इंटीग्रल यूनिवर्सिटी में एमएसएमइ आइडिया हैकाथॉन 6.0 ने नवजवानों को दिया अपने ख़्वाबों को हक़ीक़त बनाने का मंच
(रईस खान )
लखनऊ की इंटीग्रल यूनिवर्सिटी में पिछले दिनों कुछ ऐसा माहौल था, जहाँ सिर्फ किताबों और क्लासरूम की बातें नहीं हो रही थीं, बल्कि नौजवान दिमाग़ अपने ख़्वाबों, तजुर्बों और नए आइडियाज़ के साथ भारत के मुस्तक़बिल की तस्वीर बनाने में मशगूल थे।
मौका था एमएसएमइ आइडिया हैकाथॉन 6.0 के आइडिया शोकेसिंग और स्क्रीनिंग कार्यक्रम का, जिसका आयोजन 18 से 24 अगस्त 2026 तक इंटीग्रल यूनिवर्सिटी के प्रशासनिक भवन स्थित बोर्ड रूम में किया गया। इस दौरान छात्रों और नए इनोवेटर्स ने अपने ऐसे आइडियाज़ पेश किए, जो आने वाले दिनों में कारोबार, टेक्नोलॉजी और समाज की मुश्किलों का हल बन सकते हैं।
यह कार्यक्रम इंटीग्रल स्टार्टअप्स फाउंडेशन–सेंटर फॉर इन्क्यूबेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट की जानिब से आयोजित किया गया।
एक आइडिया… और बदल सकती है ज़िंदगी
आज का दौर सिर्फ नौकरी तलाश करने का नहीं, बल्कि नए मौके पैदा करने का दौर है। एक अच्छा आइडिया अगर सही रहनुमाई, टेक्निकल मदद और आर्थिक सहयोग हासिल कर ले तो वह एक छोटे से ख़याल से निकलकर बड़ा कारोबार और कामयाब स्टार्टअप बन सकता है।
इसी सोच के साथ सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय ने “विकसित भारत @2047” के विज़न के तहत एमएसएमइ आइडिया हैकाथॉन शुरू किया है। इसका मकसद देश के नौजवानों के अंदर छुपी सलाहियतों को सामने लाना और उनके नए विचारों को हक़ीक़त में बदलने का रास्ता तैयार करना है।
इस हैकाथॉन में खास तौर पर रिन्यूएबल एनर्जी, एनर्जी एफिशिएंसी, इंडस्ट्री 4.0 और 5.0, रोबोटिक्स, ऑटोमेशन, ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी और दूसरी नई फ्रंटियर टेक्नोलॉजीज़ से जुड़े आइडियाज़ को अहमियत दी जा रही है।
सबसे अहम बात यह है कि चुने गए बेहतर विचारों को हर स्वीकृत आइडिया के लिए 15 लाख रुपये तक की आर्थिक मदद मिलने का मौका है। इसके अलावा मेंटरशिप, इन्क्यूबेशन और आइडिया को एक कामयाब स्टार्टअप में बदलने के लिए ज़रूरी रहनुमाई भी दी जाएगी।
173 आइडियाज़, लेकिन मंज़िल की तरफ बढ़े 40
इंटीग्रल यूनिवर्सिटी में आयोजित स्क्रीनिंग प्रक्रिया आसान नहीं थी। यहाँ सिर्फ आइडिया सुनकर फैसला नहीं किया गया, बल्कि हर विचार को अलग-अलग पहलुओं से परखा गया।
करीब 173 आइडियाज़ विशेषज्ञों के सामने पेश किए गए। इनमें टेक्नोलॉजी, इंडस्ट्री, फाइनेंस और अलग-अलग थीम से जुड़े नए समाधान शामिल थे।
इन विचारों का गहराई से जायज़ा लेने के बाद विशेषज्ञ पैनल ने 40 आइडियाज़ को आगे की प्रक्रिया के लिए शॉर्टलिस्ट किया।
