12 साल के अहमद का कमाल __चलते-चलते बिजली बनाने का सपना

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एक बच्चे की सोच, जो दुनिया की ऊर्जा का भविष्य बदल सकती है

अक्सर कहा जाता है कि बड़े आविष्कार बड़ी प्रयोगशालाओं में होते हैं। लेकिन कभी-कभी एक छोटा-सा दिमाग भी ऐसा ख़याल लेकर आता है, जो पूरी दुनिया को सोचने पर मजबूर कर देता है।

अमेरिका के मैसाचुसेट्स राज्य के कैम्ब्रिज शहर में रहने वाले 12 साल के छात्र अहमद अब्देलसलाम ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है। उन्होंने “वर्डा ” नाम की एक नई तकनीक तैयार की है, जो इंसान के चलने-फिरने से पैदा होने वाली ऊर्जा को बिजली में बदलने की कोशिश करती है। उनके इस अनोखे आइडिया ने उन्हें 2026 के प्रतिष्ठित “3एम यंग साइंटिस्ट चैलेंज” के टॉप-10 फाइनलिस्ट में जगह दिलाई है।

जहाँ लोग कदम रखते हैं, अहमद ने वहाँ बिजली देखी

हम रोज़ाना हजारों कदम चलते हैं। स्कूल जाते हैं, बाज़ार जाते हैं, सीढ़ियाँ चढ़ते हैं, खेलते हैं। लेकिन शायद ही कभी हमने सोचा हो कि हमारे हर कदम में ऊर्जा छिपी होती है।

अहमद ने इसी साधारण बात को अलग नज़र से देखा।

उन्होंने सोचा कि अगर यह ऊर्जा हर रोज़ बेकार जा रही है, तो क्यों न इसे बचाकर बिजली बनाई जाए?

यही सोच आगे चलकर वर्डा, VERDA बन गई।

वर्डा कैसे काम करता है?

वर्डा “एनर्जी हार्वेस्टिंग” तकनीक पर आधारित है। इसका मतलब है कि ऐसी ऊर्जा को इकट्ठा करना जो सामान्य रूप से बेकार चली जाती है।

जब कोई व्यक्ति चलता है, दौड़ता है या पैर ज़मीन पर रखता है, तो उससे गतिज ऊर्जा, काइनेटिक एनर्जी पैदा होती है। अहमद की तकनीक इस ऊर्जा को पकड़कर उसे बिजली में बदलने का तरीका सुझाती है।

भविष्य में इस तकनीक का इस्तेमाल,

जूतों में,

पहनने वाले स्मार्ट उपकरणों में,

रेलवे स्टेशन,

एयरपोर्ट,

स्कूल,

स्टेडियम,

मेट्रो स्टेशन,

और भीड़-भाड़ वाली जगहों पर किया जा सकता है।

अहमद का कहना है कि यही तकनीक आगे चलकर हवा और समुद्री लहरों से भी ऊर्जा लेने में मदद कर सकती है।

बचपन से ही विज्ञान से दोस्ती

अहमद अभी डार्बी वासल अपर स्कूल में मिडिल स्कूल के छात्र हैं।

जहाँ उनकी उम्र के ज़्यादातर बच्चे खेल और मोबाइल में व्यस्त रहते हैं, वहीं अहमद नई समस्याओं का हल खोजने में लगे रहते हैं।

उनका कहना है,

“मुझे नए आइडिया सोचना और विज्ञान की मदद से लोगों की समस्याओं का हल निकालना अच्छा लगता है।”

प्रेरणा किससे मिली?

अहमद को मिस्र-अमेरिकी नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक डॉ. अहमद जेवाइल से प्रेरणा मिली।

वे कहते हैं कि विज्ञान सिर्फ़ किताबों का विषय नहीं है, बल्कि लोगों की ज़िंदगी आसान बनाने का ज़रिया है।

यही सोच उन्हें लगातार नए प्रयोग करने के लिए प्रेरित करती है।

दुनिया की बड़ी प्रतियोगिता में जगह

अहमद का चयन 3एम यंग साइंटिस्ट चैलेंज 2026 के दस फाइनलिस्ट में हुआ है।

यह अमेरिका की सबसे प्रतिष्ठित मिडिल स्कूल विज्ञान प्रतियोगिताओं में गिनी जाती है। इसमें पाँचवीं से आठवीं कक्षा तक के छात्र अपने वैज्ञानिक विचार पेश करते हैं।

फाइनलिस्ट बनने के बाद हर छात्र को 3एम के एक वैज्ञानिक का व्यक्तिगत मार्गदर्शन मिलता है। कई महीनों तक अपने प्रोजेक्ट को बेहतर बनाने के बाद अक्टूबर में अंतिम मुकाबला होता है।

विजेता को 25,000 डॉलर, “अमेरिका का टॉप यंग साइंटिस्ट” का ख़िताब और अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलती है।

सिर्फ़ एक प्रतियोगिता नहीं, भविष्य की तैयारी

आज पूरी दुनिया स्वच्छ ऊर्जा (क्लीन एनर्जी) की तलाश में है।

कोयला, पेट्रोल और डीज़ल जैसे ईंधन सीमित हैं और पर्यावरण को नुकसान पहुँचाते हैं।

ऐसे समय में अगर इंसानों की रोज़मर्रा की हरकतों, हवा या समुद्री लहरों से बिजली बनाई जा सके, तो यह भविष्य की ऊर्जा व्यवस्था में अहम भूमिका निभा सकता है।

हालाँकि वर्डा अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन इसका विचार वैज्ञानिकों का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है।

हमारे बच्चों के लिए एक पैग़ाम

अहमद अब्देलसलाम की कहानी सिर्फ़ एक बच्चे की सफलता नहीं है।

यह हर छात्र, हर शिक्षक और हर माँ-बाप के लिए एक संदेश है कि अगर बच्चों को सवाल पूछने, सोचने और प्रयोग करने की आज़ादी मिले, तो वे कम उम्र में भी बड़े बदलाव ला सकते हैं।

भारत सहित दुनिया के कई देशों में लाखों बच्चे विज्ञान पढ़ते हैं। लेकिन विज्ञान का असली मक़सद सिर्फ़ परीक्षा पास करना नहीं, बल्कि समाज की समस्याओं का हल ढूँढना है।

आज जब दुनिया ऊर्जा संकट और पर्यावरण की चुनौतियों से जूझ रही है, तब 12 साल का एक बच्चा हमें यह याद दिला रहा है कि हर बड़ा बदलाव एक छोटे आइडिया से शुरू होता है।

हो सकता है आने वाले वर्षों में वर्डा जैसी तकनीकें हमारे घरों, स्कूलों और शहरों का हिस्सा बन जाएँ।

अहमद अब्देलसलाम ने साबित कर दिया कि उम्र छोटी हो सकती है, लेकिन सोच कभी छोटी नहीं होती।

जिस दिन बच्चों के सवालों को गंभीरता से लिया जाएगा, उसी दिन दुनिया का भविष्य और भी रोशन होगा।

-क़ौमी फ़रमान डिजिटल मीडिया नेटवर्क

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