इज़राइल के बंकरों में कैद ज़िंदगी

Date:

तेल अवीव के जाफ़ा इलाके में एक पुराना पार्किंग लॉट अब बंकर बन चुका है, जहाँ सायरन की आवाज़ पर सैकड़ों लोग दौड़ते हैं, बच्चे हाथों में खिलौने लटकाए, बूढ़े कुर्सी थामे, और जवान फोन चेक करते हुए। मार्च 2026 के इन दिनों में ईरान की मिसाइलों की बौछार ने इज़राइल के हर कोने को छेद दिया है, लेकिन बंकरों के अंदर ये ज़िंदगी एक अजीब सिला-सफ़र कर रही है, डर से भरी, लेकिन उम्मीद और हँसी से रंगी। एक रब्बी कहते हैं, “ये सायरन की ज़िंदगी है, जहाँ हर मिनट एक जंग है, लेकिन हम साथ हैं तो हार नहीं मानते।

परिवार वाले घर के बेसमेंट रूम में घुस जाते हैं, जहाँ दीवारें मोटी हैं और दरवाज़ा एयरटाइट, जबकि पब्लिक शेल्टर्स में, जैसे यरूशलेम के मेडिकल सेंटर्स या होलोन के किंडरगार्टन,सैकड़ों की भीड़ लग जाती है।

सुबह का अलर्ट आते ही रूटीन बदल जाता है। होम फ्रंट कमांड ऐप पर 5-15 मिनट का वार्निंग मिलता है, लोग इमरजेंसी बैग, पानी, बिस्किट, दवा, थामे दौड़ पड़ते हैं।एक शेल्टर में 200 लोग ठूँस जाते हैं, कुछ कुर्सियों पर बैठे, बाकी खड़े। बाहर बूम की आवाज़ गूंजती है, इंटरसेप्शन की या मिसाइल की, तो अंदर सन्नाटा छा जाता है। लेकिन ये इंतज़ार घंटों का होता है, रात को तो और भी, एक दिन में 3-4 बार ऊपर-नीचे। एक माँ, नताली सिल्वरलीब, कहती हैं, “बेबी के साथ ये पागलपन है… मैं थक चुकी हूँ, ये इंतज़ार शुरू होने से ज़्यादा तनाव देता है।”

बीट शेमेश में तो एक मिसाइल ने शेल्टर ही हिट कर दिया, नौ लोग शहीद, दर्जनों घायल, वो वीडियो देखकर सबकी हिम्मत डगमगा गई, जैसे नेतानेल अल्कोबी कहते हैं, “ये हमारी सोच बदल गया, अब हर अलर्ट को सीरियस लेते हैं।” फिर भी, अंदर का माहौल सिर्फ़ डर का नहीं। जाफ़ा के एक शेल्टर में पुरिम गाने गूँजते हैं, “यहूदियों के लिए रोशनी और खुशी”, शब्बत की प्रार्थनाएँ नाच-गाने में बदल जाती हैं, “डरो मत ओ इज़राइल” और “अम यिसराइल चाई” पर तालियाँ बजती हैं। बार मित्ज़्वा सेलिब्रेशन हो जाते हैं, डीजे रेड लाइट्स जलाते हुए नाइटक्लब जैसा माहौल बना देते हैं। लोग चाय-बिस्किट बाँटते, “हैप्पी ईरान हॉलिडे” कहकर हँसते।

अमेरिकी-इज़राइली ग्रुप्स साथ बैठे चुटकुले मारते, पड़ोसी डिलीवरी सर्विस पर बहस करते। एक कुत्ता, नीसी, पुरिम हैट लगाए घूमता, सबकी हँसी उड़ा देता। स्टेफ़ ग्रेबर कहती हैं, “शायद वॉर का एड्रेनालिन है, लेकिन ये जॉय और स्टोइसिज़म का मेला लगता है।” वाई-फाई और आईपैड बैटरी पर नेशन सर्वाइव करता है, जैसे एक जोक में कहा गया।

खाने-पीने की बात करें तो बेसिक इंतज़ाम रहता है, लंबी टेबल पर सलाद, बीयर, पानी, बिस्किट। रिलिजियस मर्द प्साल्म्स खाते हैं, बाकी कोल्ड ड्रिंक्स पीते वक़्त काटते। लेकिन लंबे अलर्ट्स में दिक्कत, फ्रिज की बिजली चली जाए तो दूध खराब, बाहर बाज़ार बंद तो ताज़ा फल-सलाद मिलना मुश्किल। एक औरत ने पाँच बार शॉवर ट्राई किया, हर बार सायरन ने रोका। प्राइवेट बैग्स में स्टॉक रखते हैं, एनर्जी बार, नॉन-पेरिशेबल्स, लेकिन भीड़ में शेयरिंग से काम चलता।

इमोशनल साइड तो और गहरा है। पहली बार घुसते हुए साइलेंट स्क्रीम लगती है, साँस तेज़, सीना धड़कता, आँखें फैलीं। एक औरत उल्टी कर बैठी, दोस्तों ने साँस लेने में मदद की, “तुम अकेली नहीं हो” कहकर।

नंबनेस आ जाता है, लोग फोन पर चिपके “व्हाट-इफ़” सोचते। लेकिन फेथ सहारा देती, प्साल्म्स गाते, जेरेमायाह 29:13 पढ़ते, “भगवान हमारा शील्ड है।” एक ईवीतार कहते हैं, “शुरू में डर, फिर पैटर्न समझ आया, लेकिन बूम की आवाज़ अभी भी कँपकपा देती है।”

साशा जैसे लोग ईरान के लोगों के लिए दुआ करते, “हम शेल्टर में खुशी से बैठेंगे अगर वो आज़ाद हो जाएँ।” लेकिन कुछ गुस्से में हुकूमत को कोसते, “ये वायलेंट, रेसिस्ट गवर्नमेंट है” या मार्टीन बर्कोविट्ज़ कहतीं, “अगर ईरान को आज़ादी मिले तो ठीक, वरना सब व्यर्थ।”

कुल मिलाकर, ये बंकर ज़िंदगी डर की कैद है, लेकिन कम्युनिटी की आज़ादी भी। लोग कहते हैं, “हम झुकते नहीं, बस सिर झुकाकर दुआ करते।” लेकिन ये सिलसिला कब थमेगा, वो इंतज़ार ही सबसे भारी है।

~क़ौमी फरमान डिजिटल मीडिया नेटवर्क

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_img

पॉपुलर

और देखे
और देखे

इज़राइल को हर सप्ताह 27 हजार करोड़ का नुकसान

ईरान-इजराइल जंग को 6 दिनों का समय हो चुका...

ईरान के हमलों से गल्फ में तबाही का मंजर

 (रईस खान) ईरान ने अमेरिका और इजरायल के हमलों के...

ईरान की दिलेरी इतिहास में याद रहेगी

 (रईस खान) रमज़ान के पाक महीने में ईरान, इज़राइल...

अयातुल्लाह ख़ामेनेई की शहादत से दुनिया भर में उठी विरोध की लहर

(रईस खान) अयातुल्लाह अली ख़ामेनेई की शहादत ने पूरी दुनिया...