ठाणे एआईएमआईएम की मुंब्रा कॉर्पोरेटर सहर शेख के पिता यूनुस शेख ने शुक्रवार को सारे आरोप खारिज कर दिए। थाने के तहसीलदार ने उनके खिलाफ फर्जी ओबीसी जाति प्रमाणपत्र के मामले में एफआईआर की सिफारिश की थी, लेकिन यूनुस शेख ने इसे ‘राजनीतिक स्टंट’ बताया। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी की बढ़ती राजनीतिक हैसियत कुछ लोग बर्दाश्त नहीं कर पा रहे, इसलिए ये विवाद खड़ा किया गया।
सोशल मीडिया पर यूनुस शेख दो दिन से लापता बताए जा रहे थे। आखिरकार शुक्रवार को मुंब्रा पुलिस स्टेशन पहुंचे और मीडिया से बात की। उन्होंने साफ कहा, “ये तहसीलदार की रिपोर्ट है, कोई कोर्ट ऑर्डर नहीं। दो दिन इंतजार कीजिए, मैं असली दस्तावेज पेश करके सब साबित कर दूंगा।” उन्होंने ये भी बताया कि बेटी सहर को टारगेट किया जा रहा है क्योंकि उसकी लोकप्रियता बढ़ रही है।
मामला क्या है?
जनवरी 2026 के थाने नगर निगम चुनाव में सहर शेख ने मुंब्रा वॉर्ड नंबर 30 से जीत हासिल की थी। जीत के बाद उनका वायरल वीडियो “कैसे हराया?” पूरे महाराष्ट्र में चर्चा में आ गया। लेकिन जीत के कुछ महीने बाद ही एनसीपी प्रत्याशी सिद्दीकी फरहा शबाब अहमद, जिनकी बेटी हारी थी, ने शिकायत कर दी कि सहर ने फर्जी ओबीसी जाति प्रमाणपत्र इस्तेमाल किया।
तहसीलदार उमेश पाटिल ने जांच की और रिपोर्ट में लिखा, यूनुस शेख का 2011 का सर्टिफिकेट प्राइमा फेसी फर्जी है। फॉर्मेट गलत, सब-डिविजनल ऑफिसर के साइन नहीं, “स्टेट ऑफ महाराष्ट्र” का नाम तक नहीं।
परिवार असल में गाजियाबाद , यूपी का है, महाराष्ट्र का नहीं। यूपी के दस्तावेजों से महाराष्ट्र कनेक्शन साबित नहीं हुआ। सहर का 2018 का सर्टिफिकेट भी पिता के उसी फर्जी सर्टिफिकेट पर बनाया गया।
तहसीलदार ने सिफारिश की कि सारे प्रमाणपत्र रद्द कर दिए जाएं और यूनुस शेख पर धोखाधड़ी व फ्रॉड का केस दर्ज हो। रिपोर्ट एसडीओ को भेज दी गई है।
अभी स्थिति ये है कि जांच चल रही है। अगर आरोप साबित हुए तो सहर शेख की कॉर्पोरेटर वाली सीट पर भी असर पड़ सकता है। लेकिन पिता यूनुस शेख ने भरोसा दिलाया है कि वो सब साफ कर देंगे।
ये विवाद दिखाता है कि चुनाव जीतने के बाद सर्टिफिकेट की जांच कितनी सख्त हो जाती है। पुलिस और प्रशासन अब अगला कदम उठाएगा।
– क़ौमी फरमान डिजिटल मीडिया नेटवर्क

