रमज़ान में छिड़ी जंग, ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच जबरदस्त हमला 

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  (रईस खान)

आज 28 फरवरी 2026 को रमज़ान के पाक महीने में, मिडल ईस्ट में एक बड़ी जंग छिड़ गई है। अमेरिका और इज़राइल ने मिलकर ईरान पर ज़ोरदार हमले शुरू कर दिए हैं। तेहरान में धमाकों की आवाज़ें गूंज रही हैं और धुआं उठ रहा है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया है कि ये “मेजर कॉम्बैट ऑपरेशंस” हैं, जिनका मकसद ईरान की सरकार को उखाड़ फेंकना और उसके न्यूक्लियर प्रोग्राम को खत्म करना है। ईरान ने जवाबी हमले किए हैं, इज़राइल पर मिसाइलें दागीं और अमेरिकी बेसों पर अटैक किया, जैसे कतर, बहरीन, यूएई और जॉर्डन में।

ये जंग रमज़ान के महीने में हो रही है, जो मुसलमानों के लिए बहुत मुकद्दस है। इतिहास में भी रमज़ान में एक मशहूर जंग हुई थी – जंग-ए-बद्र। ये जंग 17 रमज़ान 2 हिजरी (13 मार्च 624 ईसवी) को लड़ी गई थी। उस वक्त पैगंबर मुहम्मद (सल्ल.) ने 313 मुसलमानों के साथ मक्का के 1000 मुशरिकों का मुकाबला किया और जीत हासिल की। ये जंग मुसलमानों के लिए हौसला बढ़ाने वाली थी, क्योंकि कम तादाद में होने के बावजूद अल्लाह की मदद से वो जीते। आज की जंग में भी कुछ लोग इसे बद्र से जोड़ रहे हैं, कहते हैं कि ईरान मुसलमानों की तरह मज़बूत खड़ा रहेगा। लेकिन हकीकत ये है कि ये संघर्ष बहुत बड़ा और खतरनाक है।

ये जंग अचानक नहीं छिड़ी। 2025 में जून में 12 दिनों की जंग हुई थी, जहां इज़राइल और अमेरिका ने ईरान के न्यूक्लियर साइट्स पर हमले किए थे। ईरान ने तब भी जवाब दिया था, लेकिन अब ट्रंप ने फिर से हमला किया है। ट्रंप कहते हैं कि ईरान न्यूक्लियर हथियार बना रहा है और मिसाइल प्रोग्राम चला रहा है, जो अमेरिका और इज़राइल के लिए खतरा है। इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि ये हमले “एक्ज़िस्टेंशियल थ्रेट” को खत्म करने के लिए हैं।

आज सुबह इज़राइल और अमेरिका ने ईरान के शहरों जैसे तेहरान, इस्फहान, कोम और कराज पर स्ट्राइक्स किए। ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई और प्रेसिडेंट मसूद पेज़ेशकियान को टारगेट किया गया। ईरान ने बदले में इज़राइल पर सैकड़ों मिसाइलें दागीं और अमेरिकी बेसों पर हमले किए।

ये जंग सिर्फ ईरान, इज़राइल और अमेरिका तक नहीं रुकेगी। कई मुस्लिम मुल्क इसमें फंस गए हैं। ईरान ने अमेरिकी फौजों के अड्डों पर हमले किए, जो कतर, बहरीन, कुवैत, यूएई, सऊदी अरब और जॉर्डन में हैं।ये मुल्क अमेरिका के साथी हैं, लेकिन अब ईरान के निशाने पर हैं। यमन और लेबनान भी इसमें शामिल हो सकते हैं। गल्फ देशों में तेल के उत्पादन पर खतरा मंडरा रहा है, जिससे दुनिया की इकॉनमी हिल सकती है।

मुस्लिम उलेमा कहते हैं कि रमज़ान में जंग नहीं होनी चाहिए, लेकिन ये हो रही है। ईरान के लोग पहले से ही परेशान हैं – महंगाई, बेरोज़गारी और विरोध प्रदर्शन। ट्रंप ने ईरानी लोगों से अपील की है कि वो अपनी सरकार को उखाड़ फेंकें।

दुनिया भर में चिंता है। यूरोपियन यूनियन ने अपने लोगों को ईरान से निकाला है। स्पेन और यूक्रेन ने शांति की अपील की है।रूस और चीन ईरान के साथ खड़े हो सकते हैं, लेकिन अभी चुप हैं। भारत ने सभी पक्षों से संयम बरतने को कहा है।

आने वाला वक्त में इस जंग का अंजाम क्या होगा, ये कहना मुश्किल है। लेकिन मुस्लिम मुल्कों के लिए बड़ी मुश्किलें आने वाली हैं।

अगर ये फैली, तो तेल की कीमतें आसमान छू लेंगी और लाखों लोग प्रभावित होंगे। रमज़ान का महीना शांति का होना चाहिए, लेकिन ये जंग सबको सतर्क कर रही है। ईरान कहता है कि वो जीत जाएगा, जैसे बद्र में मुसलमान जीते थे। लेकिन हकीकत में, ये एक बड़ी तबाही का खतरा है।

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