पुलिस कार्रवाई और छात्रों पर दर्ज एफआईआर रद्द करने की यूनाइटेड अगेंस्ट इनजस्टिस एंड डिस्क्रिमिनेशन की मांग

Date:

                   (निहाल सगीर)
मुंबई: देशभर में, विशेषकर मुंबई में हाल के छात्र और युवा आंदोलनों के दौरान पुलिस हिंसा, गैरकानूनी हिरासत, मीडिया के एकतरफा रवैये और सरकार व प्रशासन की उदासीनता के खिलाफ “यूनाइटेड अगेंस्ट इनजस्टिस एंड डिस्क्रिमिनेशन” के बैनर तले एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस का उद्देश्य छात्रों पर हुए कथित अत्याचारों को सामने लाना, लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की मांग करना तथा सरकार और प्रशासन की जवाबदेही तय करना था।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधियों, वकीलों, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा आंदोलन में शामिल छात्रों और साथियों ने भाग लिया और अपने विचार व्यक्त किए।
प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत करते हुए शाकिर शेख ने 25 जुलाई और उसके बाद की घटनाओं का उल्लेख करते हुए पुलिस के रवैये की आलोचना की।
पुलिस कार्रवाई और “ज़ीरो पुलिस” पर सवाल
उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने छात्रों को तितर-बितर करने के लिए विशेष रूप से तैयार की गई कीलदार लाठियों का इस्तेमाल किया, जो पुलिस के निर्धारित नियमों के विरुद्ध है। उनका कहना था कि कार्रवाई के दौरान पुरुष और महिला छात्रों में कोई भेद नहीं किया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस के साथ कुछ ऐसे लोग भी मौजूद थे जो पुलिसकर्मी नहीं थे और प्रशासन के इशारे पर कानून अपने हाथ में ले रहे थे।
शाकिर शेख ने कहा कि इतनी सख्त कार्रवाई और उकसावे के बावजूद छात्रों ने धैर्य और संयम बनाए रखा तथा महात्मा गांधी के अहिंसा के सिद्धांत का पालन किया।
आम नागरिकों की एकजुटता
उन्होंने मोहम्मद इरफान जैसे आम नागरिक का उल्लेख किया, जिन्होंने पुलिस द्वारा छात्रों को वैन में ले जाते समय तेज बारिश के बावजूद लगभग 40 मिनट तक पुलिस वाहन को रोककर विरोध दर्ज कराया।
उम्मीद का संदेश
उन्होंने कहा कि 25 जुलाई की घटना ने संघर्ष की एक नई शुरुआत की है।
आंदोलन का उद्देश्य
प्रदर्शनकारी छात्रों की ओर से बोलते हुए कामरेड आमिर ने आंदोलन की शुरुआत, उसके उद्देश्यों और प्रशासन के रवैये पर विस्तार से प्रकाश डाला।
मीडिया की भूमिका पर सवाल
उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर और अन्य स्थानों पर जब विभिन्न धर्मों और समुदायों के छात्र एकजुट होकर आंदोलन कर रहे थे, तब मीडिया के एक वर्ग ने उसे नकारात्मक और सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की।
सरकार की उदासीनता
उन्होंने कहा कि दिल्ली और मुंबई में सरकार तथा गृह मंत्रालय के कार्यालय आंदोलन स्थल से कुछ ही दूरी पर थे, लेकिन छात्रों की आवाज़ को गंभीरता से नहीं लिया गया।
छात्रों की एकजुट पहचान
उन्होंने कहा कि छात्र किसी धर्म या जाति के आधार पर नहीं, बल्कि छात्र होने के नाते एकजुट हुए। उन्होंने केवल NEET परीक्षा की अनियमितताओं पर ही नहीं बल्कि पूरे शिक्षा और राजनीतिक व्यवस्था की जवाबदेही पर सवाल उठाए।
आंदोलन का क्रम
6 जुलाई को AISF के बैनर तले पहला प्रदर्शन हुआ।
9 जुलाई को मुंबई विश्वविद्यालय के बाहर प्रदर्शन किया गया, जहां छात्रों को हिरासत में लिया गया।
16 जुलाई को आज़ाद मैदान में साढ़े तीन हजार से अधिक छात्र बिना किसी राजनीतिक दल के बैनर के एकत्र हुए, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि यह युवाओं का स्वतःस्फूर्त आंदोलन था।
पुलिस कार्रवाई और चोटें
कामरेड आमिर ने बताया कि पुलिस द्वारा धक्का-मुक्की और बल प्रयोग के कारण उनकी रीढ़ की हड्डी के L4, L5 और S1 हिस्सों में गंभीर चोटें आईं। उन्होंने आरोप लगाया कि तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के बजाय उन्हें विभिन्न पुलिस थानों में ले जाया गया।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आंदोलन समाप्त होने के बाद भी पुलिस छात्रों को फोन कर उनकी लाइव लोकेशन मांग रही है और उन्हें परेशान किया जा रहा है।