यह चयन प्रक्रिया कई मायनों में खास रही क्योंकि इसमें अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल थे। स्क्रीनिंग के लिए 5 बाहरी इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स, एक फाइनेंस एक्सपर्ट, 9 टेक्निकल एक्सपर्ट्स और 8 थीम एक्सपर्ट्स ने अपनी विशेषज्ञता का इस्तेमाल किया।
इस बहुआयामी मूल्यांकन का फायदा यह हुआ कि प्रतिभागियों को सिर्फ नंबर या रिजल्ट नहीं मिला, बल्कि अपने आइडिया को और बेहतर बनाने के लिए उपयोगी मशवरे भी हासिल हुए।
यूनिवर्सिटी अब सिर्फ डिग्री का नाम नहीं
भारत में उच्च शिक्षा का चेहरा तेजी से बदल रहा है। पहले यूनिवर्सिटी का मतलब सिर्फ डिग्री हासिल करना और फिर नौकरी तलाश करना माना जाता था। लेकिन अब विश्वविद्यालयों में स्टार्टअप, इनोवेशन, रिसर्च और एंटरप्रेन्योरशिप की एक नई तहज़ीब पैदा हो रही है।
इंटीग्रल यूनिवर्सिटी का यह कार्यक्रम इसी बदलते हुए दौर की एक अहम मिसाल है।
एक स्वीकृत होस्ट इंस्टीट्यूशन के तौर पर इंटीग्रल यूनिवर्सिटी ने ऑफिस ऑफ द डेवलपमेंट कमिश्नर, एमएसएमइ के सहयोग से इस पहल को आगे बढ़ाया। विश्वविद्यालय के इंटीग्रल स्टार्टअप्स फाउंडेशन–सेंटर फॉर इन्क्यूबेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट ने छात्रों और इनोवेटर्स को एक ऐसा मंच दिया, जहाँ वे सिर्फ अपने आइडिया पेश नहीं कर सके, बल्कि एक्सपर्ट्स के सामने अपनी सोच का इम्तिहान भी दे सके।
डॉ. निदा फातिमा की रहनुमाई में नई सोच को परवाज़
इस पूरे कार्यक्रम को डॉ. निदा फातिमा, एडिशनल प्रो चांसलर, इंटीग्रल यूनिवर्सिटी एवं एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, इंटीग्रल स्टार्टअप्स फाउंडेशन की रहनुमाई में आयोजित किया गया।
किसी भी इनोवेशन इकोसिस्टम को मजबूत बनाने के लिए सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर काफी नहीं होता। जरूरत होती है ऐसी लीडरशिप की, जो नौजवानों की नई सोच पर भरोसा करे और उन्हें आगे बढ़ने के लिए हौसला दे। इस पहल की कामयाबी में उनका दूरदर्शी मार्गदर्शन अहम रहा।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ. नूर आलम खान, इन्क्यूबेशन मैनेजर, इंटीग्रल स्टार्टअप्स फाउंडेशन–सेंटर फॉर इन्क्यूबेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट एवं एसोसिएट प्रोफेसर, इंटीग्रल बिजनेस स्कूल और उनकी समर्पित टीम की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। टीम ने प्रतिभागियों के समन्वय से लेकर स्क्रीनिंग, एक्सपर्ट इंटरेक्शन और कार्यक्रम के सुचारु संचालन तक जिम्मेदारी के साथ काम किया।
नौजवानों को चाहिए सिर्फ एक सही मौका
भारत दुनिया का सबसे युवा देशों में से एक है। यहां लाखों नौजवान ऐसे हैं जिनके पास समस्याओं को देखने का एक अलग नजरिया है। कोई खेती की मुश्किल का हल ढूंढ रहा है, कोई ऊर्जा बचाने की तकनीक पर काम कर रहा है, कोई रोबोटिक्स के जरिए इंडस्ट्री को बेहतर बनाना चाहता है, तो कोई डिजिटल टेक्नोलॉजी के सहारे समाज की किसी पुरानी समस्या का नया हल पेश कर रहा है।
