(रईस खान)
उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी निवेश धोखाधड़ी मामलों में से एक में फरार आर्थिक अपराधी राशिद नसीम को संयुक्त अरब अमीरात में गिरफ्तार कर लिया गया है। प्रवर्तन निदेशालय की अपील पर दुबई पुलिस ने यह कार्रवाई की, जहां नसीम पिछले कई वर्षों से छिपा हुआ था। अधिकारियों का कहना है कि यह ₹800 से ₹1000 करोड़ की ठगी का मामला है, जिसमें हजारों निवेशकों को झांसा दिया गया। अब नसीम को भारत लाने के लिए एक्सट्राडिशन प्रक्रिया शुरू हो गई है।
प्रयागराज से शुरू हुआ ठगी का सफर
राशिद नसीम मूल रूप से प्रयागराज के करेली इलाके का निवासी है। उसने 2013 में शाइन सिटी प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना की और पहला ऑफिस प्रयागराज में खोला। महज छह महीनों में कंपनी ने लखनऊ के गोमती नगर में लग्जरी ऑफिस स्थापित कर लिया। तीन वर्षों में पूरे देश में एजेंटों का नेटवर्क फैला दिया और निवेशकों से भूखंड, फ्लैट्स और हाई रिटर्न के नाम पर अरबों रुपये जुटाए। लेकिन निवेशकों को न तो जमीन मिली और न ही रिटर्न, जिसके बाद ठगी की शिकायतें बढ़ने लगीं।
निवेशकों पर दबाव बनाने और वसूली के लिए कंपनी ने गुंडागर्दी का सहारा लिया। जब मामला गर्माया तो नसीम लखनऊ छोड़कर दिल्ली चला गया और फिर 2019 में नेपाल के रास्ते दुबई भाग निकला। वहां से वह जूम मीटिंग्स के जरिए निवेशकों को बहकाता रहा और कंपनी के कुछ ऑपरेशंस चला रहा था। ईडी ने जूम रिकॉर्ड्स और आईपी एड्रेस से उसकी लोकेशन ट्रेस की, जो दुबई की थी।
मुकदमे और ईडी की जांच
उत्तर प्रदेश पुलिस ने नसीम और उसके भाई आसिफ नसीम समेत कंपनी के खिलाफ 554 एफआईआर दर्ज की हैं, जो यूपी के अलावा कई अन्य राज्यों में फैली हुई हैं। ईडी ने इन एफआईआर के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया। जांच में पता चला कि कंपनी पोंजी स्कीम की तरह चल रही थी, जहां नए निवेशकों के पैसे से पुरानों को रिटर्न दिए जाते थे, लेकिन अंत में सभी को ठगा गया।
अप्रैल 2025 में लखनऊ की स्पेशल पीएमएलए कोर्ट ने नसीम को फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर घोषित किया। दिसंबर 2025 में ₹127.98 करोड़ की संपत्तियां जब्त की गईं, जिनमें जमीन, बैंक अकाउंट्स और अन्य एसेट्स शामिल हैं। कुल मिलाकर ईडी ने ₹264 करोड़ से ज्यादा की संपत्तियां अटैच की हैं। जांच में 18 जगहों पर छापे मारे गए और 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तारी का सफर और आगे की कार्रवाई
जनवरी 2026 में ईडी ने यूएई अधिकारियों को नसीम के खिलाफ डॉजियर सौंपा। शुक्रवार 27 फरवरी को दुबई पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया। सीबीआई यूनिट ने विदेश मंत्रालय को सूचित किया और अब यूएई के कानूनों के तहत एक्सट्राडिशन की प्रक्रिया चलेगी। अधिकारियों का कहना है कि यह यूपी का पहला बड़ा एफईओ केस है, जहां संपत्तियां जब्त होकर पीड़ितों को मुआवजा मिल सकता है।
पीड़ित निवेशक अब न्याय की उम्मीद कर रहे हैं। एक पीड़ित ने कहा, “हमारे जीवन की कमाई डूब गई, अब कम से कम पैसा वापस मिले।” ईडी और यूपी पुलिस का कहना है कि जांच जारी है और कंपनी के अन्य सदस्यों पर भी शिकंजा कसेगा।
यह गिरफ्तारी भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग का एक उदाहरण है, जहां फरार अपराधियों को पकड़ने के लिए ईडी और विदेशी एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं।

