(फजलुर्रहमान)
बांगरमऊ, उन्नाव।समाज में शिक्षा के प्रसार और आपसी सौहार्द को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक विशेष मुलाकात के दौरान बांगरमऊ के शहरकाजी व ईदगाह के पेश इमाम, सुप्रसिद्ध शख्सियत हजरत सैयद जियाउल आरफीन साहब ने अत्यंत महत्वपूर्ण विचार साझा किए। उन्होंने वर्तमान दौर में दीन (धार्मिक) और दुनियावी (आधुनिक/व्यावहारिक) दोनों ही तरह की तालीम हासिल करने पर विशेष बल दिया है।
हजरत सैयद जियाउल आरफीन साहब ने कहा कि शिक्षा किसी भी कौम और समाज की तरक्की का सबसे मजबूत जरिया है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि आज के समय में शिक्षा बेहद जरूरी है। हमें अपने बच्चों को दुनियावी तालीम (स्कूली व तकनीकी शिक्षा) के साथ-साथ दीनी तालीम से भी सराबोर करना होगा, ताकि वे एक बेहतर इंसान और जिम्मेदार नागरिक बन सकें। उन्होंने इस बात पर भी विशेष जोर दिया कि केवल इस्लामी शिक्षा ग्रहण करना ही काफी नहीं है, बल्कि उस पवित्र शिक्षा में बताई गई अच्छी बातों को अपने व्यावहारिक जीवन में उतारना (अमल करना) भी बेहद जरूरी है। मुलाकात के दौरान शहरकाजी साहब ने नैतिक मूल्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जीवन में अदब (सम्मान) और तहजीब (संस्कृति/शिष्टता) का होना अनिवार्य है। बिना अदब के इंसान की शिक्षा अधूरी है। बड़ों का आदर करना, छोटों से स्नेह करना और सबके साथ शालीनता से पेश आना ही हमारी पहचान होनी चाहिए।
देश और समाज की एकता को सर्वोपरि बताते हुए हजरत सैयद जियाउल आरफीन साहब ने सभी वर्ग के लोगों से एक बेहद भावुक और जरूरी अपील की। उन्होंने कहा कि बांगरमऊ हमेशा से गंगा-जमुनी तहजीब और आपसी मोहब्बत का गवाह रहा है। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि वे अफवाहों पर ध्यान न देकर आपस में मिलजुलकर रहें और देश की प्रगति में अपना योगदान दें। उन्होंने अंत में कहा कि
”आपसी भाईचारा और मोहब्बत ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है। हमें मिलकर इस धागे को और मजबूत करना है।”

