(रईस खान)
अयातुल्लाह अली ख़ामेनेई की शहादत ने पूरी दुनिया को हिला दिया है। अमेरिका और इजरायल के हमलों में उनकी मौत के बाद ईरान में 40 दिन का मातम है, लेकिन दुनिया भर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। कुछ जगहों पर लोग दुख मना रहे हैं, तो कहीं जश्न मना रहे हैं। बड़े मुल्कों के लीडरों ने दुख जताया है और अमन की अपील की है। लेकिन सवाल ये है कि आने वाले दिनों में लगातार हमलों पर क्या असर पड़ेगा?
दुनिया भर में विरोध प्रदर्शन के हालात
ख़ामेनेई की शहादत की ख़बर फैलते ही ईरान में तेहरान, क़ुम और मशहद जैसे शहरों में हज़ारों लोग सड़कों पर निकल आए। लोग झंडे लहरा रहे हैं, ख़ामेनेई की तस्वीरें उठाए दुख मना रहे हैं, और अमेरिका-इजरायल के खिलाफ नारे लगा रहे हैं। ईरानी मीडिया कहता है कि दुख की लहर है, लेकिन सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं दिख रही हैं।
पाकिस्तान में हालात ज़्यादा गंभीर हैं। कराची में अमेरिकी कांसुलेट पर हमला हुआ, जहां प्रदर्शनकारियों ने आग लगा दी और पत्थरबाज़ी की। पुलिस ने आंसू गैस और फायरिंग की, जिसमें 9 लोग मारे गए और 20 घायल हुए। इस्लामाबाद और लाहौर में भी हज़ारों लोग सड़कों पर हैं, अमेरिकी दूतावास को घेरने की कोशिश कर रहे हैं। सरकार ने सेक्शन 144 लगा दी है, लेकिन लोग नहीं मान रहे। इराक़ में बग़दाद के ग्रीन ज़ोन में अमेरिकी एम्बेसी पर हमले की कोशिश हुई, जहां सैकड़ों लोग जमा हो गए।
भारत में कश्मीर और झारखंड जैसे इलाकों में विरोध हुआ। श्रीनगर में हज़ारों लोग सड़कों पर निकले, अमेरिका-इजरायल के खिलाफ नारे लगाए। इंटरनेट बंद कर दिया गया ताकि हालात कंट्रोल में रहें। दिल्ली के जंतर मंतर और लखनऊ के पुराने शहर में प्रदर्शन हो रहे हैं। शहरों में कारोबार के बजाय सन्नाटा है। ग्रीस के एथेंस में अमेरिकी और इजरायली एम्बेसी पर मार्च हुआ, जहां 1000 से ज़्यादा लोग जमा हुए। लंदन, न्यूयॉर्क और लॉस एंजिल्स में भी प्रदर्शन हुए,कुछ में दुख जताया गया, तो कुछ में जश्न। ऑस्ट्रेलिया और यूरोप में भी छोटे-छोटे ग्रुप्स ने सड़कें रोकीं। कुल मिलाकर, शिया बहुल इलाकों में दुख और गुस्सा ज़्यादा है, जबकि दूसरे जगहों पर मिली-जुली प्रतिक्रिया।
दुनिया के बड़े लीडरों ने दुख जताया और अमन की अपील की। यूरोपीय यूनियन की फॉरेन पॉलिसी चीफ काजा कल्लास ने कहा कि ख़ामेनेई की मौत ईरान के लिए “डिफाइनिंग मोमेंट” है, और अब ईरान के लोग आज़ादी की राह चुन सकते हैं। फ्रांस के प्रेसिडेंट इमैनुअल मैक्रों ने चेतावनी दी कि ये जंग “इंटरनेशनल पीस के लिए ख़तरनाक” है, और ईरान को न्यूक्लियर प्रोग्राम पर बात करनी चाहिए।
चीन ने “डीप कंसर्न” जताया और कहा कि ईरान और उसके दुश्मनों को संयम बरतना चाहिए। रूस ने भी ईरान का साथ दिया, और कहा कि ये हमले “अनजस्ट” हैं। अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने जश्न मनाया, कहा कि ख़ामेनेई “एविल” थे, और ईरान के लोगों को रिजीम बदलने का मौका मिला। लेकिन ईरान के प्रेसिडेंट मसूद पेज़ेशकियन ने बदला लेने की कसम खाई है। भारत में कश्मीर के प्रदर्शन पर लोकल लीडरों ने अमन की अपील की। कुल मिलाकर, ज़्यादातर लीडर जंग रोकने की बात कर रहे हैं, लेकिन ईरान गुस्से में है।
आने वाले समय में हमलों पर क्या असर?
ख़ामेनेई की मौत ने ईरान को मजबूत किया है, और वो ज़्यादा ख़तरनाक भी हो सकता है। ईरान ने अंतरिम काउंसिल बनाई है, जो देश चला रही है। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि ईरान बदला ले सकता है, मिसाइल और ड्रोन हमले बढ़ सकते हैं, जो इजरायल, अमेरिकी बेस और गल्फ मुल्कों पर होंगे। लेकिन अमेरिका-इजरायल कहते हैं कि उनके हमले ईरान की मिलिट्री को कमज़ोर करेंगे, ताकि वो लड़ न सके।
रूस और चीन ईरान के साथ हैं, तो जंग फैल सकती है। लेकिन अगर बातचीत हुई, तो अमन आ सकता है। ईरान के लोग अब रिजीम बदल सकते हैं, लेकिन हार्डलाइनर्स मज़बूत भी हो सकते हैं। कुल मिलाकर, आने वाले दिन ख़तरनाक हैं, ज़्यादा हमले हो सकते हैं।

