डॉक्टर मोहम्मद मंजूर आलम का निधन: भारतीय मुस्लिम समुदाय के एक प्रमुख विचारक और सामाजिक कार्यकर्ता का जाना

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(रईस खान)

भारतीय मुस्लिम समुदाय के प्रमुख नेता और इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्जेक्टिव स्टडीज के संस्थापक तथा चेयरमैन डॉक्टर मोहम्मद मंजूर आलम का आज निधन हो गया। उनका निधन भारतीय समाज के लिए एक बड़ी क्षति है, खासकर उन वंचित और अल्पसंख्यक समुदायों के लिए जिनके उत्थान के लिए उन्होंने अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। उनके योगदान को याद करते हुए, विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक हस्तियां शोक व्यक्त कर रही हैं। उनके निधन की खबर से मुस्लिम समुदाय में शोक की लहर दौड़ गई है।

डॉक्टर मोहम्मद मंजूर आलम भारत के प्रमुख विचारकों में से एक थे, जिन्होंने सामाजिक विज्ञान, शिक्षा और सामुदायिक विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

डॉक्टर मोहम्मद मंजूर आलम का जन्म 9 अक्टूबर 1945 को बिहार राज्य के मधुबनी जिले के रानीपुर गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम मोहम्मद अब्दुल जलील था।

उनके परिवार में दो बेटे शामिल हैं: बड़ा बेटा मोहम्मद आलम, जो वर्तमान में आईओएस के महासचिव हैं और पहले उनके गांव में एक शैक्षणिक संस्थान के प्रबंधक थे। छोटा बेटा इब्राहिम आलम, जो एक कंपनी के कार्यकारी निदेशक हैं।

डॉक्टर मंजूर आलम सामाजिक विज्ञान में पीएचडी की डिग्री प्राप्त की। वे इस्लामी सिद्धांतों और दर्शन की गहरी समझ रखते थे, जिसकी मदद से उन्होंने परंपरा और आधुनिकता के बीच सेतु बनाने का कार्य किया।

वे इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्जेक्टिव स्टडीज के संस्थापक और चेयरमैन थे, जो भारत का एक प्रमुख थिंक टैंक है। यह संस्थान मुसलमानों और अन्य वंचित समुदायों से जुड़े मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करता है, जिसमें सामाजिक-आर्थिक विकास, शिक्षा और बौद्धिक सशक्तिकरण शामिल है। डॉक्टर आलम ने मदरसों में धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ आधुनिक शिक्षा को शामिल करने की वकालत की, ताकि मुस्लिम समुदाय का समग्र विकास हो सके।

उनकी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक नेटवर्क थी। वे सामाजिक न्याय, शिक्षा और सुधार पर आधारित अनुसंधान की वकालत करते थे। उनकी किताब “डेयर आई क्वेश्चन?” शासन और लोकतंत्र पर उनके विचारों को दर्शाती है।

2025 में उनकी जीवनी “डॉक्टर मंजूर आलम: एम्पावरिंग द मार्जिनलाइज्ड” का विमोचन हुआ, जिसे वरिष्ठ पत्रकार ए.यू. आसिफ ने लिखा है। इस किताब में उनके जीवन के अज्ञात पहलुओं, योगदानों और उनके वंचितों के प्रति समर्पण को उजागर किया गया है। मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने उनकी जीवनी के विमोचन पर कहा कि “डॉक्टर मंजूर आलम का जीवन एक आंदोलन है जो हमेशा जीवित रहेगा।”

हाल के वर्षों में उनकी तबीयत खराब होने के बावजूद, वे सामाजिक कार्यों से जुड़े रहे।उनके निधन से आईओएस और भारतीय मुस्लिम समुदाय में एक शून्य पैदा हो गया है, लेकिन उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।

शोक संदेश में विभिन्न संगठनों और नेताओं ने उनके योगदान को याद किया है। अल्लाह ताला उन्हें जन्नतुल फिरदौस में जगह अता फरमाएं और उनके परिवार को सब्र प्रदान करें। आमीन।

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