जम्मू-कश्मीर के कटरा स्थित श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस में नीट परीक्षा पास करने वाले मुस्लिम छात्रों के एडमिशन को लेकर उठे विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने कॉलेज की एमबीबीएस कोर्स की मान्यता वापस ले ली है। विरोध करने वाले हिंदू संगठनों ने इसे अपनी जीत बताया है, जबकि विपक्षी दलों ने इसे सांप्रदायिक राजनीति का नतीजा करार दिया।
कॉलेज में 2025 – 26 सत्र के लिए 50 एमबीबीएस सीटों पर एडमिशन नीट मेरिट के आधार पर हुए थे, जिसमें 42-44 मुस्लिम छात्र,मुख्य रूप से कश्मीर से शामिल थे। ये छात्र यूनियन टेरिटरी के डोमिसाइल रिजर्वेशन, ८५ प्रतिशत सीटों के तहत चुने गए थे। विरोधकर्ताओं का दावा था कि कॉलेज माता वैष्णो देवी श्राइन के दान से बना है, इसलिए मुस्लिम छात्रों को एडमिशन नहीं मिलना चाहिए। श्री वैष्णो देवी संघर्ष समिति जिसमें आरएसएस और बीजेपी से जुड़े करीब ६० संगठनों का गठबंधन शामिल हैं, राष्ट्रीय बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद और बीजेपी कार्यकर्ताओं ने नवंबर 2025 से विरोध शुरू किया। उन्होंने मेरिट लिस्ट रद्द करने या सभी सीटें हिंदुओं के लिए रिजर्व करने की मांग की।
एनएमसी ने 6 जनवरी 2026 को एमबीबीएस कोर्स की लेटर ऑफ परमिशन वापस ली। आयोग ने न्यूनतम मानकों के उल्लंघन का हवाला दिया, जैसे फैकल्टी की 39 प्रतिशत कमी, रेजिडेंट डॉक्टर्स की 65 प्रतिशत कमी, क्लिनिकल मटेरियल की कमी, ओपीडी 50 प्रतिशत से कम, बेड ऑक्यूपेंसी 45 प्रतिशत जबकि 80 प्रतिशत जरूरी, लैब्स और लाइब्रेरी की कमी। विरोध के बाद शिकायतें आईं, जिससे सरप्राइज इंस्पेक्शन हुआ। कॉलेज प्रशासन का कहना है कि इंस्पेक्शन विंटर वेकेशन के दौरान हुआ, जब फैकल्टी छुट्टी पर थी। प्रभावित छात्रों को यूटी के अन्य कॉलेजों में सुपरन्यूमरेरी सीट्स पर एडजस्ट किया जाएगा।
विरोधकर्ताओं ने फैसले का जश्न मनाया। संघर्ष समिति के कन्वेनर सुकवीर मनकोटिया ने केंद्रीय गृह मंत्री और स्वास्थ्य मंत्री को धन्यवाद दिया। सनातन धर्म सभा के अध्यक्ष ने लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा की सराहना की। बीजेपी विधायक आरएस पठानिया ने कहा कि छात्रों को अन्य कॉलेजों में ट्रांसफर किया जाएगा।
विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी। नेशनल कॉन्फ्रेंस के महासचिव अली मुहम्मद सागर ने कहा कि शिक्षा एकजुट करनी चाहिए, न कि विभाजित। जावेद राना ने मेरिट पर जोर दिया और सांप्रदायिक विभाजन को खतरा बताया।
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता आदित्य गुप्ता ने इसे जम्मू के लिए झटका बताया, बीजेपी पर राजनीतिक फायदे के लिए धार्मिक ध्रुवीकरण का आरोप लगाया। मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला ने व्यंग्य किया कि जहां दूसरे राज्य नए मेडिकल कॉलेजों के लिए लड़ते हैं, जम्मू के लोग एक को बंद करने के लिए लड़े।
यह घटना जम्मू-कश्मीर में शिक्षा और सांप्रदायिक सद्भाव पर सवाल उठाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि मेरिट-बेस्ड एडमिशन पर धार्मिक आधार से चुनौती देने से एकता प्रभावित हो सकती है। एनएमसी ने धार्मिक मुद्दे को वजह नहीं बताया, लेकिन विरोध की टाइमिंग से यह राजनीतिक लग रही है।
~क़ौमी फरमान डिजिटल मीडिया नेटवर्क

