(फजलुर्रहमान)
बांगरमऊ, उन्नाव में इन दिनों मिलावटखोरों का बांगरमऊ सुरक्षित चारागाह बन गया है। सरसों के तेल से लेकर दूध, खोया, घी और पनीर जैसे रोजमर्रा के खाद्य पदार्थों में मिलावट का खेल धड़ल्ले से जारी है। चंद रुपयों के मुनाफे के लिए मिलावटखोर आम जनता की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं, जबकि जिम्मेदार विभाग कुंभकर्णी नींद सोया हुआ है।
सूत्रों के अनुसार बाजार में बिकने वाले खाद्य पदार्थों में निम्नलिखित तरीकों से मिलावट की जा रही है। असली सरसों के तेल में ‘आरजीमोन’ (सत्यानाशी के बीज) का तेल और सस्ता पाम ऑयल मिलाया जा रहा है। रंग गहरा करने के लिए हानिकारक केमिकल्स का प्रयोग होता है। दूध को गाढ़ा दिखाने के लिए डिटर्जेंट, यूरिया और रिफाइंड तेल का इस्तेमाल कर ‘सिंथेटिक दूध’ तैयार किया जा रहा है। इसी दूध से बनने वाला पनीर और खोया भी जहरीला हो चुका है। शुद्ध देसी घी के नाम पर वनस्पति घी और अन्य चीजें मिलाने की खबरें भी क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी रहती हैं।क्षेत्रीय चिकित्सकों का कहना है कि इस तरह के मिलावटी खाद्य पदार्थों के सेवन से गंभीर बीमारियां पनप रही हैं। जहरीले रसायन सीधे तौर पर शरीर के मुख्य अंगों को खराब कर रहे हैं। जिससे लीवर और किडनी की समस्याएं बढ़ रही हैं। लंबे समय तक मिलावटी तेल और केमिकल युक्त दूध का सेवन कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी का कारण बन सकता है।बच्चों और बुजुर्गों में फूड पॉइजनिंग, उल्टी, दस्त और पेट दर्द की शिकायतें बढ़ रही हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि त्योहारों के समय तो खाद्य विभाग की टीमें कुछ सैंपल लेकर औपचारिकता पूरी कर लेती हैं, लेकिन आम दिनों में मिलावटखोर बेखौफ होकर अपना कारोबार चला रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि खुला तेल या घी खरीदने से बचें.

दूध और पनीर की जांच घर पर ही आयोडीन या अन्य सरल घरेलू तरीकों से करें। नकली या संदिग्ध सामान दिखने पर तत्काल उच्च अधिकारियों को सूचित करें। यदि समय रहते प्रशासन ने मिलावटखोरों पर नकेल नहीं कसी, तो बांगरमऊ क्षेत्र में स्वास्थ्य संबंधी कोई बड़ी त्रासदी हो सकती है।

