(रईस खान)
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आज केंद्र सरकार की एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय की छापेमारी को राजनीतिक साजिश करार देते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर जमकर निशाना साधा। ‘बंगाल की शेरनी’ के नाम से मशहूर ममता ने ईडी की कार्रवाई को तृणमूल कांग्रेस की चुनावी रणनीति चुराने की कोशिश बताया और अमित शाह को ‘नॉटी और नास्टी होम मिनिस्टर’ कहकर लताड़ा। यह घटना तब हुई जब ईडी ने टीएमसी की पॉलिटिकल स्ट्रैटजी कंपनी I-PAC के दफ्तर और इसके चीफ प्रतीक जैन के घर पर छापेमारी की।
ममता बनर्जी ने छापेमारी की खबर मिलते ही प्रतीक जैन के आवास पर पहुंचकर धरना दिया और ईडी अधिकारियों को खरी-खरी सुनाई। उन्होंने आरोप लगाया कि ईडी टीएमसी की हार्ड डिस्क, उम्मीदवारों की लिस्ट और अन्य गोपनीय दस्तावेज चुराने आई है, ताकि आगामी विधानसभा चुनावों में बीजेपी को फायदा हो। “अगर बीजेपी हमें लोकतांत्रिक तरीके से नहीं हरा सकती, तो एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है,” ममता ने गुस्से में कहा। उन्होंने अमित शाह पर तंज कसते हुए पूछा, “क्या यह होम मिनिस्टर का काम है? इतने डरपोक और बेईमान कभी नहीं देखे।” ईडी का दावा है कि यह छापेमारी कोयला तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले से जुड़ी है, लेकिन ममता ने इसे ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ बताया।
ईडी ने कलकत्ता हाई कोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि ममता के पहुंचने के बाद राज्य पुलिस ने जांच में बाधा डाली और महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त कर लिए। एजेंसी का आरोप है कि छापेमारी शांतिपूर्ण थी, लेकिन मुख्यमंत्री की दखलअंदाजी से स्थिति बिगड़ी। वहीं, टीएमसी कार्यकर्ताओं ने पूरे बंगाल में विरोध प्रदर्शन किए, ईडी को ’बीजेपी की कठपुतली’ बताते हुए। कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने भी सवाल उठाया कि I-PAC टीएमसी के ‘आंख-कान’ की तरह काम करता है, लेकिन ईडी की कार्रवाई पर संदेह जताया।
यह विवाद केंद्र और राज्य सरकार के बीच बढ़ते टकराव को दर्शाता है। बीजेपी ने ममता पर जांच में हस्तक्षेप का आरोप लगाया है, जबकि टीएमसी ने इसे चुनाव पूर्व साजिश करार दिया। ममता के तीखे तेवर से बंगाल की राजनीति गर्मा गई है, और विशेषज्ञों का मानना है कि यह 2026 चुनावों पर असर डालेगा। ईडी ने कहा कि जांच ‘सबूत-आधारित’ है और किसी राजनीतिक दल को निशाना नहीं बनाया गया।

