(रईस खान)
लखनऊ:इंटीग्रल यूनिवर्सिटी में आयोजित अंतरराष्ट्रीय कांग्रेस एआईआरएसए-वीबीकॉन 2025 का मंगलवार को सफल समापन हो गया। यह दो दिवसीय कार्यक्रम इंटीग्रल इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चरल साइंस एंड टेक्नोलॉजी और उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। सम्मेलन का मुख्य विषय एआई और रोबोटिक्स आधारित स्मार्ट एग्रीकल्चर रहा।
समापन सत्र की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश की माननीय राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने की। इस अवसर पर उन्होंने प्रगतिशील किसानों और कृषि विज्ञान केंद्रों से जुड़े लोगों को सम्मानित किया। राज्यपाल ने कहा कि किसानों को पहचान और सम्मान मिलना कृषि क्षेत्र में आए सकारात्मक बदलावों का संकेत है। उन्होंने जैविक खेती, जल संरक्षण और तकनीक आधारित टिकाऊ कृषि को समय की जरूरत बताया।
राज्यपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चलाई जा रही जल संरक्षण और सिंचाई योजनाओं की चर्चा करते हुए ड्रिप सिंचाई और जैविक उत्पादों की बेहतर मार्केटिंग पर जोर दिया। उन्होंने स्वयं सहायता समूहों और किसान उत्पादक संगठनों के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने की बात कही।
इंटीग्रल यूनिवर्सिटी के संस्थापक एवं कुलाधिपति प्रोफेसर सैयद वसीम अख्तर ने कहा कि इस कांग्रेस में निकले सुझाव खेती की उत्पादकता बढ़ाने और सही निर्णय लेने में किसानों के लिए मददगार साबित होंगे। सम्मेलन में एआई आधारित स्मार्ट फार्मिंग, जलवायु अनुकूल कृषि और रोबोटिक्स के उपयोग पर विस्तार से चर्चा हुई।
कार्यक्रम में आईसीआरआईएसएटी के महानिदेशक डॉ. हिमांशु पाठक, कृषि उत्पादन आयुक्त श्री दीपक कुमार, रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रो. पंजाब सिंह सहित कई प्रतिष्ठित विशेषज्ञ मौजूद रहे।
इस अवसर पर इंटीग्रल किसान पुरस्कार देकर किसानों को सम्मानित किया गया और कृषि से जुड़ी पत्रिकाओं का विमोचन भी किया गया। सम्मेलन के तकनीकी सत्रों में वर्टिकल फार्मिंग, डिजिटल एग्रीकल्चर और नई तकनीकों पर मंथन हुआ।
यह कांग्रेस एआई और रोबोटिक्स के माध्यम से भारतीय कृषि को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आई।