लेकिन अक्सर अच्छे आइडियाज़ सिर्फ इसलिए खत्म हो जाते हैं क्योंकि उन्हें सही प्लेटफॉर्म नहीं मिलता।
एमएसएमइ आइडिया हैकाथॉन जैसे कार्यक्रम इसी खाई को भरने का काम करते हैं। यहाँ एक छात्र या नया इनोवेटर अपने छोटे से आइडिया को एक्सपर्ट्स के सामने रख सकता है और उसे एक बड़े प्रोजेक्ट में तब्दील करने की दिशा में आगे बढ़ सकता है।
आइडिया से स्टार्टअप और स्टार्टअप से आत्मनिर्भर भारत
“आत्मनिर्भर भारत” सिर्फ एक नारा नहीं है। इसका असली मतलब तब पूरा होगा जब देश के नौजवान सिर्फ रोजगार लेने वाले नहीं, बल्कि रोजगार पैदा करने वाले बनेंगे।
इसके लिए जरूरी है कि कॉलेज और यूनिवर्सिटी में मौजूद प्रतिभा को पहचाना जाए। रिसर्च को मार्केट से जोड़ा जाए और नए आइडियाज़ को फाइलों में बंद रहने के बजाय उद्योग और समाज तक पहुंचाया जाए।
इंटीग्रल यूनिवर्सिटी में एमएसएमइ आइडिया हैकाथॉन 6.0 का आयोजन इसी सोच को मजबूत करता है।
यह कार्यक्रम सिर्फ 173 आइडियाज़ की स्क्रीनिंग या 40 आइडियाज़ के चयन तक सीमित नहीं है। इसके पीछे एक बड़ा पैग़ाम है, अगर नौजवानों को सही रहनुमाई, संसाधन और भरोसा दिया जाए तो उनके आइडियाज़ भारत के मुस्तक़बिल को बदल सकते हैं।
“विकसित भारत @2047” की तरफ एक कदम
भारत जब 2047 में आज़ादी के 100 साल पूरे करेगा, तब देश कैसा होगा? यह सवाल सिर्फ सरकारों या बड़ी कंपनियों के सामने नहीं है, बल्कि आज के छात्रों और नौजवानों के सामने भी है।
कल का विकसित भारत उन्हीं नए विचारों से बनेगा, जो आज किसी यूनिवर्सिटी के बोर्ड रूम, लैब या छोटे से इनोवेशन सेंटर में जन्म ले रहे हैं।
रिन्यूएबल एनर्जी से लेकर रोबोटिक्स तक, ऑटोमेशन से लेकर इंडस्ट्री 5.0 तक, दुनिया तेजी से बदल रही है। ऐसे में भारत के नौजवानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ इस बदलाव के साथ चलना नहीं, बल्कि बदलाव का नेतृत्व करना है।
इंटीग्रल यूनिवर्सिटी का एमएसएमइ आइडिया हैकाथॉन 6.0 इसी दिशा में एक अहम कोशिश है। यह पहल बताती है कि जब शिक्षा, उद्योग, सरकार और नौजवान प्रतिभाएं एक मंच पर आती हैं तो आइडियाज़ सिर्फ प्रेजेंटेशन बनकर नहीं रहते, बल्कि वे कल के कामयाब उद्यमों की बुनियाद बन सकते हैं।
173 आइडियाज़ में से 40 का आगे बढ़ना महज़ एक आंकड़ा नहीं है। यह उन सैकड़ों नौजवानों की उम्मीद का नाम है, जो अपने दिमाग़ में एक बेहतर भारत का ख़्वाब लेकर चल रहे हैं।
और शायद, इन्हीं में से कोई एक आइडिया आने वाले कल में भारत की एक बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनी, सफल स्टार्टअप या किसी गंभीर सामाजिक समस्या का कारगर हल बन जाए।

