शनिवार को दिल्ली में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से मुस्लिम समाज के प्रमुख एजुकेशनिस्ट, बिजनेसमैन और सोशल वर्कर्स के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की। इस डेलिगेशन का नेतृत्व जफर सरेसवाला ने किया, जो एक जाने-माने उद्योगपति हैं और मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी के पूर्व चांसलर रह चुके हैं।
इस प्रतिनिधिमंडल में कई प्रमुख नाम शामिल थे, जिनमें इनामुल राकी CMD जर्मन स्टील कंपनी, इब्रार इराकी, हाजी रायमा कच्छ गुजरात के प्रमुख बिजनेस हाउस से, अल्ताफ सादिकोट दाऊदी बोहरा जमात के महत्वपूर्ण पदाधिकारी, जुनेद शरीफ CMD निटॉन वाल्व्स लिमिटेड, समीना शेख जूम टीवी की पत्रकार, भमला साहेर सोशल एंटरप्रेन्योर, नईमा खातून वाइस चांसलर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, कौसर जहां चेयरपर्सन हज कमेटी, डॉक्टर जहीर काजी प्रेसिडेंट अंजुमन ए इस्लाम, डॉक्टर निशात हुसैन एम्स गोल्ड मेडलिस्ट और डॉक्टर फारूक पटेल चेयरमैन केपी ग्रुप शामिल रहे।
इस बैठक का मुख्य उद्देश्य मुस्लिम समाज में शिक्षा और व्यापार को बढ़ावा देना, युवाओं को स्किल्स प्रदान करना और समाज को देश की मुख्यधारा में और मजबूती से जोड़ना था। अजीत डोभाल ने इस दौरान खुलकर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि हर भारतीय की पहचान बहुस्तरीय होती है और सबसे पहले हम सभी भारतीय हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी एक पहचान के आधार पर खुद को सीमित करना सही नहीं है।
डोभाल ने यह भी बताया कि पिछले वर्षों में सेना और पैरामिलिट्री में मुस्लिम युवाओं की भागीदारी बढ़ी है, जो यह दर्शाता है कि अवसर सभी के लिए समान हैं। उन्होंने कहा कि असली चुनौती स्किल और आर्थिक सशक्तिकरण की है। उन्होंने उद्योगपतियों से अपील की कि वे शिक्षा के क्षेत्र में निवेश करें, स्कूल और कॉलेज स्थापित करें और जरूरतमंद बच्चों को स्कॉलरशिप दें, चाहे उनका धर्म कोई भी हो।
डेलिगेशन की ओर से भी कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए गए। जफर सारेस्वाला ने गुजरात के डिस्टर्ब्ड एरिया एक्ट का जिक्र किया, जिससे हाउसिंग में कठिनाइयां आती हैं।
डॉक्टर जहीर काजी ने एफसीआरए नियमों के कारण विदेशी शैक्षिक अनुदान में आने वाली बाधाओं की बात कही। डॉक्टर फारूक पटेल ने अपने संघर्ष और सफलता की कहानी साझा करते हुए बताया कि उनकी कंपनी में बड़ी संख्या में गैर मुस्लिम कर्मचारी कार्यरत हैं और गुजरात में व्यापार के लिए अनुकूल वातावरण है।
बैठक में इस्लामिक बैंकिंग जैसे नए विचारों पर भी चर्चा हुई। यह मुलाकात किसी एक घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि पिछले कुछ वर्षों से इस तरह की संवाद प्रक्रिया लगातार चल रही है। जनवरी 2026 में अजमेर शरीफ से जुड़े सूफी प्रतिनिधिमंडल ने भी अजीत डोभाल से मुलाकात कर राष्ट्रीय एकता और भाईचारे का संदेश दिया था।
2019 में अयोध्या फैसले के बाद भी डोभाल ने विभिन्न धर्मों के नेताओं से संवाद कर शांति बनाए रखने की अपील की थी। 2023 में मुस्लिम वर्ल्ड लीग के प्रमुख के साथ उनकी बैठक में इंटरफेथ हार्मोनी पर जोर दिया गया। 2021 और 2022 में सूफी उलेमा के साथ बैठकों में भी आतंकवाद और कट्टरता के खिलाफ एकजुट होने की बात कही गई।
इन सभी प्रयासों का उद्देश्य साफ है संवाद के माध्यम से गलतफहमियों को दूर करना, समाज को शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ाना और देश की एकता को मजबूत करना। डोभाल ने स्पष्ट किया कि बातचीत जारी रहनी चाहिए और समाज के हर वर्ग को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।
आगे की राह में शिक्षा, स्किल डेवलपमेंट, महिलाओं की भागीदारी और व्यापार के अवसरों को बढ़ावा देना जरूरी होगा। यदि समाज और सरकार मिलकर काम करते हैं तो न केवल मुस्लिम समुदाय बल्कि पूरा देश विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है।
देश की असली ताकत उसकी विविधता और एकता में है। यह मुलाकात इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो दिखाती है कि संवाद, सहयोग और सकारात्मक सोच से ही मजबूत भारत का निर्माण संभव है।
क़ौमी फरमान डिजिटल मीडिया नेटवर्क