कानूनी पहलू
प्रसिद्ध अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता एडवोकेट लारा जस्सानी ने लोकतांत्रिक अधिकारों और कानूनी पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मुंबई में लगभग पूरे वर्ष धारा 144 और मुंबई पुलिस अधिनियम की धारा 37 के तहत निषेधाज्ञा लागू रहती है। इसके कारण पांच से अधिक लोगों के एकत्र होने पर रोक लग जाती है और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का संवैधानिक अधिकार प्रभावित होता है।
उन्होंने कहा कि इससे पुलिस को “गैरकानूनी जमावड़ा” बताकर एफआईआर दर्ज करने का अवसर मिल जाता है।
एफआईआर वापस लेने की मांग
उन्होंने कहा कि कुछ राज्यों ने छात्रों पर दर्ज मामलों को वापस लेने की दिशा में कदम उठाए हैं, लेकिन महाराष्ट्र सरकार ने अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की है।
उन्होंने यह भी बताया कि विभिन्न पुलिस थानों से छात्रों को धारा 144 और 41A के नोटिस भेजे जा रहे हैं और दो दिन के भीतर थाने में उपस्थित होने के निर्देश दिए जा रहे हैं।
उनका कहना था कि यह केवल एक परीक्षा का मुद्दा नहीं बल्कि शिक्षा के निजीकरण, व्यवसायीकरण और संस्थानों के कमजोर होने का परिणाम है।
उन्होंने मुंबई में लोकतांत्रिक स्थानों की रक्षा के लिए जनहित याचिका (PIL) सहित कानूनी कार्रवाई की आवश्यकता पर भी बल दिया।
पुलिस कार्रवाई का एक और आरोप
ओवैस ने कहा कि प्रेस क्लब के पास मेट्रो गेट और बस स्टॉप के पीछे फुटपाथ पर मात्र 15-20 लोग शांतिपूर्वक नारे लगा रहे थे, लेकिन पुलिस ने तुरंत उन्हें हिरासत में ले लिया।
उन्होंने कहा कि एक बार एफआईआर दर्ज हो जाने के बाद, जब तक अदालत या सरकार उसे निरस्त नहीं करती, तब तक संबंधित लोगों को कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
मौलाना ज़हीर अब्बास रिज़वी का संबोधन
मौलाना ज़हीर अब्बास रिज़वी ने छात्रों के साहस की सराहना करते हुए सरकार और मीडिया की आलोचना की।
उन्होंने एक करोड़ रुपये के मुआवज़े की घोषणाओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी इंसान की जान की कीमत पैसे से नहीं लगाई जा सकती।
उन्होंने कहा कि छात्र केवल किसी के बेटे-बेटी नहीं, बल्कि देश की सबसे बड़ी पूंजी हैं। यदि शिक्षा और युवाओं का भविष्य सुरक्षित नहीं रहेगा तो देश आगे नहीं बढ़ सकता।
उन्होंने मीडिया के एक वर्ग के रवैये की आलोचना करते हुए कहा कि दुनिया के कई देशों में छात्रों और जनता के आंदोलनों ने सरकारों को जवाबदेह बनाया है।
प्रमुख मांगें
छात्रों और प्रदर्शनकारियों को फोन कर उनकी लाइव लोकेशन मांगने तथा बिना कारण थानों में बुलाकर परेशान करने की कार्रवाई तुरंत बंद की जाए।
आंदोलन के दौरान छात्रों पर दर्ज सभी एफआईआर और मुकदमे बिना किसी शर्त के वापस लिए जाएं।
मुंबई में पूरे वर्ष लागू रहने वाले निषेधाज्ञा आदेशों (धारा 144) की समीक्षा कर नागरिकों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन का संवैधानिक अधिकार सुनिश्चित किया जाए।
NEET सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं का स्थायी समाधान निकाला जाए तथा शिक्षा के निजीकरण और व्यवसायीकरण पर रोक लगाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग, कीलदार लाठियों के इस्तेमाल तथा कथित गैरकानूनी हिरासत की उच्चस्तरीय एवं न्यायिक जांच कराई जाए।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_img

पॉपुलर

और देखे
और देखे

खिराज़ ए अक़ीदत– देश के सबसे बुज़ुर्ग और ईमानदार विधायक आलम बादी आज़मी का इंतकाल

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन। उत्तर प्रदेश की राजनीति...

जौहर यूनिवर्सिटी को गिराने के प्रस्तावित मामले को लेकर महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन

मुंबई(शिब्ली रामपुरी) उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री और समाजवादी...