(रईस खान)
लखनऊ में इंटीग्रल यूनिवर्सिटी इन दिनों खेती के नए भविष्य की झलक दिखा रही है। यहां आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन एयरसा वीबीकॉन 2025 में यह चर्चा हुई कि कैसे आधुनिक तकनीक, खासकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और रोबोटिक्स, खेती को आसान, लाभकारी और टिकाऊ बना सकती हैं।
सम्मेलन में वैज्ञानिकों, शिक्षकों, कृषि विशेषज्ञों, अधिकारियों और किसानों ने एक साथ बैठकर खेती की समस्याओं और उनके समाधान पर बात की। वक्ताओं ने कहा कि मौसम की अनिश्चितता, पानी की कमी और बढ़ती लागत जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए अब स्मार्ट खेती अपनाना जरूरी हो गया है।
कार्यक्रम में बताया गया कि एआई तकनीक से खेत की मिट्टी की जांच, फसल की निगरानी, सिंचाई की सही मात्रा और कीट रोगों की पहचान पहले से संभव हो सकेगी। रोबोटिक्स की मदद से बुवाई, छिड़काव और कटाई जैसे काम कम समय और कम खर्च में किए जा सकेंगे।
सम्मेलन के साथ लगे किसान एक्सपो में आधुनिक कृषि मशीनें, स्मार्ट उपकरण और नई तकनीकों के मॉडल प्रदर्शित किए गए। किसानों और युवाओं ने इन्हें बड़े उत्साह से देखा और समझा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि खेती में तकनीक का सही उपयोग किया जाए तो किसानों की आमदनी बढ़ेगी और देश की खाद्य सुरक्षा भी मजबूत होगी। यह सम्मेलन यह संदेश देता है कि अब खेती केवल मेहनत नहीं, बल्कि समझदारी और तकनीक का काम बनती जा रही है।

