैल गया।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

इल्म, दावत और तालीम की बड़ी शख्सियत

मौलाना सलमान हुसैनी नदवी का ताल्लुक एक नामवर इल्मी और दीनी खानदान से था। उनका नसब हज़रत इमाम हुसैन रज़ियल्लाहु अन्हु से जुड़ता है। वह मशहूर इस्लामी विद्वान हज़रत मौलाना अबुल हसन अली हसनी नदवी (अली मियाँ) रहमतुल्लाह अलैह के करीबी रिश्तेदार और उनके खास शागिर्दों में शुमार किए जाते थे। बचपन में ही उन्होंने कुरआन मजीद हिफ्ज़ किया और दारुल उलूम नदवतुल उलमा, लखनऊ से दीनी तालीम हासिल की। बाद में उन्होंने हदीस और इस्लामी उलूम में आला तालीम भी प्राप्त की।

कई अहम जिम्मेदारियां निभाईं

मौलाना साहब ने अपनी जिंदगी का बड़ा हिस्सा तालीम, दावत और इस्लामी रिसर्च के लिए वक्फ कर दिया। उन्होंने दारुल उलूम नदवतुल उलमा में फैकल्टी ऑफ दावत के डीन के रूप में लंबे समय तक खिदमात अंजाम दीं। इसके अलावा वह डॉक्टर अब्दुल अली यूनानी मेडिकल कॉलेज के चेयरमैन, दारुल उलूम सैयद अहमद शहीद कटोली के चांसलर तथा जमीअत शबाबुल इस्लाम के प्रेसिडेंट भी रहे। उन्होंने देश में कई तालीमी और समाजी इदारों की तामीर और तरक्की में अहम भूमिका निभाई।

अरबी-उर्दू के मशहूर मुसन्निफ

मौलाना सलमान नदवी अरबी और उर्दू के बेहतरीन लेखक भी थे। उन्होंने इस्लामी उलूम, हदीस, तफ्सीर, सीरत और दावत पर अनेक किताबें लिखीं। उनकी तकरीरें और बयानात भारत ही नहीं बल्कि खाड़ी देशों, यूरोप और दूसरे मुल्कों में भी बड़े शौक से सुने जाते थे। उनकी इल्मी गहराई और आसान अंदाज़-ए-बयान ने उन्हें खास मकाम दिलाया।

अमन और बातचीत के हामी

मौलाना सलमान नदवी उन चुनिंदा इस्लामी विद्वानों में रहे जिन्होंने अयोध्या मसले पर बातचीत और आपसी रजामंदी के जरिए हल निकालने की वकालत की। उन्होंने हमेशा मुल्क में अमन, भाईचारा, सांप्रदायिक सद्भाव और आपसी समझदारी पर जोर दिया। उनके इस नजरिए पर देशभर में व्यापक चर्चा हुई थी।

जनाज़े में उमड़ा अकीदतमंदों का हुजूम

उनके इंतिकाल की खबर मिलते ही लखनऊ समेत देश के अलग-अलग हिस्सों से उलेमा, तलबा, समाजी रहनुमा और हजारों अकीदतमंद उनके आखिरी दीदार के लिए पहुंचे। विभिन्न दीनी और समाजी तंजीमों ने गहरे दुख का इजहार करते हुए इसे उम्मत और इल्मी दुनिया का बड़ा नुकसान बताया। जनाज़े और तदफीन में बड़ी तादाद में लोगों की शिरकत की उम्मीद जताई गई।

इल्मी दुनिया का बड़ा नुकसान

मौलाना सलमान हुसैनी नदवी का इंतिकाल सिर्फ एक आलिम की मौत नहीं, बल्कि एक ऐसे दाई, मुसन्निफ और मुहक्किक की रुख्सती है जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी इल्म, दीन, तालीम और इंसानियत की खिदमत में गुजार दी। उनकी किताबें, तकरीरें और तालीमी खिदमात हमेशा याद रखी जाएंगी।

अल्लाह तआला मरहूम की मग़फिरत फरमाए, उनकी क़ब्र को नूर से भर दे, जन्नतुल फिरदौस में आला मकाम अता फरमाए और उनके अहले खाना, तलबा और चाहने वालों को सब्र-ए-जमील अता फरमाए। आमीन।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।

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