(शेख सलीम)
मई 2026 के आखिर में जब पूरे भारत के 17 लाख से ज्यादा स्टूडेंट्स और उनके परिवार CBSE 12वीं के रिजल्ट का इंतजार कर रहे थे, तब उन्हें अंदाज़ा भी नहीं था कि यह इंतजार उनकी जिंदगी के सबसे परेशान करने वाले लम्हों में बदल जाएगा। पूरे साल की मेहनत, रात-रात भर पढ़ाई और इम्तिहान देने के बाद जब रिजल्ट आया तो कई छात्रों को लगा कि जो नंबर मिले हैं, वे उनके लिखे हुए जवाबों के हिसाब से नहीं हैं।
किसी को किसी और की आंसर शीट मिल गई, किसी के पन्ने गायब थे, कहीं स्कैनिंग इतनी धुंधली थी कि जवाब पढ़ना मुश्किल था, और कहीं एग्जामिनर ने ठीक से जांच किए बिना नंबर दे दिए। इस वजह से CBSE का रिजल्ट विवादों में आ गया।
इस पूरे मामले के केंद्र में Coempt Edu Tech नाम की कंपनी है, जिसे CBSE ने ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम चलाने का ठेका दिया था। आरोप है कि इसी कंपनी से जुड़ी पुरानी कंपनियां पहले भी तेलंगाना के परीक्षा विवादों में शामिल रही हैं। इसके बावजूद इसे राष्ट्रीय स्तर पर इतना बड़ा ठेका दिया गया।
विवाद तब और बढ़ गया जब यह बात सामने आई कि टेंडर की कुछ अहम शर्तों में बाद में बदलाव किए गए। आरोप है कि स्कैनिंग की गुणवत्ता कम कर दी गई, जिससे कई आंसर शीटों की तस्वीरें साफ नहीं आईं। कुछ लोगों ने यह भी दावा किया कि कई कॉपियां मोबाइल फोन से स्कैन की गईं।
बेंगलुरु के 19 वर्षीय छात्र नसरगा अधिकारी ने OSM पोर्टल में गंभीर साइबर सुरक्षा कमियां होने का दावा किया। उन्होंने कहा कि सिस्टम में ऐसी खामियां थीं जिनका गलत इस्तेमाल किया जा सकता था। उन्होंने इसकी जानकारी सरकारी साइबर एजेंसी CERT-In को दी, लेकिन उनके मुताबिक समय रहते कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
इस मामले पर विपक्ष ने भी सवाल उठाए हैं। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मांग की है कि पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए। उनका कहना है कि अगर कंपनी का पुराना रिकॉर्ड विवादास्पद था, तो उसे यह ठेका क्यों दिया गया।
विपक्षी दलों ने मांग की है कि:पूरे CBSE ऑन-स्क्रीन मार्किंग स्कैंडल की स्वतंत्र न्यायिक जांच कराई जाए।
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एक विशेष जांच दल (SIT) बनाई जाए।
Coempt Edu Tech और उससे जुड़ी पुरानी कंपनियों के सभी सरकारी ठेकों की जांच हो।
प्रभावित छात्रों की आंसर शीटों की दोबारा जांच की जाए।
जिन छात्रों को गलत नंबरों से नुकसान हुआ है, उन्हें जल्द इंसाफ मिले।
CERT-In और CBSE अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जाए।
टेंडर प्रक्रिया में किसी वित्तीय गड़बड़ी या भ्रष्टाचार की संभावना की जांच हो।
भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए परीक्षा प्रणाली में ज्यादा पारदर्शिता और जवाबदेही लाई जाए।
फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर काफी अनिश्चितता बनी हुई है और लाखों छात्र व उनके परिवार जवाब का इंतजार कर रहे हैं।
( लेखक वेलफेयर पार्टी ऑफ इंडिया से जुड़े हैं )

