(रईस खान)
फेडरेशन ऑफ महाराष्ट्र मुस्लिम्स ने राज्य में बढ़ रही सांप्रदायिकता और मुस्लिम विरोधी माहौल के बीच एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सभी वर्गों के मुसलमानों को एक मंच पर लाने और जरूरतमंद लोगों की समय पर मदद के लिए अपनी शाखाओं का विस्तार करने का फैसला किया है।
मुंबई के इस्लाम जिमखाना में आयोजित एक प्रतिनिधि बैठक में राज्य के कई विधायक, पूर्व न्यायाधीश, वकील, सामाजिक कार्यकर्ता और मस्जिदों के इमाम शामिल हुए। बैठक में मुसलमानों के सामने आने वाली समस्याओं और उनके समाधान पर गंभीर चर्चा की गई।
बैठक का उद्घाटन करते हुए जमात-ए-इस्लामी हिंद महाराष्ट्र के अध्यक्ष मौलाना इल्यास खान फलाही ने कहा कि यह कार्यक्रम किसी सरकार या राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं है, बल्कि मुसलमानों की समस्याओं का समाधान खोजने की एक गंभीर कोशिश है। उन्होंने कहा कि राज्य में लगातार बनाए जा रहे मुस्लिम विरोधी माहौल ने मुस्लिम युवाओं में चिंता और बेचैनी पैदा कर दी है। अब केवल प्रतिक्रिया देने के बजाय भविष्य के लिए ठोस योजना बनाने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि फेडरेशन की शाखाओं को शहरों, कस्बों और गांवों तक फैलाया जाएगा तथा मस्जिदों को भी इस अभियान से जोड़ा जाएगा ताकि जरूरतमंद लोगों तक समय पर मदद पहुंच सके।
बैठक में पूर्व न्यायाधीश अभय थिप्से, विधायक अमीन पटेल, साजिद पठान, हारून खान, अबू आसिम आजमी, सना मलिक, रईस शेख, पूर्व सांसद उबैदुल्लाह खान आजमी, मौलाना हलीमुल्लाह कासमी, मौलाना उमरेन महफूज रहमानी, आरिफ नसीम खान, एडवोकेट लारा जस्सानी सहित अनेक सामाजिक और धार्मिक नेता मौजूद रहे।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि हिंदू और मुसलमानों के बीच बढ़ रही गलतफहमियों को दूर करने के लिए दोनों समुदायों के रिश्तों को मजबूत करना जरूरी है। कई विधायकों ने भी आपसी संवाद और एकता बढ़ाने पर जोर दिया। उनका कहना था कि ऐसे कार्यक्रम नियमित रूप से होने चाहिए, जिनमें सभी समुदायों के लोग शामिल हों और देशहित को प्राथमिकता दी जाए।
शिवसेना के विधायक हारून खान और कांग्रेस विधायक साजिद पठान ने कहा कि समाज में पैदा हो रहे अविश्वास और दुश्मनी के माहौल को बदलना समय की सबसे बड़ी जरूरत है। अबू आसिम आजमी ने मुस्लिम समाज में एकता और जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए सामूहिक प्रयासों पर जोर दिया।
अपने अध्यक्षीय भाषण में मौलाना हलीमुल्लाह कासमी ने कहा कि नफरत आज एक बड़े पेड़ का रूप ले चुकी है। उन्होंने महाराष्ट्र में हाल ही में पारित धर्म स्वतंत्रता कानून पर चिंता जताते हुए कहा कि इसका दुरुपयोग होने की पूरी संभावना है। उन्होंने दावा किया कि जिन राज्यों में ऐसे कानून पहले से लागू हैं, वहां अधिकतर कार्रवाई मुसलमानों के खिलाफ हुई है।
मौलाना उबैदुल्लाह खान आजमी ने कहा कि भारतीय संविधान सभी नागरिकों को धर्म की स्वतंत्रता देता है और धर्म की स्वतंत्रता तभी पूरी मानी जा सकती है जब उसके प्रचार की भी आजादी हो। उन्होंने कहा कि नया कानून इसी स्वतंत्रता को सीमित करने की कोशिश है।
पूर्व विधायक आरिफ नसीम खान ने कहा कि इस कानून का उद्देश्य सामाजिक समस्याओं का समाधान नहीं, बल्कि राज्य में तनाव और ध्रुवीकरण बढ़ाना लगता है। कई वक्ताओं ने कहा कि देश के विभिन्न राज्यों में ऐसे कानूनों को अदालतों में चुनौती दी गई है, इसलिए महाराष्ट्र सरकार को भी सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का इंतजार करना चाहिए था।
बैठक में यह सुझाव भी दिया गया कि महाराष्ट्र के इस कानून को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी जाए। अंत में मौलाना हलीमुल्लाह कासमी की दुआ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
बैठक का मुख्य संदेश यह रहा कि समाज को एकजुट होकर, संविधान और कानून के दायरे में रहकर अपने अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए तथा आपसी भाईचारे और संवाद को मजबूत बनाना चाहिए।

